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Prabha Pant

Abstract Tragedy

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Prabha Pant

Abstract Tragedy

संदली की शादी, घर की बर्बादी

संदली की शादी, घर की बर्बादी

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" तुम कब तक यूं अकेले रहोगी?", लोग उससे जब तक यह सवाल कर लेते हैं और वह मुस्करा कर कह देती है, " आप सबके साथ मैं अकेली कैसे हो सकती हूं।"

उसकी शांत आंखों के पीछे हलचल होनी बंद हो चुकी है। बहुत बोलने वाली वह लड़की अब सबके बीच चुप रह कर सबको सुनती है जैसे किसी अहम जवाब का इंतजार हो उसे।

जानकी ने दुनिया देखी थी उसकी अनुभवी आंखें समझ रहीं थीं कि कुछ तो हुआ है जिसने इस चंचल गुड़िया को संजीदा कर दिया है लेकिन क्या?

"संदली, क्या मैं तुम्हारे पास बैठ सकती हूं ?, प्यार भरें स्वर में उन्होंने पुंछा।

"जरूर आंटी, यह भी कोई पुछने की बात है।" मुस्कुराती हुई संदली ने खिसक कर बैंच पर बैठने के लिए जगह बना ली।

" कैसी हो ? क्या चल रहा है आजकल ?", जानकी ने बात शुरू करते हुए पुछा।

" बस आंटी वही रूटीन, कॉलेज- पढ़ाई ..."। संदली ने जवाब दिया आप सुनाइए।"

"बस बेटा ,सब बढ़िया है।आजकल कुछ ना कुछ नया सीखने की कोशिश कर रही हूं। चश्मे को नाक पर सही करते हुए जानकी ने कहा।

अरे वाह क्या सीख रही है इन दिनों संदली ने कृतिम उत्साह दिखाते हुए कहा जिसे जानकी समझ कर भी अनदेखा कर गई।

बोली अरे छोड़ संदली तू बहुत उदास रहती दिखती कौन बात है बेटा , हम सब तेरा भला ही तो चाहते तू जल्दी से ब्याह क्यों नहीं जाती है।

आंटी क्या बताओ बाबा, मां भी यही कहते पर उनको अकेला छोड़ मन नहीं मानता ना जाने मेरे बाद उनको एक बूंद पानी भी कौन देगा मैं ही तो बस इनकी और वैसे भी अभी तो मुझे और पढ़ना भी है।

जानकी तपाक से बोल पड़ी ,तू लड़की होकर इतना पढ़ क्या करेगी संदली को क्रोध आ गया पर संभल कर बोली आंटी आपका जमाना कुछ और ठहरा और मुझे अच्छी नौकरी के लिए पढ़ना पड़े हैं। संदली तेरा भाई भी तो ठहरा हा मां भी कहती फिरे है राकेश आएगा , पता नहीं भाई कब लौटे अगर वह लौट आए तो मैं ब्याह जाऊं पर अभी नहीं।

अंदर से संदली की मां पूनम आवाज मारे संदली देख तो जरा यह पंगु (डाकिया )खत दें गया किसका है ?

संदली ने सोचा हर बार की तरह उसकी नानी ने खत भिजवाया है शादी के लिए , उसकी नानी उसे हर बार लड़का पसंद करके खत भेजती थी शादी करने के लिए।

वह बोली मां मुझसे ना पड़े जाए शादी के रिश्ते मैं तुम्हें छोड़ कहीं नहीं जाऊंगी।

हरि संदली एक बार पढ़ तो देखूं वहां सब कुशल मंगल भी है या नहीं पुनम बोली।

संदली ने देखा तो यह खत उसके भाई का था, वह खुशी के मारे दौड़ पड़ी मां भी खुश , लोग यह सोच खुश अब संदली ब्याह जाए उसका भाई एक हफ्ते बाद आने वाला है यह पढ़कर वह बेहद खुश हुई अब उसने लड़के को भी हां कर दी शादी के लिए।

सब बेहद खुश थे एक हफ्ता हुआ वह दिन आया जब राकेश आने वाला था उस दिन ,दिन से शाम , शाम से रात।सब उदास कोई ना आए उसकी मां राह देखी देखी रोने लगी संदली ने मां को सराहा ,मां हो सकता है भाई का सफर थोड़ी देर का हो क्या पता कल परसों पहुंच जाए।

जानकी बोली , तुम इसकी शादी तो कर ही दो पूनम बहन राकेश दो-तीन दिन भर पहुंचने ही वाला होगा।

संदली हां कर चुकी थी ना चाहते हुए भी उसकी शादी कर दी गई अचानक ! पूनम के घर गहने चुरा लिए गए खबर संदली तक पहुंच पड़ी संदली घर पहुंची ,मां कहती थी तुम अकेली हो जाओगी अब मैं यही रहूंगी।

ना बेटा शादी के बाद ससुराल ही लड़की का घर होवे लोगों ने संदली को समझाया लेकिन अब की बार उसे जानकी ना देखी वह लौट गई अपनी मां को खर्च देकर घर का।

इधर संदली के घर में दहेज मांग परेशान करते संदली जितना कमाती आधा मां को आधा ससुराल में दे देती वह जब भी घर आती जाती सुनती आज यह गहना चोरी हुआ कल यह गहना चोरी हो गया और भाई तो उसके लिए मर ही चुका था उसे यह समझ नहीं आया जब उसका भाई आना ही नहीं चाहता था तो खत क्यों भेजा।

और वह यह भी सोचती कि उसकी जानकी आंटी जब भी वह आती है तब मिलने क्यों नहीं आती उससे।

एक रोज घर पर ही रुक गई उसने पाया कि जानकी आंटी जिसे वह अपना शुभचिंतक मानती थी वहीं गहने चुराया करती थी।

उस समय कुछ ना बोली लेकिन सुबह जब वह ससुराल जा रही थी तब जानकी उसे अलविदा करने घर पर आई थी तब भी वह जानकी से कुछ ना बोली लेकिन वह लोगों को चकमा दे रही थी उस दिन अपने ससुराल नहीं लौटीं बस जानकी को यह दिखाना चाहती थी कि वह आज अपने गहने मां को देकर गई है और वह जा रही है वह जानकी को रंगे हाथों पकड़ना चाहती थी क्योंकि उसकी मां की नजरों में जानकी देवी थी।

रात को जब जानकी आई तो उसने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया सब लोग उसे मारने को आ रहे थे कि वह बोल पड़ी कि " तेरा भाई राकेश ही मुझसे ये सब करा रहा है।" उसके बाद दोनों मां - बेटी फूट-फूट कर रोने लगे कहा तू झूठ बोलती है। वह बोली - तेरा बेटा मेरे घर पर ही है जाकर देख ले।

संदली जब जानकी के घर गई तो देखा सच में भाई था और बोली भैया आप आ गए। राकेश डरा हुआ था बोला "हां बहन "।

संदली - कब आऐ ?

राकेश - बस अभी।

संदली - लेकिन जानकी आंटी के घर क्यों ?

( राकेश भागने लगा उतने में उसके पिता ने राकेश को चाटा मार दिया। )

कहां ऐसे राक्षस जैसे बेटे से अच्छा तु मर जाए। बेटी हमें माफ़ कर दे तु हमें अकेला छोड़ना नहीं चाहती थी हमने तेरी जबरदस्ती शादी कर दी।

तीनों खूब फूट-फूट कर रो पड़े।


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