Lakshman Jha

Drama


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Lakshman Jha

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प्यार की भूख

प्यार की भूख

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अचानक काला भीमकाय सांढ हमारे क्लिनिक के सामने पीछे से उठाकर जोर से हमें पटक दिया !

हम चारो खाने चित्त हो गए !

आकाश घुमने लगा !

आँखों के आगे अँधेरा छा गया !

हमारे प्राण सूखने लगे !

एक करुणाभरी आवाज कुछ क्षणों में हमारी निकली -

" बाप रे बाप ..हे भगवन यह क्या हो गया ?"

वैसे बहुत सारे लोग वहाँ थे पर किसी की नजरें हम पर नहीं पड़ीं ! चलो बच तो गए ! लेकिन चाँद की दुकान हमारे क्लिनिक के माकन मालिक के बेटे की थी ! उसकी निगाहें हम पर पड़ीं ! वह दौड़ कर अपनी दुकान से बहार निकला और हमें सहारा देते हुए पूछा -

" सर यह कैसे हुआ ? ठीक तो हैं ना ? चोट तो लगी होगी ?"

उसके प्रश्नों से ज्यादा उसके सहारे की जरुरत थी !

क्लिनिक में उसने हमें बिठा दिया !

इतने में हमारा कम्पाउण्डर भी आ गया !

उसने भी पूछा -

"सर क्या हो गया "?

हमने कहा --

"पहले हमें पानी पिलाओ फिर हम तुमलोगों को यह दुखद घटना बताते हैं !'

हमारा कम्पाउण्डर किशोर और चाँद दोनों

यह जानना चाहते थे कि हमारे साथ कैसी दुर्घटना घटी ?

"वह काला सांढ जो प्रतिदिन हमारे क्लिनिक के सामने आता है और दरवाजे पर खड़ा रहता है ! आज उसी ने हमको त्रिलोक दिखला दिया !"--

कमर के दर्द को हम झेलते हुए हमने उनको बताया !

चाँद बहुत अचंभित हुआ और कहा -

"सर यह सांढ विगत दो सालों से

सारे बाजार में घूमता है पर किसी को

इसने क्षति नहीं पहुँचाया ! भला आपको कैसे यह हाल किया ?

हमलोग इसे कुछ दे दिया करते हैं और फिर यह चला जाता है ! "

किशोर ने भी चाँद का समर्थन किया --

" सर यह सांढ तो मानिये गाय ..है ..गाय !

किसी भी आदमी ,औरत या बच्चों को हानि नहीं पहुंचता है ! "

" आपको ऐसा इस सांढ ने क्यों किया ?' ---

चाँद ने हमसे फिर पूछा !

हम याद करने लगे पिछले रविबार की बात ..और उन दोनों को बताने लगे --

"हमारा किशोर ऑफ ले रखा था पिछले रविबार को !

क्लिनिक हमने खोल रखी थी !

क्लिनिक के दरवाजे पर आके वही सांढ खड़ा हो गया था !

अब कोई सुगमता से अन्दर नहीं आ सकता था !

हमने एक मग पानी उसके ऊपर छिड़क दिया और वह सांढ चला गया !"

फिर चाँद और किशोर के समझ में बातें आ गयीं और हम भी समझ गए ! अपना उपचार तो दिल्ली जा कर कराना पड़ा पर एक बात समझ में आ गयी कि त्रिष्कार से हम विजय नहीं पा सकते अपितु स्नेह और प्यार से जग को भी जीता जा सकता है !


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