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V. Aaradhyaa

Classics Inspirational

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V. Aaradhyaa

Classics Inspirational

प्रीत के रंग रंगी पीतांबरा

प्रीत के रंग रंगी पीतांबरा

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खुशियां हमेशा पराए आंगन में ही अच्छी लगती हैं, अपने आंगन में आते आते धूप की गर्माहट कम जो हो जाती है।

खुशियों की दस्तक चुपके से दी जाती है और दिलों में खुशियां कई ऐसे तक के लिए बस जाती हैं।

प्रीता की जिंदगी भी इन्हीं खुशियों के ताने-बाने में और भी खूबसूरत हो जाती है।

खुशियां खुले दरवाज़े से आती हैं तो उसकी रोशनी से पूरा घर भर जाता है ऐसा ही तो हुआ था प्रीता के साथ।

पूरे तीन साल के बाद आज करण घर आ रहा था और प्रीता की खुशी का ठिकाना नहीं था।

उसने क्या-क्या तैयारी नहीं की पूरे घर को सजाया और थोड़ा पैसे जो उसने बचा रखे तो उसने पर्दे का रंग भी बदल दिया करण को हमेशा से पीले रंग के पर्दे पसंद थे।

और....उसको हमेशा से ब्लू रंग तो उसने ब्लू और पीले का बहुत सुंदर फ्लोरल प्रिंट के पर्दे लगाए और अब उसके आने में तीन घंटे रह गए थे।

ज़ब तक वह नहा कर तैयार होने बैठी तब तक खाना बन चुका था गाजर का हलवा मटर पनीर और साथ में थोड़े से छोले भी बना लिए थे और कचोरी आ तो गरम-गरम उसके आने पर कल देती और भटूरे भी।

 उसके आने पर चलने का प्रोग्राम था।

सब कुछ माइक्रोवेव में गर्म करके खिला देती।

 इतना करने के बाद प्रीता ने उसकी पसंद की पीले रंग की साड़ी पहनी.

और उसके बाद उसने अपना रूप निहारा तो खुद पर ही उसे प्यार आ गया क्योंकि इसके पहले भी उसने यह साड़ी पहनी थी जो कि आज करण आ रहा था और उसके आने की खुशी में उसके चेहरे का रंग कुछ ज्यादा ही चमक रहा था।

जैसी दरवाजे पर दस्तक हुई तो फिर प्रीता को लगा कि यह तो खुशियों की दस्तक है।

 जब खोलने गई तो करण सामने में खड़ा था।

दोनों ने बहुत देर तक एक दूसरे को देखा।

कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहें पहला शब्द करण नहीं कहा बहुत अच्छी लग रही हो बस पिता गुलाब की तरह खिल गई।

और....अगले आधे घंटे में दोनों बात करके खाना खा रहे थे।

बातें करते हुए ऐसे रंग गए कि उन्हें देखकर लग ही नहीं रहा था कि इतने समय से वह अलग रहे हो।

जब हम किसी से दिल से प्यार करते हैं....तब वह कितना भी दूर रहे मिलने के बाद सब कुछ पहले की तरह हो जाता है।

किसी भी फॉर्मेलिटी की जरूरत नहीं पड़ती।

और....

यहां तो प्रीता और कर्ण का पति पत्नी का रिश्ता था जो कि दूर रहकर और भी नजदीक आ गया था।

करण ने एक और खुशखबरी सुनाई।

 इसे सुनकर प्रीता खुशी से उछल पड़ी ।

करण ने कहा कि,

"अब मेरा ट्रांसफर यही हो गया है। अब मैं इंडिया में ही रहूंगा और तुम्हारी तुम्हारी सेवा में रहूंगा,

तुम जो बोलोगी मैं वही करूंगा !"

"ओह करण ...! तुम्हें बता नहीं सकती कि...

 मैं आज कितनी खुश हूं। मैं तुमसे कोई काम नहीं करूंगी बस तुम आ जाओ बोलते बोलते हम बोलते बोलते प्रीता की आंखों में आंसू आ गए लेकिन यह खुशी के आंसू थे।


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