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Sanam Writer

Thriller


4.5  

Sanam Writer

Thriller


पिंजड़ा ( भाग 2 से 7 तक )

पिंजड़ा ( भाग 2 से 7 तक )

13 mins 439 13 mins 439

भाग 2 :- तीनों ने मिलकर तय किया कि उस लड़के से एक बार मिलते हैं और पूछते हैं कि वो कौन है और क्या चाहता है,मोहित ने उस नंबर पर फिर फोन किया लेकिन इस बार फोन एक लड़की ने उठाया जब मोहित ने पूछा कि ये नंबर किसका है तो उस लड़की ने बताया कि ये नंबर तो एक ब्यूटी पार्लर का है जो उस लड़की का ही है फिर मोहित ने पूछा कि कल उसे इस नंबर से एक आदमी ने फोन किया था तो उस लड़की ने बताया कि वो इस फोन से किसी को भी फोन नहीं करने देती और उसके पार्लर में कोई लड़का काम भी नहीं करता उसने मोहित को कहा कि आपको ज़रूर कोई ग़लत फहमी हुई होगी। अब तीनो और ज़्यादा सोच में पड़ गए की वो लड़का था कौन पर जल्द ही वो इस बात को भूल गए और उन तीनों ने इस एनजीओ को ट्रस्ट रेजिस्ट्रेशन पर शुरू किया और इस एनजीओ का नाम रखा मुक्ति एनजीओ धीरे धीरे इस मुक्ति एनजीओ से कई लोग जुड़े और अपनी एक हेल्पलाइन बनाई जिसपर फोन करके लापता बच्चों के बारे में बताया जा सके। एक दिन उनके हेल्पलाइन नंबर पर फोन आया कि एक गरीब बस्ती के दो बच्चे 4 दिन से गायब हैं और पुलिस कोई मदद नहीं कर रही है मोहित और गौतम ने उन दोनों बच्चों की जानकारी ली और पुलिस स्टेशन चले गए और मानसी एनजीओ ऑफिस में ही थी तभी मानसी के ई मेल पर एक मेल आता है जो कि एक डिस्पोज़ेबल ई मेल आईडी से आया था जिस मेल में लिखा था कि "मुझे पता है कि वो दोनों बच्चे इस वक्त कहाँ हैं और वो लोग उनके साथ क्या करने वाले हैं" मानसी ने उस ई मेल पर रिप्लाई किया और उसको सारी जानकारी देने को कहा लेकिन उस ई मेल से दोबारा कोई रिप्लाई नहीं आया दूसरी तरफ मोहित और गौतम पुलिस स्टेशन में इंस्पेक्टर को ये बताते हैं कि ये दोनों गरीब बच्चे पिछले चार दिन से गायब हैं और उनके माता पिता ने शिकायत भी दर्ज करवाई है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है तो इंस्पेक्टर ने ये कहते हुए कार्यवाही करने से मना कर दिया कि ऐसे गरीब बच्चे बहुत लापता होते हैं और वो सबको ढूंढने निकले तो बाकी केस कौन देखेगा ये जवाब सुनकर दोनों दंग रह गए कि पुलिस ऐसे लापरवाह कैसे हो सकती है जब वो दोनों वापस आए तो मानसी ने उन्हें उस ई मेल के बारे में बताया। गौतम ने कहा कि हम साइबर सैल से पता लगा सकते हैं कि ये ई मेल कहाँ से आया था लेकिन क्योंकि वो एक डिस्पोज़ेबल ई मेल आईडी थी इसलिए पता करना मुश्किल था। अगले दिन जब गौतम ऑफिस जाने के लिए निकला तो सिग्नल पर उसने एक अजीब बात देखी की एक संदिग्ध आदमी सिग्नल पर बैठे गरीब बच्चों को घूर रहा है उसे लगा कि कहीं ये उस गिरोह का आदमी तो नहीं उसने जाकर उस आदमी से पूछा कि वो उन बच्चों को क्यों घूर रहा तो उस आदमी ने जवाब दिया "बच्चे कितने मासूम होते हैं ना, अमीरी हो या गरीबी बस मुस्कुराते रहते हैं" गौतम ने मन ही मन में सोचा कि क्या सरफिरा आदमी है ये घूर तो ऐसे रहा है कि अभी इन बच्चों को उठा कर ले जाएगा।


भाग 3 :- गौतम वहाँ से ऑफिस जाने के लिए निकल गया लेकिन जाने से पहले उसने फिरसे उन गरीब बच्चों को खाने पीने की चीज़ें दीं दूसरी ओर मानसी को एनजीओ का एक सदस्य फोन पर बताता है कि जिस तरह वो दो बच्चे गायब हुए हैं उसी तरह 2 साल पहले भी कई बच्चे गायब हुए थे लेकिन उन्हें बचा लिया गया था और वो गिरोह भी पकड़ लिया गया था मानसी ने सोचा कि अगर वो गिरोह पकड़ लिया गया था तो फिर ये दूसरा गुरोह कब से सक्रिय है और पुलिस को अभी तक इसके बारे में पता कैसे नहीं चला उसके मन में ये बात आई कि कहीं पुलिस या फिर वो इंस्पेक्टर तो इस गिरोह से नहीं मिला। मोहित हमेशा की तरह मंदिर में था तभी वहाँ एक आदमी आता है और मोहित से टकरा जाता है ये वही आदमी था जो गौतम को सिग्नल पर मिला था उसने मोहित से कुछ बात की पहले तो मोहित ने ध्यान नहीं दिया लेकिन बाद में उसके बोलने का तरीका उसे कुछ जाना पहचाना लगा फिर उसे ध्यान आता है कि इस आदमी का बोलने का अंदाज़ तो बिल्कुल उस आदमी जैसा है जिसने मुझे फोन किया था लेकिन फिर उसने सोचा कि हो सकता है की ये उसका वहम हो और फिर मोहित वहाँ से चला जाता है थोड़ी देर बाद मोहित पीछे पलटकर देखता है तो वो देखता है कि वो आदमी वहाँ किसी औरत से बात कर रहा है और उसे एक लिफ़ाफ़ा दे रहा है पर ये बात कुछ ध्यान देने वाली नहीं लगी उसने इस बात को नज़रंदाज़ कर दिया। कुछ दिन बाद गौतम और मोहित के नंबर पर एक मैसेज आया जो एक प्राइवेट नंबर से आया था कि अगर उस गिरोह का पता लगाना है तो जिस बस्ती में वो दो बच्चे रहते थे उसके पीछे जो जंगल है वहाँ आ जाए और अपने साथ मानसी को ना लाए फिर वो दोनों तय करते हैं कि उस जंगल में जाकर देखेंगे कि वो कौन है जिसने मैसेज किया था वो दोनों वहाँ गए लेकिन जंगल सुनसान था उन्हें वहाँ कोई नहीं मिला और वो दोनों वापस आ गए मोहित और गौतम दोनों उस आदमी के बारे में सोच रहे थे जिनसे वो सुबह मिले थे लेकिन दोनों ने एक दूसरे को उसके बारे में नहीं बताया।


भाग 4 :- दोनों बहुत उदास थे कि इतनी दूर जाकर भी उनके हाथ कुछ नहीं लगा और साथ में दोनों को बहुत गुस्सा भी आ रहा था कि किसी ने उनके साथ इतना गंदा मज़ाक किया उनका गुस्सा शांत भी नहीं हुआ था कि गौतम के फोन की रिंग बजी फिर वही प्राइवेट नंबर था लेकिन इस बार सामने से एक आदमी फोन पर गाना गाता है "मधुबन खुश्बू देता है सागर सावन देता है जीना उसका जीना है जो औरों को जीवन देता है" फिर उस आदमी ने कहा कि ये है तुम लोगों का पहला क्लू उस गिरोह तक पहुंचने का और फोन कट जाता है दोबारा उस नंबर पर फोन नहीं लगता वो दोनों इस क्लू के बारे में मानसी को बताते हैं और फिर तीनों सोचने लगते हैं कि इस क्लू का मतलब क्या है वो एनजीओ के बाकी लोगों को भी ये क्लू बताते हैं पर कोई भी इसे नहीं समझ पाता तभी मोहित और गौतम को उस आदमी के बारे में याद आता है और वो दोंनो एक दूसरे को बता देते हैं। ये बात थोड़ी अजीब थी की दोनों उस आदमी से ज़िंदगी में पहली बार मिले और वो भी एक ही दिन। लेकिन आखिर इस क्लू का मतलब क्या था , दो दिन बीत गए पर किसी को भी कोई लीड नहीं मिल सकी,एक दिन मानसी कुछ सामान खरीदने बाज़ार गयी एक दुकान पर उसे पता चला कि वो अपना कार्ड नहीं लाई है और ऑनलाइन पेमेंट उपलब्ध नहीं है और मानसी के पास उस वक्त कैश भी नहीं था उसने दुकान वाले से बहुत कहा कि वो घर जाकर पैसे ले आएगी अभी उसका सामान ले जाना बहुत ज़रूरी लेकिन दुकानदार नहीं माना तभी वहाँ एक लड़का आता है और अपना कार्ड दुकानदार को देकर कहता है की इनका पेमेंट मैं करूंगा मानसी ने उस लड़के को इसके लिए शुक्रिया बोला और उसका नाम पूछा उस लड़के ने कहा कि उसका नाम संस्कार है और फिर दोनों अपने अपने रस्ते चले गए घर आकर मानसी ने गौतम को संस्कार के बारे में बताया तो गौतम ने उससे पूछा कि क्या उसने संस्कार का कोई नंबर लिया है ताकि वो उसे उसके पैसे वापस कर सके पर मानसी के पास संस्कार का कोई नंबर नहीं था।तभी उनके घर मोहित आता है मोहित मज़ाक मज़ाक में मानसी से पूछ लेता है कि संस्कार दिखने में कैसा है हम उसके पोस्टर सड़कों पर लगवा देंगे कि ये बंदा जहाँ भी दिखे इसे पकड़ के लाया जाए ताकि हम इसे पैसे वापस कर सकें मानसी संस्कार का हुलिया बताती है तो मोहित और गौतम चौंक जाते हैं क्योंकि ये वही लड़का रहता है जिससे ये दोनों उस दिन मिले थे अब तीनों को बड़ा अजीब लगता है की एक ही शख्स हम तीनों को कैसे मिल गया और उस क्लू का क्या मतलब है जो उस प्राइवेट नंबर वाले ने दिया था।


भाग 5 :- रात में सोते सोते मोहित एक दम से उठ गया और उसने मानसी को फोन किया और उससे बोला कि उसे उस क्लू के बारे में बात करनी है कल सुबह उससे मंदिर में आकर मिले और गौतम को ना बताए मोहित जानता था कि गौतम मंदिर में नहीं आएगा इसलिए उसने मानसी को मंदिर में आने को कहा। मानसी सोचने लगी कि मोहित गौतम को उस क्लू के बारे में क्यों नहीं बताना चाहता अगले दिन मानसी मंदिर जाकर मोहित से मिलती है मोहित उसे बताता है कि वो संस्कार नाम का लड़का मंदिर आता है और शायद आज भी आए। मानसी ने मोहित से पूछा कि उसने उसे अकेले क्यों बुलाया मानसी इसपर मोहित का जवाब सुनकर चौंक गई और उसे यकीन नहीं हुआ कि मोहित ऐसा बोलेगा मोहित ने कहा "मैं गौतम जैसे लूज़र के साथ काम नहीं करना चाहता वो किसी काम का नहीं है उसी की वजह से अब तक हम उस गिरोह का पता नहीं लगा पाए" मानसी ने पूछा कि ऐसा क्या हुआ जो तुम ऐसा बोल रहे हो तो मोहित ने कहा कि जिस दिन हम उस आदमी से मिलने जंगल में गए थे तब वहाँ कुछ हुआ था जो मैंने और गौतम ने तुम्हे नहीं बताया था, मानसी ने पूछा ऐसा क्या हुआ था तो मोहित ने बताया कि जिस दिन हम उस जंगल में गए थे उस दिन गौतम ने मुझसे कहा " यार मोहित ये सब करके क्या फायदा बच्चे तो गायब हो ही गए हैं हो सकता है उन लोगों ने बच्चों को मार भी दिया हो तो मेहनत करने का क्या मतलब उन बच्चों को तुम्हारे भगवान बचा लेंगे" और ऐसा कहकर उसने कार वापस मोड़ ली और उसने मुझे भगवान की कसम दी कि मैं तुम्हे कुछ ना बताऊं पर मुझसे रहा नहीं गया ये सुनकर मानसी गुस्से में घर वापस आई और गौतम पर चिल्लाने लगी गौतम गुस्सा हुआ कि तुम अपने बड़े भाई पर कैसे चिल्ला सकती हो मानसी ने गौतम को सारी बात बताई गौतम ने कहा कि मोहित झूठ बोल रहा है मैंने ऐसा कुछ नहीं किया लेकिन मानसी को यकीन नहीं हुआ और उसने कहा कि झूठ आप बोल रहे हैं मुझे पहले समझ जाना चाहिए था कि जिस इंसान को बच्चों से प्यार ही नहीं है वो इंसान ऐसा एनजीओ कैसे खोल सकता है गौतम ने मानसी से ऊंची आवाज़ में कहा कि वो अपने भाई की जगह किसी और पर यकीन कैसे कर सकती है और गौतम ने सोचा कि मोहित झूठ क्यों बोल रहा है।


भाग 6 :- मानसी गौतम के इस बर्ताव के कारण बहुत परेशान थी और उधर गौतम भी गुस्से में था कि मोहित इतना बड़ा झूठ कैसे बोल सकता है। मानसी अपने कमरे में थी कि तभी उसे एक प्राइवेट नंबर से फोन आया और फिर एक गाना सुनाई दिया " ना इज़्ज़त की चिंता ना फिकर कोई ईमान की जय बोलो बेईमान की" फिर एक लड़के की आवाज़ आती है और वो लड़का कहता है "तुम लोग कैसे एनजीओ वाले हो यार अभी तक पहला क्लू ही सॉल्व नहीं कर पाए और ऊपर से तुम्हारे बंदे एक दूसरे पर ही इल्ज़ाम लगा रहे हैं खैर ये तुम्हारा दूसरा क्लू था और हाँ मैं वो बंदा नहीं हूँ जिसने तुम्हारा बिल पे किया था" ऐसा कहकर वो फोन रख देता है मानसी उससे नहीं पूछ पाती की वो कौन है लेकिन वो समझ जाती है कि वो जो कोई भी है हम लोगों पर नज़र रखे हुआ है और उसे हमारी हर एक्टिविटी के बारे में पता है वो बिना देर किए गौतम को बताती है गौतम तय करता है कि वो इसके बारे में मोहित को नहीं बताएगा और मानसी को भी ऐसा करने से मना कर देता है। मोहित पहले क्लू को ध्यान से याद करता है "मधुबन खुश्बू देता है" वो सोचता है कि इसका क्या मतलब हो सकता है मधुबन यानी फूलों का बागीचा जहाँ पर खुश्बूदार फूल होते हैं "सागर सावन देता है" इसका मतलब सीधा सा था कि सागर यानी समंदर वो अपने घर के पास वाले एक बागीचे में जाता है और वहाँ उन फूलों को देखता है जो सबसे ज़्यादा खुश्बूदार हों तभी उसका फोन बजता है और वही प्राइवेट नंबर वाला बंदा बोलता है "चलो किसी ने तो काम शुरु किया इसी खुशी में मैं तुम्हारी एक मदद कर देता हूँ" मोहित कुछ पूछे इससे पहले वो आदमी बोलता है कि फूल सिर्फ़ बागीचे में नहीं होते वो हर जगह जहाँ फूल होते हैं मधुबन से कम नहीं होती और फोन काट देता है मोहित सोचता है कि बागीचे के अलावा फूल तो किसी फूलों की दुकान पर ही मिलते हैं वो बागीचे से सबसे नज़दीक वाली फूलों की दुकान पर गया वहाँ दुकानदार मोहित से बोलता है की वो ज़रूर अपनी गर्लफ्रैंड या वाइफ के लिए गुलदस्ता लेने आया होगा और मोहित को ज़बरदस्ती एक गुलदस्ता थमा देता है मोहित उसे लेने से मना करता है पर दुकानदार तो ऐसा बर्ताव करता है जैसे वो ये गुलदस्ता मोहित को बेच कर ही रहेगा तभी मोहित को उस गुलदस्ते में एक पर्ची मिलती है जिसे वो पढ़ता है उसमें लिखा होता है "वो जगह जहाँ लोग लेटकर जाते हैं" इसके बाद वो एक बीच पर जाता है यानी समंदर के किनारे तभी एक नारियल पानी वाला उसके पास आता है और कहता है साहब गर्मी बहुत है मेरे ठेले पर चलके नारियल पानी पी लीजिए मोहित को प्यास भी लगी होती है इसलिए वो चला जाता है नारियल पानी वाला मोहित को नारियल पानी देता है मोहित देखता है कि उसकी स्ट्रॉ में एक पर्ची फसी हुई है वो नारियल पानी वाले के चाकू से स्ट्रॉ काटता है और पर्ची निकालता है उसमें लिखा होता है "काले कपड़ों वाला राक्षस" लेकिन उस आखिरी लाइन "जीना उसका जीना है जो औरों को जीवन देता है" इसका क्या मतलब था।


भाग 7 :- मोहित ने बहुत सोचा कि इस लाइन का क्या मतलब हो सकता है तभी उसके दिमाग में ख़याल आता है कि जो दूसरों को जीवन देता है यानी मौत के मूह से बाहर ला सकता है वो कोई डॉक्टर हो सकता है लेकिन आखिर इतने बड़े शहर में वो डॉक्टर कहाँ मिलेगा तभी वो नारियल पानी वाला मोहित को बताता है कि उसे किस डॉक्टर के पास जाना है और बताया कि वो डॉक्टर भी उसी गिरोह का मेंबर है और उसे एक कोड वर्ड भी देता है जो उसे उस डॉक्टर के पास जाकर बोलना है और वो कोड वर्ड है "आज मौसम बहुत गुलाबी है जनाब"। दूसरी ओर गौतम और मानसी मिलकर दूसरे क्लू के बारे में सोच रहे होते हैं तभी मानसी को उस इंस्पेक्टर के बारे में याद आता है जिसने बच्चों के गायब होने की शिकायत दर्ज करी थी और उसे लगता है कि इस क्लू का कनेक्शन उस इंस्पेक्टर से ही है और वो गौतम को बताती है "ना इज़्ज़त की चिंता ना फ़िकर कोई ईमान की जय बोलो बेईमान की" का मतलब किसी बेईमान आदमी से हो सकता है जैसे की बेईमान इंस्पेक्टर क्योंकि वो इंस्पेक्टर बच्चों को ढूंढने और उस गिरोह को पकड़ने की बिल्कुल कोशिश नहीं कर रहा लेकिन मानसी को अब भी लग रहा था कि गौतम उन बच्चों को नहीं ढूंढना चाहता इसलिए जब गौतम अगले दिन ऑफिस के लिए निकला तो मानसी अकेले ही उस इंस्पेक्टर से मिलने पुलिस स्टेशन चली गयी वहाँ जाकर पता चला कि वो इंस्पेक्टर पिछले पाँच दिन से छुट्टी पर है और उसका फोन भी बंद मानसी ने दूसरे इंस्पेक्टर से उस इंस्पेक्टर के घर का पता मांगा लेकिन उसने देने से साफ मना कर दिया और मानसी को जाने के लिए कहा। वहीं मोहित उस डॉक्टर के पास मरीज़ बनकर जाता है और कहता है कि उसके पेट में बहुत दर्द है डॉक्टर उसे दवा लिखकर देने लगता है तभी मोहित बोलता है "वैसे आज मौसम बड़ा गुलाबी है जनाब" ये सुनकर वो डॉक्टर पर्चे पर कुछ लिखता है जो मोहित कि समझ में नहीं आता और उसे एक मेडिकल स्टोर का पता देकर कहता है कि ये दवा सिर्फ इस ही दुकान पर मिलेगी जब मोहित उस दुकान पर जाकर वो पर्चा दुकान वाले को देता है तो दुकान वाला उसे एक डिब्बा देता है जिस डिब्बे में कुछ नशीली दवा रहतीं हैं और उस डिब्बे पर लिखा होता है "धरती चीर कर सोना निकालना है"। क्लू तो सॉल्व हो गया लेकिन अभी इन सभी कड़ियों को आपस में जोड़ना बाकी था 1-"वो जहाँ लोग लेटकर जाते हैं" 2-"काले कपड़ों वाला राक्षस" और 3-"धरती चीर कर सोना निकालना है" पर सवाल ये है कि वो आदमी जो इन तीनों पर नज़र रखे हुए है चाहता क्या है और आख़िर मोहित ने मानसी से झूठ क्यों बोला।


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