Vijeta Pandey

Romance

4.8  

Vijeta Pandey

Romance

सलीकेदार प्यार

सलीकेदार प्यार

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नयी नयी शादी, घर-बार और जिम्मेदारियों के बीच यहां खुद को समय दे नही पाती हूं और तुम भी शिकायतें कर लो, चाय का कप स्मृति को पकड़ाते हुये मैंने उसे दोस्तों से ज्यादा ना मिल पाने का कारण तो बता दिया। पर सच तो यह कि मैं खुद पेहले जैसी नहीं रहना चाहती। रिश्तों के मायने बदल गये हैं मैं ये सब तो पेहले अच्छे से हैण्डल करना सीखूं।


अभी यही सब सोच रही थी की तभी स्मृति ने आंखो के सामने चुटकी बजाई, क्या सोच रही है, मैंने मुस्कुरा कर नहीं में सर हिला दिया।

स्मृति मेरे पीछे की तरफ आंखो से इशारा करके कुछ बताना चाह रही थी।मुड़ कर देखा तो दिलिप दराज़ो में कुछ ढूँढ रहे थें।


स्मृति- "जी मैं मदद कर दूं।"

दिलिप - "नो थैंक्स, मैं कर लूंगा।"


मैने स्मृति के हाथ पर धीरे से मारते हुये मना किया, "स्मृति, तू फालतू के मज़ाक बंद कर,चाय पी मैं हैल्प करके आती हूं ।"


"मैं कुछ मदद कर दूं?"

"हां मीरा मेरा चार्जर नहीं मिल रहा है।"

स्मृति ने फिर से बीच में नाक घुसेडी- "जीजा जी आपका चार्जर तो मेरे साथ अभी तक चाय पी रहा था, पर फोन का चार्जर चाहिये तो टेबल पर फाल्तू ही पड़ा है ले लिजिये।"

दिलिप ने मुस्कुरा कर सर हिलाया और चार्जर उठा कर बस स्मृति को थैंक्स बोल कर अपने कमरे में चले गये।


"ओहो मीरा तेरे पति तो बस अदाओं अदाओं में मारने वाले है।"चुप कर कुछ भी बोलती है।

"मै बोलती हूं, ओह गोड....एसे बातें तू किया करती थी। माना शादी के बाद कुछ चीजे बदल जाती है पर तू तो पूरा बदल गयी है....इफेक्ट ऑफ़ अरेंज मेरीज।"


"क्या बोल रही है, मुझे तो कोई इफेक्ट नहीं दिखता।"


"काश तेरी शादी म्लहार से हुई होती तो तुझे बदलना नहीं पड़ता, तू उसके साथ ऑरिजनल ही रह सक्ती थी। वैसी ही बिंदास, बेबाक, लड़ाकू और मुहब्बत से लबरेज।"


"पागल है मैं तो वैसी ही हूं ।"


"जी नहीं मैडम आप वैसी नहीं हैं ।"क्या आप जीजा जी के साथ चिपक कर बाइक पर बैठती है, खामखां उन्हें तंग करती हैं, वो रोज़ गुलाब लाते है, तुम्हे राह चलते मस्ती करने देते है? तू उनके गाल खीच कर भाग जाती है या उनकी कीज़ छुपा पाती है या फिर वो तेरे लिये टेबल पर चढ़ कर गाना गाते हैं ।"


"मैं अपने और दिलिप के रिश्ते को लेकर कुछ कहना चाहती थी पर क्या कहू सूझ ही नहीं रहा था। मैं खुद ही ग्लानि सा महसूस कर रही थी। मैंने दिलिप के आगे कभी म्लहार को सोचा तक नही फिर ये कैसे हो गया, क्या मैं सच में बदल कर दिलिप से प्यार कर रही हूं। मेरे प्यार में खोट....नहीं"स्मृति की चुटकी ने फिर मुझे ख्यालों से बाहर किया।

"अम सॉरी मीरा पर अब मुझे जाना होगा तू ज्यादा सोच मत इट्स आल राईट....अब कुछ बदल नहीं सकते। अरेंज मैरिज है ऐडजस्ट करना पड़ता है।"


मैने उसे बाय किया पर कुछ और भी कहना चाहती थी जो कह ही नहीं पायी। किससे जवाब माँगू, क्या हो रहा है मेरे साथ। सीने में आग सी लगी हुई है, मैं मेरे पति से प्यार करती हूं और म्लहार को नहीं सोचती पर फिर जवाब क्यूं नहीं दे पायी।दिलिप की आवाज़ ने मुझे अंतर्द्वंद से बाहर निकाला - "आज बीवी के हाथ वाला शाही पनीर मिलेगा।"

"हां क्यूं नहीं, गुड़ आइडिया आज पनीर बनाती हूं।"


डाइनिंग टेबल पर दिलिप मेरे खाने की बहुत तारीफ़ कर रहे थे।पर मैं चुप थी।

"चलो जल्दी से बोलो जो मन में है, आई नो तुम कुछ सोच रही हो।"

मैने चुप्पी तोडकर कह दिया...."तो चढ़ जाईये टेबल पर और गा दिजीये गाना मेरे लिये। आपकी पसंद का खाना बना है आप भी मेरे लिये कुछ कीजिये।"


दिलिप ज़ोर से हंसे और बोले टेबल गाने की नहीं खाने की जगह है। जो जगह जिसकी हो अगर उसे ना दी जाये तो वो अर्थहीन हो जाती है और एसी हरकते कूल नहीं अल्लहड़ होती हैं और हम दोनो को कुछ स्पेशल या दिखावा करने की जरूरत नहीं।


मै- "क्यूं? ओह क्युंकि ये अरेंज मैरिज है!"


दिलिप -" क्युकी हमार प्यार मैच्योर है। वी आर इन मैच्योर लव।"


मैं- "मतलब!!"


दिलिप - "मैं तुम्हारे लिये और तुम मेरे लिये जितना बदले हैं उतना कभी किसी के लिये नहीं बदले। और खुशी है इस बदलने में। क्युंकि समर्पण है इसमें, नयापन है इसमें, ये सबके लिये नही होता।"


मैं- "आप क्या बदले?"


दिलिप -" सलीका...नहीं था मुझमें....आज तुम्हारी दोस्त ने मेरी टांग खिचाई की तब पहले वाला दिलिप होता तो बोलती बंद हो जती उनकी, पर मैं तो मीरा का दिलिप बन कर खुश हूं जो हर काम अब सलीके से करता है यानी जो मेरी मीरा की दोस्त को जवाब भी सलीके से दे रहा है वो दिलिप हूं अब मैं ।

दिलिप कुर्सी छोड़ कर घुटनों के बल बैठकर मेरा हाथ थामे मेरी आंखो में देख कर पूरे आत्मविश्वास से बोले तुमसे मैं "सलीके से प्यार" करता हूं और तुम मुझसे।"


मैं - "मतलब हमें "प्यार का सलीका" आता है!"आंखे झुकाते हुये मैनें कहा,"आप खाना तो फिनिश कीजिये।"

सच मैं कभी एसी नहीं थी, इनके स्पर्श में अपनापन है पर लाज भी आती है। जिनके सामने बिना प्रयास आंखे शर्मा कर और कभी आदर में झुक जाये उनसे मेरा प्रेम सच्चा है।बिना देरी और झिझक के मैने स्मृति को वॉट्सएप्प किया.... स्मृति मेरा प्यार दिलिप से सच्चा है। बस मैं उनसे अल्ल्हड़ प्रेम नहीं करती।मैं और दिलिप एक दूसरे को "सलीके से प्यार" करते हैं ।


जवाब में स्मृति ने हार्ट इमॉजी भेजा।और लिखा "आई एम सॉरी मीरा, तू बदली नहीं बल्कि बड़ी हो गयी है।"


मैं आत्मविश्वाश से मुस्कराई और हल्के मन से अब खाना खाना शुरु किया।

आंखे हल्की, सांसे हल्की,

मैनें दिलिप को और घर को आंखे घुमा कर देखा तो पाया

"सब कुछ अच्छा और सलीकेदार।"



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