Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Drama


2  

Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Drama


पराया कौन

पराया कौन

3 mins 2.9K 3 mins 2.9K

बिलासपुर में अजय नाम का एक ईमानदार व्यक्ति रहता था। उसकी एक ही बुरी आदत थी, सच बोलना, जिससे उसे स्वयं व उसके परिवार वाले अक्सर समस्या का सामना करना पड़ता था। क्योंकि अजय बहुत सी बार नहीं बोलने वाली बात भी बोल देता था। कुछ समय बाद अजय की विमला नाम की लड़की से शादी हो गई। संयोग उस विमला भी सच बोलने वाली थी। दोनों के विचार समान होने से उनके बीच गाढ़ा प्रेम था। विमला की शादी पहले ही सरकारी अध्यापिका की नौकरी थी। जबकि अजय संविदा पर सरकारी स्कूल में पढ़ाता था। 1-2 साल तो उनकी शादी के अच्छे निकल गये है। पर धीरे-धीरे उनके बीच मे झगड़े होने लगे। झगड़े होने का कारण अजय का सच बोलना व दुनियादारी में अनुभव का नहीं होना था। क्योंकि अजय बहुत सी बातें जो पत्नी को नहीं कहनी होती वो उसे कह देता और बहुत सी बातें माता-पिता को नहीं कहनी होती वो उनको कह देता। जबकि विमला को दुनियादारी का खासा अनुभव था। वह अजय को समझाती, अजय उल्टा उससे लड़ता और कहता तू मुझे अपने माता-पिता से दूर करना चाहती है। जबकि विमला अपनी सारी सैलरी अजय के परिवार पर खर्च करती थी।

अजय के माता-पिता, अजय को कहते ये तो पराई है, ये तेरा दुख, दर्द क्यो समझेगी। तेरा दुख, दर्द तेरे भाई, तेरी बहन और हम समझेंगे। क्योंकि हम तेरे अपने है। तेरा हमसे खून का रिश्ता है। किसी गलत को बात को बार-बार कहा जाये तो वो सत्य हो ही जाती है। अजय के साथ भी ऐसा ही हुआ,वो सोचने लगा, मेरी पत्नी मुझे अपने माता-पिता से अलग करना चाहती है। एक-दिन दोनों में घर से बाहर भीलवाड़ा में ज़ोरदार लड़ाई हुई। अजय ने अपने सास, ससुर को फोन कर विमला की शिकायत कर दी। उधर विमला ने फ़ोन से अजय के माता-पिता को कुछ कह दिया। अजय के माता-पिता फ़ोन पर विमला के माता-पिता से उलझ गये। लड़ाई इतनी बढ़ गई दोनों के बीच तलाक की नौबत आ गई। विमला रूठकर अपने पीहर आ गई। दुर्भाग्य वश ऐसे ही दो महीने निकल गये। दो महीने बाद पता चला की अजय की दोनों किडनी खराब है। गर उसको किसी ने किडनी नहीं दी तो अजय कुछ दिनों का ही मेहमान है। सबने किडनी देने से हाथ खड़े कर दिये। उसके माता-पिता, भाई, बहन, दोस्त सबने किडनी देने से मना कर दिया। विमला को जब रिश्तेदारों के माध्यम से अजय के बारे में पता चला। वो पैसे की व्यवस्था करके गाड़ी लेकर अजय को अहमदाबाद ले जाने के लिये आ गई।

अजय ने उसे किडनी नहीं देने को कहा तो भी वो अपनी किडनी देकर अजय की जान बचाने आ गई थी। अजय का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ उसमे 6 लाख रुपये लगे। विमला ने अजय को अपनी एक किडनी देकर उसकी जान बचाई साथ ही साथ 6 लाख रुपये भी इलाज के लगाये। जब अजय को होश आया, उसकी आँखों मे आँसू थे। अब अजय की आँखें पूरी तरह से खुल चुकी थी। वो बोला विमला प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो, मैंने तुम्हें समझने में ग़लती कर दी। उधर से अजय के माता-पिता, भाई, बहन भी अस्पताल आ गए थे। उन्हें देख अजय बोला अब बताइये पापा-मम्मी पराया कौन है विमला की आप। पापा ने शर्म के मारे गर्दन नीचे झुका रखी थी। वो चुपचाप सुन रहे थे। अजय बोला विमला ने एक माँ को तरह मेरी देखभाल की, पिता की तरह इलाज में पैसे लगाये, एक भाई की तरह हौंसला बढ़ाया, एक बहन की तरह सच्ची सलाह दी, सदा सच्चे दोस्त की निःस्वार्थ भाव से साथ दिया,एक प्रेयसी की तरह सच्चा प्यार किया। अब आप बताइये पराया कौन है, ये या आप सब। अब उसके माता-पिता को भी अपनी ग़लती का अहसास हो चुका था। वो बोले पराया कोई खून से नहीं, पराया तो कोई दिल से होता है। यदि एक बहु को बेटी मान लिया जाये तो वो पराई नहीं होगी। वो भी हमारे घर की सदस्य ही होगी।



Rate this content
Log in

More hindi story from Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Similar hindi story from Drama