रैम्प
रैम्प
"हमने पैसा लगाया है। इतना बड़ा मकान बनाया है। अब तुमसे पूछ कर बनवाते क्या ?" अपूर्व कड़ककर बोला।
"हमने कब कहा कि हमसे पूछ कर बनवाते।" प्रकाश ने सहजता से कहा।
"ये पहाड़-सा क्या बनाया है ? पैदल चलने वालों को परेशानी होगी ये नहीं सोचा बनाने से पहले।" सरला बोली।
"अरी सरला तू भी किससे मगज मार रही है। इन पैसे वालों की आँख पर पर्दा पड़ गया है। चल बचुआ की दवा दारू कर।" गंगा ने समझाते हुए कहा।
गेट पर हो-हल्ला सुनकर अपूर्व की पत्नी अहिल्या भी बाहर आ गई। उसने चिल्ला कर कहा - "क्या शोर मचा रखा है यहां ?"
"तुम्हारी ही कमी रह गई थी ?" गंगा तुनक कर बोली।
अपूर्व ने अपनी पत्नी को बात स्पष्ट करते हुए कहा - "इनका बच्चा रैंप पर फिसल गया। उसके चोट लग गई। बस उसी का रोना रो रहे हैं।"
"तो इसमें हमारी क्या गलती है ?" अहिल्या तपाक से बोली। "अपने बच्चों को संभाल कर रखते नहीं हैं और चले आते हैं लड़ने के लिए।" अपने पति की ओर देखते हुए अहिल्या बोली - "अरे आप जानते नहीं हैं ऐसे लोगों को। इनके मुंह पर कुछ रुपया-पैसा मारिये। अपने-आप बोलती बंद हो जायेगी।"
इससे पहले कि अपूर्व कुछ कहता। सरला तमतमा कर गुस्से में बोली - "थूकते हैं तुम्हारे पैसों पर। ये पैसा उस दिन के लिए संभाल कर रख अपने पास, जिस दिन तेरा अपना गिरकर मरेगा इस पहाड़ पर।"
इतना कहकर तीनों वहां से चले गए।
कल गृह-प्रवेश हुआ था और आज सुबह ही सुबह बद्दुआ मिल गई। अहिल्या कुछ दिनों तक परेशान रही। फिर समय के साथ घाव भर गया।
मामला शांत हुआ नजर आ रहा था। मगर बारिश के दिनों में रैम्प के कारण शहर के अलग-अलग इलाकों में अनेक घटनाएँ हुई। इस कारण शहर में मामले ने तूल पकड़ लिया। झगड़े हुए। मार-पीट हुई।
ऐसी घटनाओं को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हुआ। इसी बीच शहर का प्रबुद्ध प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी से मिला। समस्या का समाधान खोजने के लिए अनेक बैठकें हुई। अंत में फैसला हुआ कि ऐसे सभी रैम्प तोड़ दिए जाये जो जरूरत से ज्यादा ऊँचे हैं और जिन्होंने सड़क घेर रखी है।
रात को खाना खाने के बाद अपूर्व ने अहिल्या को जिलाधिकारी के आदेश के बारे में बताया।
"आप तो व्यापार मंडल के अध्यक्ष हो। आप व्यापार मंडल के सदस्यों के साथ जाकर कल जिलाधिकारी से मिलकर मामले को रफा-दफा करवाओ।"
"कल कैसे होगा ?"
"क्यों कल क्या खास काम है आपको ?"
"कल तुम्हारे मम्मी-पापा आ रहे हैं न ।"
"ओह हां। ये तो मेरे ध्यान में ही नहीं रहा। गृह-प्रवेश पर तो वो लोग आ नहीं पाये थे।"
"परसों का समय लेता हूं जिलाधिकारी से मिलने का।"
"आपने इतने मन से, मेहनत करके, इतना मंहगा स्पेशल पत्थर मंगवाया था राजस्थान से। इसे तो बचाना होगा।"
"सही कहा तुमने। आदेश तो रद्द करवाना ही पड़ेगा।"
अगले दिन सुबह से ही रुक-रुक कर बरसात हो रही थी। अपूर्व अपने सास-ससुर को लेकर आया। अहिल्या बरामदे में छाता लेकर इंतजार कर रही थी। जैसे ही कार गेट पर आकर रुकी अहिल्या छाता लेकर गेट की तरफ भागी। उसका पैर मुड़ गया। वह गिर पड़ी। उसकी चीख निकल गई।
अपनी बेटी को गिरा हुआ देखकर मां कार से उतर कर तेजी से भागी।आधे रैम्प पर तो वह तेजी से बढ़ गई मगर फिर अचानक मां का पैर फिसल गया और वह धड़ाम से गिर कर बेहोश हो गई।
अस्पताल में डॉक्टरों ने मां को मृत घोषित कर दिया।
