Swati Rani

Drama


4.4  

Swati Rani

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सच्चा प्रेम

सच्चा प्रेम

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"सीमा अजय आ रहा है,काजल के साथ कल सुबह ही दोनों ने शादी कर ली है, घर से भाग के", राजेश बोला।

जैसे ही पति देव ने ये सूचना दी।

मेरे हाथों से चाय का बरतन छूटते छूटते बचा।

"हे भगवान,काजल का भाई भी तो नहीं धमक पड़ेगा मार पीट करने हमारे यहाँ",मैने पूछा ।

"अरे अब शादी हो गई, कोर्ट मैरिज की है,अजय बता रहा था, काजल के घरवाले भी राजी हो गये हैं, कल सुबह वो दोनो यहाँ आ जायेंगे,मुंबई घूमने के लिये", राजेश बोले।

अजय एक पढा-लिखा युवक है,जो पतिदेव का परम मित्र हैं।

जब मै शादी होकर ससुराल मे गई,तब पति जी ने, उनसे परिचय करवाया था।उनके बचपन का दोस्त,गोरे-चिट्टे, सीधा सादा आकर्षक व्यक्तित्व,मितभाषी थे।

एक दिन पति जी,ऑफिस से देर से लौटे, कारण पूछने पर बोले"अजय एडमिट है अस्पताल मे,बहुत चोटें आई है उसे,हालत चिंता जनक है।"

"क्या एक्सीडेंट हुआ?कहाँ?कब?कैसे?"घबरा कर मैने बहुत से प्रश्न पुछ डाले।

इन्होने सारी बाते विस्तार से बताई।काजल और अजय एक दूसरे को बेहद प्यार करते है।एक दुसरे के पडोसी हैं, पर हर सच्चे प्रेम का कोई ना कोई दुश्मन होता ही है,वही चीर-परिचित जाति का झगड़ा है।

अजय ब्राह्मण है और काजल नीची जाति की है।

काजल अपने भाई की चहेती थी।काजल के भाई को अजय बिल्कुल पसंद नहीं था। सब गुणों में आगे होने के बाद भी अजय काजल के घरवालो का दिल नहीं जीत पाया। पर अजय काजल ने एक दूसरे से मिलना ना छोडा।

"लेकिन काजल के घर वालों को क्या एतराज हो सकता था, अजय भईया अच्छा कमाते है,और उन लोगो से उँची जाति के भी है", मैंने कहा।

"सीमा हर व्यक्ति को अपने समाज,अपनी जाति पर गर्व होता है।चाहे वो कितनी ही निम्न जाति का क्यों न हो, और सब अपनी शादी बिरादरी में ही करना चाहते हैं", राजेश ने कहा।

"आज क्या हुआ ?"मैं मुद्दे पर आई।

"आज अजय ने काजल को पार्क में मिलने के लिये बुलाया था, उसके भाई को खबर लग गई।काजल के भाई ने दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया, उसके भाई ने काजल को घर चलने कहा तो अजय और काजल ने एक दूसरे का हाथ नहीं छोड़ा, बस फिर क्या था काजल के सामने ही उसके भाई ने अजय को जमकर पिटा,अधमरा कर दिया।

"होश मे तो है न अजय भईया", मैंने पुछा।

"हाँ,वो तो बार बार मुझसे यही कह रहा था,यार पता लगा,काजल को तो उन लोगो ने नहीं मारा पीटा "।

 "अरे इतना लफड़ा है तो छोड़ देना चाहिए अजय भईया को बहुत लड़की मिल जायेगी", मैने कहा।

" तुम नहीं समझोगी सीमा सच्चा प्रेम ऐसे ही पागल होता है ", पतिदेव ने कहा।

कुछ दिन में हम दोनों मुंबई शिफ्ट हो गये।

अजय भैया सामने खड़े थे।पीछे ओट मे लाल साड़ी में थी, उनकी प्रेयसी,प्रियतमा और अब पत्नी काजल।

मै गश खाकर नहीं गिरी,बस इतना ही समझ लीजिये।

नाम अनुरूप ही थी, कोयले का रंग,स्थूल शरीर,चौड़ा ,चपटा चेहरा,नाक चार कट्ठे में,सुन्दरता का मापदंड किसी भी कोने से नहीं नज़र आ रहा था।

मतलब कहा अजय भईया हंस और वो कौआ।

मैं किचेन मे चाय नाश्ता लगा रही थी कि अजय भैया ने आकर मुझ्से कहा-"भाभी काजल चाय नहीं पीती,उसके लिये कॉफी बना दिजीये"

"अच्छा "मैंने कहा।

उसी समय मन की दबी बात मेरे जुबान से बाहर न चाहते हुए भी निकल गई, "भईया इस काजल में आपने ऐसा क्या देखा जो घरवालो से लड़ गये।"

अचानक मेरी आंखें अजय से टकराई,उनकी आँखो 

मे कुछ क्रोध,कुछ अपमान,कुछ गीलापन सा उतर आया।

वो तुनक कर बोले,"भाभी मैं आपका बहुत आदर करता हूँ ,काजल के लिये जो आज कहा तो कहा पर आइंदा ना कहना क्योंकि अब वो मेरी बीवी है"।

उनके द्वारा बोले हुए शब्द मैंने समझ लिये।

यहाँ रुप नहीं , सच्चे प्रेम का प्रदर्शन हुआ है काजल सच में सौभाग्यशाली थी।


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