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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Abstract Comedy Drama

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Abstract Comedy Drama

रामनवमी

रामनवमी

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हास्य व्यंग्य : रामनवमी 
रामनवमी फिर से आ गई । हर वर्ष आ जाती है । कुछ लोग चाहते हैं कि रामनवमी आए और कुछ लोग चाहते हैं कि रामनवमी आए और वे उस पर "पत्थर वर्षा" कर उसका स्वागत करें । पत्थरबाजी उनका सबसे प्रिय शगल है । 
शोले फिल्म में जिस तरह गब्बर सिंह पूछता है कि
"होली कब है ? कब है रे होली" ? 
उसी तरह इस देश में भी एक मोमीना बेगम है जो अपने अफसरों से पूछती है "रामनवमी कब है ? कब है रे रामनवमी" ? 
 जब जब मोमीना बेगम अपने  अफसरों से रामनवमी के बारे में पूछतीं हैं तब तब अनेक राम भक्तों की जिंदगी दांव पर लग जाती है । रामनवमी आएगी तो प्रभु श्रीराम का पूजन होगा । उनका जुलूस निकलेगा ।
जुलूस में "जय श्रीराम" का उद्घोष भी होगा । बस, बात यहीं बिगड़ जाती है ।  मोमीना बेगम को इसी "जय श्री राम" के उद्घोष से समस्या है । जैसे भूत पिशाचों को हनुमान जी के नाम से ही करंट लगने लगता है वैसे ही मोमीना बेगम को भी "जय श्री राम" के नाम से मिर्गी का दौरा पड़ जाता है । 
सब लोग रामनवमी की तैयारी अपने अपने हिसाब से करते हैं । राम भक्त अपने मंदिरों की साफ सफाई करते हैं । राम मंदिर में कार्यक्रम आयोजित करते हैं । भगवान श्रीराम की पूजा करते हैं और शहर भर में शोभायात्रा निकाल कर हर्षोल्लास से त्यौहार मनाते हैं । 
लेकिन मोमीना बेगम की तैयारियां कुछ अलग ही होती हैं । वे अपने अधिकारियों को निर्देश जारी करती हैं कि वे ऐसा आदेश निकालें कि कोई राम भक्त रामनवमी नहीं मनाने पाए । जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस कमिश्नर ऐसा आदेश निकाल कर मोमीना बेगम को खुश करने में लग जाते हैं । 
इसके बाद मोमीना बेगम की "सेना" खास तैयारियां करतीं हैं । अपने अपने घरों की छतों पर पत्थर, ईंट, पेट्रोल बम और अन्य हथियार जमा करने लगती है । छुरी, तलवारों पर सान चढ़ाने लगती है । रिवॉल्वर और बंदूकों की साफ सफाई कर उन्हें चलने योग्य बनाया जाता है । बम बनाने वाली ब्रिगेड को "ठेका" दे दिया जाता है । 
इतनी सब तैयारियां होने के बाद मोमीना बेगम उनका "डैमो" देखती है । डैमो देखकर संतुष्ट होने के पश्चात अपनी सेना को आदेश देती है 
"नारा ए तकबीर" 
सेना जोर से चिल्लाती है 
"अल्लाह हो अकबर"  
 इस "शांति प्रिय" नारे को सुनकर मोमीना बेगम के कलेजे को बहुत ठंडक मिलती है । जय श्रीराम के उद्घोष की जलन यह अल्लाह हो अकबर वाला नारा ही बुझा सकता है ना ! उन्मादियों की भीड़ जब जोर जोर से "अल्लाह हो अकबर" का नारा लगती हुई दिखाई देती है तब मोमीना बेगम को अपनी "सेना",  आजकल उन्हें "कार्यकर्ता" कहते हैं, को शानदार  तैयारियों के लिए बधाई देती है । 
मोमीना बेगम को पता है कि रामनवमी नहीं मनाने देने के उसके आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी । इसलिए वह हाईकोर्ट में वकीलों की एक फौज उतार देती है जो यह दलील देती है कि उसके "राक्षसी साम्राज्य" में बहुसंख्यक बड़े प्रेम से रह रहे हैं । वे सब कुछ  हंसते हंसते सह रहे हैं । किसी को भी कोई तकलीफ़ नहीं है । 
कोर्ट में हलफनामा देकर कहा जाता है कि राम भक्त खुद ही रामनवमी का त्यौहार नहीं मनाते हैं । 
लेकिन हाईकोर्ट है कि मानता ही नहीं है । वह मोमीना बेगम के आदेश को कूड़ेदान में फेंक देता है । अजीब तानाशाही है । मजे की बात यह है कि तानाशाह मोमीना बेगम लोकतंत्र की दुहाई देने लग जाती है । 
 हाईकोर्ट भी कम नहीं है । वह बैलेंस बनाकर चलता है । रामनवमी मनाने वालों को अनुमति तो देता है पर साथ में कुछ प्रतिबंध भी लगा देता है । मसलन , जुलूस में शामिल व्यक्ति के पास डंडा भी नहीं होना चाहिए । 
लेकिन वह पत्थरबाजों के लिए ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं लगाता है । पत्थरबाज पत्थरबाजी करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं । 
 दूसरी शर्त वह यह लगाता है कि राम भक्त अपने पास फोटो पहचान पत्र अवश्य साथ में रखेंगे लेकिन वह पत्थरबाजों को अपना चेहरा नहीं ढंकने का निर्देश नहीं देता । मतलब वे लोग अपनी पहचान छुपाने के लिए अधिकृत हैं । 
अब इसके बाद तो रामनवमी पर पत्थरबाजी करना धर्म बन जाता है मोमीना बेगम की सेना का । नमक का कर्ज तो उतारना पड़ेगा ना ?  रामनवमी पर जगह जगह पर पत्थरबाजी , आगजनी , झड़प , गोलीबारी की घटनाएं आम बात हैं । राम भक्तों पर पत्थर बरसते देखकर मोमीना बेगम को बड़ा चैन मिलता है । बिल्कुल उसी तरह जैसे राक्षसों को यज्ञ का विध्वंस करने पर मिलता था ।  देखते हैं कि आज रामनवमी की शोभायात्रा पर कहां कहां से पत्थरबाजी के समाचार मिलते हैं ? 
आप सभी को रामनवमी पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयां  श्री हरि 
5.4.2025  


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