सजगता
सजगता
"अरे संतोषी, आज तूने इतनी देर कर दी। रोज तो सुबह आठ बजे खट-खटा देती है इतनी ठंड में।
इस समय दो बज रहे है। कहीं काम से जाना हो तो जा भी न पाये। इन्तजार करे आपका। (गुस्से में मैं आप सम्बोधन करती हूँ) कोई खबर भी नहीं की। "मै क्रोध से भरी उसकी लानत मलानत करती रही। वो अपराध भाव सिर झुकाये बरतनों को मलने लगी।
थोड़ा बी पी डाउन हुआ तो मैंने फिर शान्त स्वर मे पूछा-"क्यों देर हुई बताया नहीं तूने ?"
"दीदी, बिटिया के स्कूल मे परेंट मीटिंग रही। वहाँ गये रहे। मिस्त्री (उसका पति) तो रात से पिये पड़ा रहा। बिटिया हमाई बहुत होसियार है पढ़ने में। जल्दी में आपको खबर न कर पाये।"
संतोषी शिक्षा के महत्व को पहचानती थी। इसीलिये तो अपनी बेटी के स्कूल मे परेंट्स मीटिंग मे जाती है।
