अनु उर्मिल 'अनुवाद'

Tragedy


4.0  

अनु उर्मिल 'अनुवाद'

Tragedy


सात लाख

सात लाख

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           राकेश और विभा की जिंदगी में सब कुछ सही चल रहा था। मगर पिछले कुछ दिनों से उन दोनो के बीच नोकझोंक काफ़ी बढ़ गयी थी। इसकी वजह था विभा का बदला हुआ व्यवहार। कुछ दिनों से अचानक से विभा ने घरवालों से बोलचाल कम कर दिया था और राकेश के साथ भी रूखेपन से पेश आने लगी थी। बात बात पर गुस्सा होना, चिड़चिड़ापन जैसी हरकतें करने लगी थी। राकेश और विभा की शादी दो साल पहले हुई थी। विभा पढ़ी लिखी थी औऱ नौकरी करना चाहती थी। राकेश को इस बात से कोई आपत्ति नही थी। काफी मेहनत के बाद विभा की नौकरी एक बैंक में लग गई थी। 

           राकेश को लगा कि शायद काम के दबाव की वजह से विभा का व्यवहार बदल रहा है। वो विभा को खुश रखने की पूरी कोशिश करता था पर इस बात से विभा पर कोई असर नही हो रहा था। वो उसे नज़रंदाज़ करने लगी थी। छोटी छोटी बातों पर राकेश से चिढ़ने लगी थी। वो सुबह काम पर निकल जाती और शाम को वापस आ कर अपने कमरें में ही बैठ जाती। कभी कभार तो खाने के लिए भी बाहर नही आती। अक्सर फोन पर ही लगी रहती। कोई कुछ कहता तो गुस्से में मुँह फुला लेती। किसी को उसका व्यवहार समझ नही आ रहा था। सब यही जानना चाह रहे थे कि आखिर समस्या क्या है। 

              पिछले कुछ दिनों से उसने घर के काम में भी हाथ बटाना कम कर दिया था। राकेश अपनी माँ को काम मे लगा देखता तो उसे दुख होता। राकेश आखिर कब तक सहन करता। एक दिन उसके सब्र का बांध टूट ही गया और उसने विभा से कहा "विभा आखिर बात क्या है? तुम अचानक से ऐसा व्यवहार क्यों करने लगी हो। माँ अकेली घर का काम करती है और तुम अपने कमरे में बैठी फोन पर लगी रहती हो। आखिर किससे इतनी बातें करती हो?"

विभा ने कहा "राकेश! मैं दिनभर ऑफिस में काम करके थक जाती हूँ। और तुम चाहते हो मैं घर का काम भी करूँ। इतना कुछ मुझसे नही होगा!"

राकेश ने कहा "घर का बाकी काम भले मत करो मगर कम से कम रसोई में तो हाथ बटा सकती हो!"

"नही! बस बहुत हुआ। अब मैं और ज्यादा घर का काम नही कर सकती। मैं कोई नौकर नही हूँ। अगर तुम्हारी माँ को इतनी ही परेशानी है तो कोई नौकर रख लो!" विभा ने बदतमीजी से जवाब दिया। राकेश विभा का जवाब सुनकर सन्न रह गया। राकेश के पिताजी ने विभा को समझाने की कोशिश की। मगर वो उनसे भी बहस करने लगी। राकेश ने गुस्से में उससे कहा कि वो उसके माता पिता से इस तरह बात नही कर सकती। उसे उनसे माफी माँगनी पड़ेगी। मगर विभा ने माफ़ी माँगने से साफ इंकार कर दिया। इस बात पर बहस काफी बढ़ गयी। विभा ने कहा कि इस घर में नही रहेगी और घर छोड़ कर जाने लगीं। राकेश ने उसे रोकने की कोशिश की मगर उसने राकेश की बातों को अनसुना कर दिया औऱ उसी वक़्त उसने अपना सामान उठाया और अपने मायके चली गयी। 

              राकेश भी बहुत गुस्से में था। मगर अपने माता पिता के कहने पर उसने विभा को फोन कर के उससे माफी मांगी और घर आने को कहा। राकेश के घरवालों ने भी विभा को समझाने की काफी कोशिश की। मगर विभा ने किसी की एक न सुनी। 

                       आखिर राकेश विभा को समझाने के लिए उसके घर गया। मगर विभा ने साफ़ साफ़ कह दिया "राकेश! मुझे तुमसे तलाक चाहिए!"। 

ये बात सुनकर राकेश के होश उड़ गए। उसने कहा "ये क्या कह रही हो विभा! इतनी छोटी सी बात के लिये तुमने मुझे छोड़ने का फैसला कर लिया। आखिर मेरी गलती क्या है? अचानक से हमारे बीच ऐसा बदल गया जो तुम मेरे साथ नही रह सकती। मैंने तो बस इतना ही कहा था कि तुम घर के काम मे मेरी माँ की मदद करो। भला इसमें मैंने गलत क्या कहा?"

उसकी बात सुनकर विभा ने कहा "मैं तुमसे कोई बहस नही करना चाहती। बस अब मैं तुम्हारे साथ और नही रह सकती। मुझें तुमसे तलाक चाहिए। अगर तुमने मुझे तलाक नही दिया तो मैं तुम पर दहेज़ उत्पीड़न का केस कर दूँगी!"

राकेश विभा के ऐसे रूप को देखकर हतप्रभ था। क्या ये वही भोली भाली विभा है या मैंने ही इसे अब तक नही पहचाना। वो इस सोच में डूब गया कि अचानक ऐसा क्या हो गया कि विभा को उससे इतनी नफरत हो गई कि वो उससे तलाक मांग रही है। 

            राकेश इसी कशमकश में उलझा हुआ था कि एक दिन उसकी मुलाकात विभा की सहेली मीता से हुई। मीता विभा के बचपन की दोस्त हैं। विभा उससे अपनी हर बात बताती है। राकेश ने मीता से कहा कि वो विभा को समझाए कि वो गलत कर रही है। तब मीता ने राकेश से कहा कि विभा नही समझेगी क्योंकि वो ये सब जानबूझकर कर रही है। उसने राकेश को बताया कि विभा का उसी के सहकर्मी के साथ अफेयर चल रहा है। वो राकेश को तलाक देकर उसके साथ रहना चाहती हैं। इसलिए वो ये सब कर रही है। ये सुनकर राकेश बहुत दुखी हुआ। उसे समझ आ गया कि विभा क्यों तलाक की ज़िद कर रही है और वो किस लिए घण्टों तक फोन पर लगी रहती थी। उसका दिल टूट गया। जिसके लिए उसने इतना सबकुछ किया उस लड़की ने उसके साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया।

               राकेश गुस्से में भरा हुआ विभा के घर पहुँचा और उसने विभा से कहा कि "मुझे तुम्हारा सारा सच पता चल गया है। मैंने तुमपर इतना विश्वास किया। तुम्हे जिंदगी में आगे बढ़ने में मदद की और इसके बदले में तुमने मेरा ही गला काट लिया। तुमने मुझें धोखा क्यों दिया?"

विभा ने कहा "अगर तुम्हें सारा सच पता चल ही गया है तो सुनो! मैं तुम्हारे साथ अब और नही रह सकती। मैं किसी और को पसंद करती हूँ और उसी के साथ रहना चाहती हूँ। और तो और मेरा स्टेटस भी तुमसे ऊँचा है। अब तुम्हारे साथ रहना मुझे गवारा नही। तुम मुझे तलाक दे दो। इसी में सबकी भलाई है!"

राकेश गुस्से से भर गया। उसने कहा कि "मैं तुम्हें इतनी आसानी से नही छोडूंगा। मैं तुम्हे कभी तलाक नही दूंगा !" इतना कहकर वो घर लौट आया। 

             घर आकर राकेश ने अपने माता पिता को विभा का सच बताया तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। राकेश की माँ राकेश को समझाते हुए कहा "बेटा! उसने जो किया वो गलत तो है । मगर अब वो तेरे साथ नही रहना चाहती तो उसे तलाक दे दे। ऐसे रिश्ते में बंधे रहने का क्या फायदा जिसमे प्रेम न हो। ऐसी लड़की से पीछा छुड़ाने में ही समझदारी है। उसे एक बुरा सपना समझ कर भूल जा!" मगर राकेश ने ज़िद पकड़ ली थी कि वो विभा को तलाक नहीं देगा। 

                    विभा ने जब देखा कि राकेश आसानी से उसका पीछा नही छोड़ेगा तो उसने अपना दांव चला। एक दिन राकेश जब ऑफिस से लौटा तो माँ को परेशान देखा। उसने माँ से परेशानी का कारण पूछा तो माँ ने उसे तलाक का नोटिस दिखाया जो विभा ने भिजवाया था। विभा ने उस नोटिस में राकेश के ऊपर दहेज़ की मांग करने और शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाकर तलाक की माँग की थी। माँ ने परेशान होते हुए कहा "अब क्या होगा बेटा? क्या वो लोग तुझे गिरफ्तार कर लेंगे?

राकेश ने कहा "नही माँ। अब इन मामलों में सीधे गिरफ़्तारी नही होती। पहले पुलिस जांच करेगी कि विभा के इल्जाम सच हैं या नही। हमनें उसके साथ कुछ भी गलत नही किया है। आप डरो मत कुछ नही होगा। पुलिस ने आस पड़ोस में पूछताछ की तो सभी ने यही कहा कि शर्मा परिवार बहुत शरीफ है और इन लोगो ने कभी भी अपनी बहू के साथ दुर्व्यवहार नही किया।

              राकेश के दहेज़ उत्पीड़न के केस की बात रिश्तेदारों में आग की तरह फैल गयी। शर्मा परिवार की बड़ी बदनामी हो रही थी। वकील ने राकेश को सलाह दी कि कोर्ट मामला कोर्ट में जाने से पहले एक बार विभा से बात कर लीजिए। अगर वो समझौते के लिए मान जाए और मुकदमा वापस ले ले तो कोर्ट के चक्कर काटने से बच सकते हैं। आप उससे एक बार बात कर के देखिये। 

                      राकेश के पिता विभा के घर गए और उन्होंने विभा से केस वापस लेने का आग्रह किया। तब विभा ने उनके सामने ये शर्त रखी कि उसे पन्द्रह लाख रुपये मुआवजा चाहिए और राकेश से तलाक भी, तभी वो केस वापस लेगी। अगर उसे पैसे न मिले तो वो राकेश को बर्बाद कर देगी। ये सुनकर राकेश के पिता सकते में आ गए। वो लोग एक मध्यम वर्गीय परिवार से थे। उनके लिए इतने पैसों का इंतज़ाम करना मुश्किल था। उन्होंने विभा और उसके परिवार से मिन्नते की पर वो लोग नही मानें। विभा के परिवार वाले भी उसके इस कृत्य में उसका साथ दे रहे थे। उन लोगों ने राकेश के पिता का बहुत अपमान किया।

                राकेश के पिता को सबने यही कहा कि इस झंझट से निकलने के लिए उन्हें विभा की बात मान लेना चाहिए। आखिर में उन्होंने भी यही फैसला किया कि वो विभा को पैसे दे देंगे। जब राकेश को इस बात की खबर लगी तो उसका खून खौल उठा। उसने अपने पिता से कहा कि आपको उस धोखेबाज औरत को पैसे देने की कोई जरूरत नही। हम इतनी आसानी से हार नहीं मानेगें। मामला कोर्ट पहुँचा। कोर्ट में विभा ने कहा कि राकेश उससे दहेज़ की मांग करता है और उसे आये दिन शारीरिक व मानसिक प्रताडना देता है। राकेश ने अपने ऊपर लगाए हुए इल्जामों को सिरे से नकार दिया। उसके पड़ोसियों ने भी उसके पक्ष में गवाही दी। कोर्ट ने उन दोनों को बातें सुनी और उन्हें आपस में समझौता करने के लिए छह माह का वक्त दिया। 

           इस बीच राकेश कई बार विभा से मिला और उसे समझाने की कोशिश की कि वो चाहे तो अब भी सब भूल कर अपने रिश्ते को और एक मौका दे सकता है। वो विभा की गलतियों को भूलकर उसे अपनाने को तैयार है। मगर विभा नही मानी। वो अपनी बात पर अड़ी रही। 

                  राकेश ने कहा कि मुआवजे की रकम बहुत ज्यादा है। इतने पैसे का इंतज़ाम वो नही कर सकता। तुम्हें कोर्ट के चक्कर काटना है तो काटो। मुझें जेल भेजकर खुश हो तो ठीक है भेज दो। मैं बेगुनाह हूँ और आज नही तो कल ये बात साबित हो ही जाएगी । विभा के वकील ने भी उसे समझाया कि समझौता करने में ही फायदा है। पुलिस की जाँच में भी मार पीट वाली बात साबित नही हो पाई है। कल को हो सकता है राकेश कोई सबूत ले आये जो उसे बेगुनाह साबित कर दे। इससे अच्छा है जो रकम वो दे रहा है उसी पर मान जाओ। विभा को तो वैसे भी राकेश के साथ रहना नही था। उसे अपने वकील की बात सही लगी और वो सात लाख रुपये लेकर केस वापस लेने को मान गयी। राकेश के पिता ने घर बेंच कर पैसों का इंतज़ाम किया और विभा को पैसे दे दिए।

          विभा ने दहेज़ उत्पीड़न का केस वापस ले लिया और तलाक के लिए अर्ज़ी लगा दी। कुछ दिनों में तलाक हो गया। राकेश और उसके परिवार ने चैन की सांस ली। मगर इस केस की वजह से उसकी और उसके परिवार की बहुत बदनामी हुई थी। राकेश को बहुत कुछ भुगतना पड़ा। दहेज़ के मामले की वजह से उसे नौकरी से भी निकाल दिया गया था और घर बिकने की वजह से उसके बूढ़े माता पिता दर दर की ठोकरें खा रहे थे। आते - जाते लोग उन पर ताने कसते थे ।

             इतने अपमान व तकलीफों ने रिश्तों पर से उसके यकीन को डिगा दिया था। इस केस से उसके व्यक्तित्व पर जो कीचड़ उछला था औऱ उसकी साफगोई पर जो प्रश्नचिन्ह लगे थे उसकी भरपाई होना मुश्किल था। ये ज़ख्म जीवनभर उसके साथ रहने वाला था। 



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