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Vandna Thakur

Romance

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Vandna Thakur

Romance

प्यार की कसक (अप्रकाशित कहानी — भाग1)

प्यार की कसक (अप्रकाशित कहानी — भाग1)

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(अप्रकाशित कहानी — भाग 1)

लेखिका: डॉ. वंदना ठाकुर


बरसात की वह शाम कुछ ज़्यादा ही खामोश थी।
रेलवे स्टेशन की पीली बत्तियाँ, भीगे प्लेटफॉर्म पर गिरती बारिश की बूँदें और हवा में घुली एक अनकही बेचैनी—सब कुछ जैसे किसी आने वाले तूफ़ान का संकेत दे रहा था।

अनाया भीगी साड़ी सँभालती हुई प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर खड़ी थी। हाथ में एक पुराना नीला लिफ़ाफ़ा, जिसे वह बार-बार खोलकर देख रही थी। उस लिफ़ाफ़े में सिर्फ़ एक ख़त नहीं था… उसमें उसकी ज़िंदगी के दस साल कैद थे।

ट्रेन के आने की घोषणा हुई, पर अनाया की धड़कनें उससे तेज़ थीं।

“अगर आज नहीं कहा… तो फिर कभी नहीं कह पाऊँगी,”
उसने खुद से फुसफुसाकर कहा।

उसी वक्त भीड़ के बीच उसे वह दिखा।

आरव।

सफ़ेद शर्ट, कंधे पर बैग, और आँखों में वही पुरानी उदासी—जो कभी सिर्फ़ अनाया पढ़ पाती थी।
वह बदला नहीं था… या शायद बहुत बदल चुका था।

अनाया के कदम जैसे ज़मीन में गड़ गए।
कॉलेज के गलियारों में हँसी, अधूरी बातें, अधूरे वादे—सब एक साथ उसकी आँखों के सामने तैर गए।

आरव ने भी उसे देख लिया।

कुछ पल के लिए समय थम-सा गया।

“तुम… यहाँ?”
आरव की आवाज़ में हैरानी कम और दर्द ज़्यादा था।

“हाँ… तुम्हें कुछ देना था,”
अनाया ने काँपते हाथों से नीला लिफ़ाफ़ा आगे बढ़ाया।

आरव ने लिफ़ाफ़ा लिया, पर खोला नहीं।

“अब क्यों?”
उसकी आँखों में सवाल था… और शिकायत भी।

अनाया ने जवाब देने के लिए मुँह खोला, मगर शब्द गले में अटक गए।
क्या वह बता सकती थी कि उसने हर रात उसकी याद में जागकर काटी थी?
कि उसकी शादी सिर्फ़ एक समझौता थी?
कि वह आज भी उसी मोड़ पर खड़ी थी, जहाँ से आरव चला गया था?

ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आ चुकी थी।
सीटी की आवाज़ ने माहौल को और भारी कर दिया।

आरव ट्रेन की ओर बढ़ा, फिर रुका।

“अगर उस लिफ़ाफ़े में वही है… जो मैं सोच रहा हूँ,”
उसने बिना पीछे देखे कहा,
“तो देर हो चुकी है, अनाया।”

“देर किस बात की, आरव?”
अनाया का स्वर टूट गया।

आरव ने मुड़कर उसकी ओर देखा।
उस नज़र में कुछ ऐसा था… जो अनाया ने पहले कभी नहीं देखा था।

“मेरी ज़िंदगी अब किसी और की अमानत है,”
इतना कहकर वह ट्रेन में चढ़ गया।

दरवाज़ा बंद हुआ।
ट्रेन चल पड़ी।

अनाया वहीं खड़ी रह गई—
हाथ खाली, आँखें नम, और दिल में उठती एक तीखी कसक

पर कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती…

क्योंकि नीला लिफ़ाफ़ा…
आरव ने खोला ही नहीं था

और अनाया जिस सच को छुपाए हुए थी—
वह सच अगर सामने आया,
तो सिर्फ़ दो ज़िंदगियाँ नहीं…
कई रिश्ते टूट सकते हैं।

क्या था उस लिफ़ाफ़े में?
आरव की ज़िंदगी किसकी अमानत है?
और क्या प्यार सच में देर से आने पर बेकार हो जाता है?

👉 भाग 2 में, जब सच दस्तक देगा… तब कसक सिर्फ़ दिल में नहीं रहेगी।

क्रमशः…


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