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Kalpesh Patel

Comedy

4.5  

Kalpesh Patel

Comedy

बम है!

बम है!

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41

“बम है!”

सांझ का सूरज ढलने को था, लेकिन वलसाड की मोंघी बेन (उम्र 55, स्वभाव से कड़क और दिल से एकदम खांटी गुजराती) की ज़िंदगी में तो आज मानो दूसरा सूरज उग आया था। वजह साफ थी—

वे अपनी ज़िंदगी की पहली हवाई यात्रा करके सीधे अमेरिका अपने बेटे चिराग के पास जा रही थीं!वलसाड से मुंबई एयरपोर्ट तक मोंघी बेन का स्वैग देखने लायक था। तीन बड़े-बड़े बैग, जिनमें पैक थे—5 किलो हापूस आम का अचार, 3 किलो खाखरे, 2 किलो मेथी के थेपले और 6 बोतल लहसुन की चटनी। जैसे-तैसे चेकिंग पार करके वे प्लेन में दाखिल हुईं।

अंदर का नज़ारा देखकर उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। एयर होस्टेस को देखकर उन्होंने पल्लू ठीक किया और बोलीं,

“अरे छोरी! ये तो हमारी वलसाड वाली लक्ज़री बस से भी बड़ा है! लेकिन एक बात बता—इसमें ड्राइवर कहाँ बैठता है? और रास्ता भटकेगा तो बीच में कहीं रोककर पान वाले से रास्ता पूछेगा क्या?”

सीट पर बैठते ही दाएँ तरफ एक लंबे-चौड़े अमरीकी और बाएँ तरफ एक पंजाबी भाई साहब आ बैठे। मोंघी बेन तड़कीं,
“अरे बहन! ये क्या तमाशा है? मैं वलसाड की शरीफ औरत हूँ, दो आदमियों के बीच क्यों बिठाया? मुझे खिड़की वाली सीट दो!”प्लेन ने टेक-ऑफ किया तो हवा में हिचकोले लगे। मोंघी बेन ने सीट के दोनों हत्थे पकड़ लिए और चिल्लाईं,
“जय श्री कृष्णा! अरे रे रे… ये तो वलसाड की गड्ढों वाली सड़क जैसा हिल रहा है! 

ड्राइवर को बोलो ज़रा ब्रेक दबाए!”थोड़ी देर बाद भूख लगी तो उन्होंने थेपले और लहसुन की चटनी निकाली। खुशबू फैलते ही बगल वाले अमरीकी को एक थेपला बढ़ाते हुए बोलीं,
“ले भाई, खा ले! अमरीका में ऐसा शुद्ध खाना कहाँ मिलेगा? याद रखेगा—वलसाड की मोंघी बेन से पाला पड़ा था!”अमरीकी ने खाया तो तीखेपन से आँखों में पानी आ गया। मोंघी बेन ने उसकी पीठ थपथपाई और बोलीं,
“अरे, ये तो हल्का है! असली तीखापन तो घर पर बनता है!”16 घंटे की यात्रा के बाद प्लेन अमेरिका में उतरा। इमिग्रेशन पर एक सख्त-मिज़ाज अधिकारी ने उनके पुराने कपड़े के थैले की तरफ इशारा किया,
“मैडम, स्टॉप! इस बैग में क्या है? एक्स-रे में कुछ संदिग्ध दिख रहा है!”मोंघी बेन ने पल्लू ठीक किया और पूरे ठसके से बोलीं,

“अरे साहब, घबराते क्यों हो? इसमें कोई चोरी का सोना नहीं है…
बम है!”
“बम” 
शब्द सुनते ही सुरक्षा अधिकारियों के होश उड़ गए। चार-पाँच कमांडो उन्हें घेरकर खड़े हो गए। किसी ने बंदूक तान दी, कोई डॉग स्क्वाड ले आया।
“डोंट मूव! हाथ ऊपर करो!”मोंघी बेन बिल्कुल नहीं घबराईं। उल्टा डाँटकर बोलीं,
“अरे काहे की बंदूक निकाल ली? वलसाड की मोंघी बेन से डर गए क्या?”

सिक्योरिटी वालों ने थैला उलट दिया—खाखरे, थेपले, अचार और एक छोटी डिब्बी बाहर गिरी। कमांडो ने डिब्बी उठाई,
“व्हाट इज़ दिस? वेयर इज़ द बम?”

मोंघी बेन ने आँखें मटकाईं,
“अरे गधे के भाई! यही तो बम है! 

हमारे वलसाड में इसे ‘विक्स की बॉटली’ कहते हैं। जब विमान हिलता है या माथा चकराता है, सीने पर लगाओ—एकदम बम जैसी सीटी बजती है, दिमाग फ्रेश हो जाता है!”

अधिकारी ने डिब्बी खोली और सूंघा—तेज़ नीलगिरी और मिंट की खुशबू। सबको समझ आया कि यह कोई आरडीएक्स नहीं बल्कि भारत की मशहूर विक्स की डिब्बी है। 

तनाव एक सेकंड में ठहाकों में बदल गया।चीफ सिक्योरिटी अफसर ने मुस्कुराकर डिब्बी लौटाई,
“ओके मोंघी बेन, वेलकम टू अमेरिका! प्लीज़ इस ‘बम’ को संभालकर रखिए!”

मोंघी बेन ने थैला उठाया और बोलीं,

“हाँ-हाँ, ठीक है! अब रास्ता दो—मेरा बेटा चिराग बाहर इंतज़ार कर रहा है!”

और इस तरह मोंघी बेन ने अपने ‘विक्स बम’ 
के साथ अमेरिका की धरती पर धमाकेदार एंट्री मारी।



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