शक एक बीमारी

शक एक बीमारी

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एक पति अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता होता है, दोनों की लव मैरिज हुई होती है, दोनों के परिवार वाले इस शादी के खिलाफ होते हैं। दोनों ने उनकी इज़्ज़ाज़त के बिना शादी की हुई होती है।

वक्त गुजरता जाता है और वक्त के साथ दोनों के झगड़े भी शुरु हो जाते हैं। पति अपने काम की वजह से उसको वक्त नहीं दे पाता। 

पति राहुल जब भी काम से देर से लौटता, कविता की शिकायत शुरु हो जाती, उसकी कोई ना कोई फरमाइश होती थी जो अधूरी रह जाती थी।

कविता को शक करने की बुरी आदत थी, जिसकी वजह से उन दोनों के झगड़े कम नहीं हो रहे थे।

राहुल बेचारा दिन भर मेहनत करके इतना कमाने में लगा था कि किराये के मकान और घर का खर्च अच्छे से निकल सके। कविता समझने को ही तैयार ना थी।

एक दिन वो घर जल्दी आता है तब भी कविता उससे झगड़ा करती है, उसको जाने क्या क्या सुना देती है। गुस्से में राहुल घर से निकल जाता है और अपने एक दोस्त के घर चला जाता है।

कविता को बहुत चिंता होने लगती है, रात के बारह बज जाते हैं और राहुल का पता नहीं। इतने में घर के दरवाजे की घंटी बजती है वो दौड़ कर दरवाजा खोलती है।

कविता को दरवाजे पर राहुल नहीं, पुलिस वाले दिखाई देते हैं। उनके हाथ मे राहुल का कोट होता है और वो बताते हैं कि राहुल का एक्सीडेंट हो गया है आपको हमारे साथ शिनाख्त के लिए चलना होगा।

कविता का रोना पीटना चालू हो जाता है वो अपने आप को दोष देने लगती है अपनी गलतिया उसको नजर आने लगती है।

मन ही मन वो अपनी हर भूल की माफी मांगती है। वो अभी पुलिस वालों के साथ जाने के लिए निकलती ही है तो सामने से राहुल आता दिखाई पड़ता है, वो भाग कर उसके गले लग जाती है और उससे माफी मांगती है, उसका रोना बन्द ही नहीं हो रहा होता।

जब पुलिस राहुल से कोट के बारे में पूछती है तो वो बताता है कि एक चोर उसका कोट लेकर भाग गया था शायद उसका एक्सीडेंट हो गया होगा। इस हादसे के बाद कविता कभी राहुल से झगड़ा नहीं करती, कभी शक नहीं करती और प्यार से रहने लगती है।

शक वो बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं हो सके तो दूर रहो इस बीमारी से।


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