पहेली : भाग 26
पहेली : भाग 26
पहेली : भाग 26
गतांक से आगे
हरेंद्र ने संदीप को अपनी गाड़ी में बैठा लिया और गाड़ी हवा से बातें करने लगी ।
"अबे जाना कहां है , ये तो बताना पड़ेगा ना तुझे ! नहीं तो ये ड्राइवर पूरे शहर का चक्कर काटकर वापस गाड़ी यहीं लगा देगा" । हरेंद्र की शरारतें शुरू हो गई थी । वह पुराने दिनों में लौट चुका था ।
"वैसे तो मैं इस्कॉन मंदिर के पास रहता हूं लेकिन अभी मैं तुम्हें अपने घर के बजाय "झकरकटी झील" ले चलना चाहता हूं" । संदीप ने झेंपते हुए कहा ।
"झकरकटी झील ! वो क्यों" ? हरेंद्र ने ऐतराज किया ।
"यार, इसमें भी एक राज है जो मैं झकरकटी झील पर ही बतलाऊंगा" संकोच करते हुए संदीप बोला । उसके चेहरे पर भय के हलके निशां साफ नजर आ रहे थे ।
"भाई , तेरा दिमाग तो ठीक है ना ? अबे, ये पिकनिक मनाने का समय नहीं है । ना तेरी कोई गर्लफ्रेंड है और ना मेरी । फिर हम तुम दोनों क्या वहां लड़कियां ताड़ने जा रहे हैं ? भाई, वहां कोई भूत -भूतनी रहती है क्या ? डॉक्टर बनकर तूने भूतों को मानना शुरू कर दिया है क्या या कुछ और बात है ? स्पष्ट कुछ बता नहीं रहा है और दुनिया भर की पहेलियां बुझा रहा है । मुझे पागल समझा है क्या" ? हरेंद्र हंसी मजाक करते करते थोड़ा गुस्से में आ गया ।
"भाई, ऐसा मत करो । मेरी बात मानो , मैं सच कह रहा हूं । मेरे साथ बहुत अजीब अजीब सी घटनाएं घट रही हैं आजकल । पहले मैं भी उन्हें वहम समझ कर टाल रहा था लेकिन अब पानी सिर से ऊपर आ चुका है । इतने बड़े शहर में मेरा और कोई नहीं है तुम्हारे सिवाय । किस्मत ने मुझे आज तुमसे मिला दिया है । तुम एक आला पुलिस अधिकारी हो और बुद्धिमान भी हो । सबसे बड़ी बात यह है कि तुम मेरे लंगोटिया यार हो । मेरी इस समस्या को केवल तुम्हीं दूर कर सकते हो । यदि मैं अपनी समस्या तुम्हें नहीं बताऊंगा तो फिर मेरा और तुम्हारा यहां कानपुर में रहना ही बेकार है" !
संदीप का चेहरा उतर गया था । उसका स्वर लड़खड़ाने लगा था और उसकी आंखों में पानी आ गया था । उसकी यह दशा देखकर हरेंद्र को उस पर दया आ गई और दोनों दोस्त झकरकटी झील की ओर चल दिये । हरेंद्र संदीप को नॉर्मल करने के लिए उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा
"यार, यदि तू ऐसी रोवणी सूरत लेकर जायेगा तो इससे अच्छा है कि हम लोग न ही जायें ? तू तो जानता है कि मुझे रोवणी शक्ल वाले लोग बिलकुल भी पसंद नहीं हैं । जहां तक मुझे याद है , तू तो बहुत खिलंदड़ आदमी था पहले , तू रोवणी भिड़ कब से बन गया" ?
हरेंद्र की बात का असर संदीप पर हुआ । उसने अपने आंसू पोंछ लिए और बोला
"मैं बदला नहीं हूं और बदलना भी नहीं चाहता हूं लेकिन तकदीर का क्या करूं जो मेरे साथ खेल खेल रही है । मैं रोवणी भिड़ कभी नहीं था । अब भी नहीं हूं । लेकिन मेरे साथ पिछले 15-20 दिनों से बड़ी अजीब अजीब सी घटनाएं घट रहीं हैं । मैं तुझे वो सारी घटनाऐं विस्तार से बताऊंगा । सॉरी यार , मैं तुझे परेशान करना नहीं चाहता हूं लेकिन मैं क्या करूं ? मैं तकलीफ में हूं । शायद यह मेरा मुकद्दर है जिसने मुझे तकलीफ़ में डाल रखा है । मैं जहां भी जाता हूं मेरे पहुंचने से पहले मेरा मुकद्दर वहां पहुंच जाता है और फिर सारा गुड़ गोबर कर देता है" खिन्न होकर संदीप बोला
"तू उदास मत हो यार ! मैं हूं ना ! जब तक तेरा ये दोस्त है तुझे परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है । हम भी तो देखें कि किस्मत क्या खेल खेल रही है तेरे साथ ? हो सकता है यह मेरे लिए भी कुछ सबक सिखा कर जाये ? पर एक बात जरूर कहूंगा कि साले अगर कुछ "ढंग" की बात हो तो हमें भी बता देना । कहीं ऐसा ना हो कि तू अकेले अकेले सारा माल हड़प जाये" । हरेंद्र संदीप से मौज लेने लगा ।
दोनों दोस्त हंसी मजाक करते करते झकरकटी झील पहुंच गये । संदीप हरेंद्र के आगे आगे चलने लगा । अब वहां वे केवल दोनों थे । एकांत पाकर संदीप कहने लगा
"यार, क्या बताऊं तुझे , आजकल मेरे सपने में एक लड़की आती है" बहुत ही सीरियस मुद्रा में संदीप बोला । उसकी इस बात पर हरेंद्र जोर से हंस पड़ा
"साले , जवानी में सपने में लड़कियां नहीं आयेंगी तो क्या संत महात्मा आयेंगे । तू बहुत लकी है चिकने कि तेरे सपनों में हसीनाओं की महफ़िल जमने लगी है । इधर तो हुस्न के लाले पड़ रहे हैं । साली , कोई सपने में भी नहीं आती है" । हरेंद्र का हंसते हंसते मुंह लाल हो गया था । "कमीने , क्या इतनी दूर केवल यह बताने के लिए लाया था मुझे" ? हरेंद्र ने संदीप की पीठ पर घूंसा मारते हुए कहा ।
"मैं अपने साथ घटने वाली आश्चर्यजनक घटना बता रहा हूं और तुझे ये सब बकवास लग रहा है ! मैं सच कह रहा हूं हरेन कि मेरे सपने में रोज एक लड़की आने लगी है । उसकी सूरत तो साफ साफ नजर नहीं आती है मगर वह इशारे से मुझे बुलाने की कोशिश करती है । एक दिन क्या हुआ कि मैं उसके पीछे पीछे चल दिया । वह आगे आगे चलती जा रही थी और मुझे अपने पीछे आने का इशारा करती जाती थी । मैं उसके पीछे पीछे चलता जा रहा था । वह मुझे इस झकरकटी झील तक ले आई और वह इस जगह आकर रुक गई" ।
संदीप हरेंद्र को वह जगह दिखाने लगा जिस जगह तक वह लड़की आई थी । और मैं ठीक वहीं खड़ा था जहां तू अभी खड़ा है । फिर वह लड़की अपने आप गायब हो गई । अब तू ही बता कि इसका क्या मतलब है" ? संदीप फिर से भयभीत नजर आने लगा ।
"लगता है कि तू आजकल भूत प्रेतों की मूवी देखने लगा है । मत देखा कर इन्हें । इन्हें देख देखकर लोग कपड़े को भी भूत समझ लेते हैं । तू तो एक डॉक्टर है क्या तू इन भूत प्रेतों पर विश्वास करता है" ? हरेंद्र उसे लॉजिक देने लगा
"भाई तेरा कहना बिल्कुल सही है । मैं भी पहले भूत प्रेतों को नहीं मानता था लेकिन जबसे वह लड़की मेरे सपने में आयी है, मैं मानने लग गया हूं । एक राज की बात बताऊं तुझे कि एक ही लड़की रोज मेरे सपने में आती है , अलग अलग नहीं । वह रोती जाती है , चिल्लाती रहती है जैसे कि कोई उसे मार रहा हो ।
और हां , ये तो एक जगह है जहां वह मुझे लेकर आई थी । ऐसी तीन जगह और भी हैं जहां वह मुझे लेकर गई थी । वे तीनों जगह अलग अलग दिशाओं में हैं । यानि वह मुझे चारों दिशाओं में लेकर जा चुकी है । उन तीनों जगहों को भी मैं तुझे दिखाना चाहता हूं । बोल, क्या तू देखना चाहेगा" ?
अब की बार हरेंद्र ने संदीप का मजाक नहीं उड़ाया । वह भी गंभीर होकर कहने लगा "यद्यपि मैं इन भूत प्रेतों को नहीं मानता । मगर तेरी कहानी से लगता है कि वह लड़की तुझसे कुछ कहना चाह रही है" । हरेंद्र गाड़ी में बैठते हुए बोला "चल, बाकी की तीनों जगह भी दिखा दे" । संदीप ने ड्राइवर से कह दिया कि वह गाड़ी फतेहपुर ले चले । संदीप फिर कहने लगा
"जिस दिन वह पहली बार मेरे सपने में आई थी , उस दिन उसका रूप बहुत डरावना लग रहा था । चेहरा स्पष्ट नहीं दिख रहा था लेकिन चेहरे पर घावों के निशान दिख रहे थे । उसके शरीर से खून रिस रहा था । वह लहूलुहान नजर आ रही थी । मैं उसे देखकर डर गया था । फिर वह मुझे डरते हुए देखकर चली गई । दूसरे दिन वह फिर से सपने में आई लेकिन उस दिन वह डरावनी नहीं लग रही थी । उस दिन न तो वह क्रंदन कर रही थी और न ही उसके शरीर से खून टपक रहा था । तीसरे दिन तो वह हंसती हुई दिखाई दे रही थी । उसमें बदलाव आता जा रहा था जो मेरी समझ से बाहर की बात है" ।
संदीप ने अपनी बात समाप्त की ही थी कि गाड़ी फतेहपुर पहुंच गई थी । संदीप ने ड्राइवर से कहा
"अब तुम अगले चौराहे से बांये मोड़ लेना । वहां से दो किलोमीटर आगे बाईं साइड में एक पुराना जर्जर मकान आयेगा , गाड़ी उस जगह रोक लेना "। ड्राइवर ने ऐसा ही किया ।
संदीप हरेंद्र को बताने लगा कि एक दिन वह लड़की उसे यहां लेकर आई थी" ।
"एक बात बता , तुझे ये जगह याद कैसे रह गईं" ? हरेंद्र ने संदीप से पूछा
"मुझे नहीं पता। लेकिन मुझे ये जगह इतनी अच्छी तरह से याद हैं कि मैं चाह कर भी उन्हें भूल नहीं सकता हूं" ।
हरेंद्र गंभीर होकर बोला "क्या वह लड़की तुम्हें कुछ नुकसान पहुंचाने की कोशिश करती है" ?
"शुरू शुरू में तो वह बहुत भयानक लगती थी । मुझे उससे बहुत डर लगता था । लेकिन अब वह भयानक नहीं लगती है"
"सब समझ गया मैं । वह तुझ पर लट्टू हो गई है शायद । इसीलिए वह तुझे देखकर मुस्कुरा देती है । साले , तेरा जुगाड़ तो हो गया लगता है । अब तू उससे धूमधाम से शादी कर और मजे से उसके साथ अपनी जिंदगी गुजार" । हरेंद्र फिर से अपनी लय में आ गया ।
"तो अब अगली जगह चलें" ? संदीप ने हरेंद्र से पूछा
"सॉरी यार , आज इतना ही करते हैं । अगली बार वे दोनों जगह भी देख लेंगे । और हां, तू अपने घर में भी कुछ दिखाना चाहता था न" !
"हां, चल तुझे वहां भी कुछ अनहोनी घटनाऐं दिखाता हूं" । कहकर संदीप और हरेंद्र दोनों गाड़ी में बैठ गये । गाड़ी इस्कॉन मंदिर की ओर चल पड़ी ।
संदीप के घर के सामने गाड़ी रुक गई । संदीप हरेंद्र को अपने घर ले गया । घर बड़ा शानदार था । उसे देखकर हरेंद्र बोला "वाह ! बड़ा शानदार घर है यार ! कहां से मिल गया तुझे इतना शानदार घर" ?
"इसी लोभ के चक्कर में तो मैं यहां पड़ा हुआ हूं वरना कब का भाग गया होता यहां से" ! संदीप बोला
फिर संदीप उठकर फ्रिज के पास गया । उसने फ्रिज खोला और पानी की बोतल निकाल कर हरेंद्र को पकड़ा दी । हरेंद्र ने पानी की बोतल खोली और पानी पीने लगा । अचानक उसने पानी फर्श पर थूक दिया
"क्यों क्या हुआ" ? संदीप ने पूछा
"पानी में बाल आ गया था यार" । हांफते हुए हरेंद्र बोला । फिर दोनों ने फर्श पर थूके पानी को गौर से देखा तो उसमें दो लंबे लंबे बाल दिखाई दे रहे थे ।
"ओ तेरे की ! क्या नल से सीधे ही पानी बोतल में भर देता है ? आलसी कहीं का" ? फब्ती कसते हुए हरेंद्र ने कहा
"मैं तुझे यही बात दिखाना चाहता था । मैं पानी आर ओ से भरता हूं जिसमें बाल आने की कोई गुंजाइश नहीं है फिर भी बोतल से बाल निकलते हैं । जब मेरे साथ पहले दिन ऐसा हुआ तब मैं बहुत घबरा गया था । लेकिन हर बार ऐसा ही होता है । बोतल में बाल पता नहीं कहां से आ जाते हैं ? मैंने तो अब बोतल से पानी पीना ही छोड़ दिया है । ये तो तुझे दिखाने के लिए मैंने फ्रिज से बोतल निकाली थी"
फिर संदीप ने आर ओ से एक गिलास पानी निकाला और हरेंद्र को पकड़ा दिया । हरेंद्र ने उस पानी को गौर से देखा और आश्वस्त होने के बाद ही उसे पीया ।
संदीप आगे कहने लगा "फिर एक दिन मैंने फ्रीजर में आइसक्रीम रख दी थी । दूसरे दिन मालूम है क्या हुआ" ?
"मुझे कैसे मालूम होगा ? तू बतायेगा तभी तो पता चलेगा ! अब जल्दी बता कि क्या हुआ" ?
"जब अगले दिन मैंने वह आइसक्रीम खाने के लिए बाहर निकाली तो उस पर लिपिस्टिक लगी हुई थी"
"लिपिस्टिक ! ये तेरा वहम होगा । आइसक्रीम पर लिपिस्टिक कैसे लगेगी" ? हरेंद्र आश्चर्य से बोला
"एक्जेक्टली ! मेरे दिमाग में भी यही प्रश्न आया था । फिर मैंने आइसक्रीम को गौर से देखा तो उसमें एक बाइट का निशान भी था । जैसे किसी लड़की ने आइसक्रीम की एक बाइट ली हो और उसकी लिपिस्टिक आइसक्रीम पर लग गई हो" ?
अब हरेंद्र के होंठ गोल गोल हो गये थे ।
"इंटरेस्टिंग ! वैरी इंटरेस्टिंग ! यह वही लड़की होगी । क्यों है ना" ? हरेंद्र बांयी आंख मारते हुए बोला । इस बार संदीप मुस्कुरा दिया ।
शेष अगले अंक में

