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C chand

Abstract


3.9  

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साँवली

साँवली

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जूही अपने बहनों में सबसे छोटी थी।दोनों बहने बेहद खूबसूरत थीं।जूही का रंग एकदम साँवला था।साँवले रंग की वजह से उसे सब ताना मारते रहते थे।दोनों बहनों को अपनी सुंदरता पे बहुत घमंड था।माँ बाप भी दुत्कारते रहते।तब भी जूही कभी उदास नही होती ।दिन भर घर के काम में व्यस्त रहती।दोनों बहन कॉलेज जाती तो जूही को साथ नही ले जाती बल्कि पीछे से आने को बोलतीं।जुही उनके आगे बढ़ने के बाद कॉलेज जाती।वहाँ भी दोनों बहनें अपने से अलग रखतीं।माता पिता कभी भी रिश्तेदारों के पास जूही को लेकर नहीं जातें क्योंकि जूही के जाने से उनकी बड़ी बहनों की शादी में दिक्कत आती।कभी कभी तो बहने नाम ही नही लेतीं की जूही उनकी बहन है।

जूही का रंग भले ही कम हो लेकिन उसमें हुनर की कोई कमी नहीं थी।बहनो को जब काम होता तब ही वो जूही से बातें करतीं।नहीं तो हमेशा उसका मजाक बनाती।एक दिन जूही ने अपनी बहनों को मेकअप करते देख बोला - "दीदी मुझे भी दो न मैं भी थोड़ा मेकअप कर लूं।"

दोनों बहनों ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा - 'तू क्या करेगी ये सब लगा के।कोई असर नही होगा।और बन्दर दिखेगी। तुझे जरूरत ही क्या है, ऐसे भी तुझे देखने वाला कौन है।सब देखते ही भाग जाते हैं।"

जूही मुस्कुराते हुए वहाँ से चली गई और सोंचने लगी कि "मैं क्या सच में बदसूरत हूँ, मुझे कोई भी पसंद नही करता, वो भी बस इसलिए की मेरा रंग काला है।क्या इंसान का रंग ही सबकुछ है, मन का कोई मोल नही।जब घर वालें ही ऐसा सोचते हैं तो दुनियाँ क्या क्या बोलेगी मुझे।मेरा रंग ही काला है तो इसमें मेरा क्या दोष।" जूही अपने मन में ही ये सब सवाल करने लगी।

उदास मन से उसने मोबाइल पे गोरे होने के उपाय ढूंढ़ना शुरू किया। उसमें जितने भी उपाय दियें थे सबको एक नोट बुक में लिख लिया।

और रोज एक एक उपाय करने लगी।जूही पढ़ने में बहुत होशियार थी।एग्जाम के समय दोनों बहनें जूही के आगे पीछे घूमने लगतीं।जूही सबके नोट्स बनाके देती।और वो जो भी नोट्स बनाती वही एग्जाम में आता।इसलिए दोंनो बहनें अपने मतलब से उसके पास आतीं।जूही पढ़ाई में अपने कॉलेज में टॉप पर थी।लेकिन जूही के रंग रूप की वजह से कोई दोस्त नही थें।कॉलेज में उसका मजाक ही उड़ाया जाता।एक दिन कॉलेज में प्रवेश ही कर रही थी तभी सामने से एक लड़के ने आकर बोला - "तुम जूही हो न।" जूही घबड़ा गई और बोली "हां आप कौन ?"

लड़के ने बोला- "अरे मैं । रवि।"

जूही : "रवि । अरुणा मैडम के लड़के ?"

रवि : "हां। क्यों भूल गई अपने दोस्त को। मैं आज ही आया हूँ घर तभी मैंने माँ से पूछा तुम्हारे बारे में। और मैं तुमसे मिलने आ गया।"

जूही :" रवि तुम तो काफी बदल गए हो। और भी स्मार्ट हो गए हो।"

रवि :" तुम भी तो बड़ी हो गई हो।हां पर रंग नही बदला।" (रवि ने हँसते हुए कहा)

जूही : "हां कर लो तुम भी मज़ाक ।एक तुम्ही तो बचे थे।उड़ा लो मज़ाक जैसे सब उड़ाते हैं।'

रवि :"जूही मैं तो एक दोस्त के नाते बस तुम्हें हँसाने के लिए बोला। मुझे इनसब से कोई मतलब नही ।मैं जानता हूँ तुम कैसी हो। तुम्हारे जैसा साफ दिल इंसान मैंने नही देखा।रंग रूप से कुछ नही होता।इंसान अच्छा होना चाहिए।अगर यही सब मैं सोचता तो कभी तुमसे दोस्ती ही नही करता और न ही तुमसे मिलने आता।तुम भले मुझे भूल गई लेकिन मैं नही भुला तुम्हे।ये सब तुम दिमाग में लाना भी मत समझी।तुम्हारे जैसी खूबसूरत लड़की कोई नही।अब स्माइल करो।और हां मेरा नम्बर ले लो ।अब मैं यहीं हूं।तो हम मिलते रहेंगें।"

जूही ने नम्बर लिया।और फिर दोनों की बातें शुरू हुईं।अब रवि उसे हमेशा हँसाते रहता।मोटिवेट करते रहता।दोनों मिलते जुलते रहें। दोनों बिना बात किये एक दिन भी नहीं रहते।एक दिन रवि ने जूही को प्रपोज़ किया।जूही की आँखों में ख़ुशी के आँसू थे वो ना नही बोल पाई। दोनों ने डिसाइड किया की जूही की पढ़ाई पूरी होते ही घर वालों से बात कर के दोंनो शादी कर लेंगें।जूही बहुत खुश थी।और सारे ग़म भूल चुकी थी।



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