पहेली : भाग 20
पहेली : भाग 20
पहेली : भाग 20
गतांक से आगे
हरेंद्र ने लाश का मुआयना किया मगर उस लाश को पहचानना संभव नहीं हो रहा था । लाश बिल्कुल निर्वस्त्र थी और बुरी तरह जली हुई थी इसलिए उसकी पहचान करना बहुत मुश्किल था । हां, उसके शरीर से कुछ जगह कपड़े जलकर चिपक गये थे , शायद वे ही पहचान का आधार बन सकते थे । हरेंद्र ने लाश के अलग अलग ऐंगल से फोटो ले लिए । जहां पर कटड़े उसके शरीर से चिपक गये थे, वहां से एकदम क्लोज फोटो ले लिए । लोगों ने सेल्फी लेने और फोटो खिंचवाने के चक्कर में बहुत सारे सबूत नष्ट कर दिये थे । मसलन लाश वहां तक कैसे पहुंची जबकि वहां तक गाड़ी आने का कोई रास्ता नहीं था । तो क्या लाश को वहां तक कोई लेकर आया था ? एक व्यक्ति से तो वह लाश वहां तक पहुंच नहीं सकती थी । इसका अर्थ है कि कम से कम दो व्यक्ति जरूर रहे होंगे । उनके पैरों के निशान सबूत बन सकते थे लेकिन लोग उन पैरों के निशानों पर चढ़ गये जिससे वे निशान खत्म हो गये ।
अब प्रश्न यह आता है कि लाश को यहां जलाया गया था या यहां पर जली हुई लाश लाई गई थी ? हरेंद्र ने लाश के आसपास की जमीन का मुआयना किया तो पता चला कि उसके आसपास और नीचे की मिट्टी भी जली हुई है । अब यह स्पष्ट हो गया कि लाश यहीं पर जलाई गई थी । यदि लाश यहीं पर जलाई गई थी तो यहीं कहीं पर वह बोतल भी पड़ी होगी जिसमें पेट्रोल भरकर लाया गया होगा ! उसने चारों ओर निगाह दौड़ाई मगर उसे कोई बोतल नजर आई । फिर उसने लाश के एक एक अंग को गौर से देखा । उसके अंगों पर जली हुई प्लास्टिक चिपक रही थी । कितनी दुर्दांत मौत होगी उसकी ? हरेंद्र यह सोचकर ही कांपने लगा ।
प्लास्टिक का यह गुण होता है कि वह जलने के बाद भी नष्ट नहीं होता है । लाश को गौर से देखने पर पता चला कि लाश के पेट के ऊपर थोड़ा सा जला हुए प्लास्टिक है जिसे हरेंद्र ने सबूत के तौर पर रख लिया । लाश के बदन से चिपका हुआ प्लास्टिक चीख चीख कर कह रहा था कि पेट्रोल एक प्लास्टिक की बोतल में लाया गया था जिसे काम में लेने के बाद जलती हुई आग के हवाले कर दिया गया था ।
यदि प्लास्टिक की बोतल में पेट्रोल आया था तो माचिस भी जरूर आई होगी । अब माचिस की तलाश करने लगा था हरेंद्र पर उसे माचिस कहीं दिखाई नहीं दी । अचानक उसके मन में एक प्रश्न उठा "कोई जरूरी है कि हत्यारा माचिस लेकर ही आये ? क्या पता उसके पास लाइटर हो" ?
यह प्रश्न दिमाग में आते ही हरेंद्र के होंठ गोल गोल घूमने लगे और उनसे सीटी की आवाज आने लगी । यदि हत्यारा लाइटर रखता है तो फिर वह सिगरेट भी पीता होगा । उसने अपनी पैनी निगाहें चारों ओर दौड़ाई तो उसे एक झाड़ी के पीछे सिगरेट के दो जले हुए टुकड़े मिले । दोनों टुकड़े अलग अलग तरह के थे । यह बड़ी गंभीर बात हो गई थी । एक व्यक्ति तो दो ब्रांड की सिगरेट नहीं पीता होगा ! इसका मतलब है कि कम से कम दो व्यक्ति यहां मौजूद थे जो लाश के जलने तक सिगरेट पीते रहे । उसने उन दोनों टुकड़ों को अलग अलग पैकेट में रख लिया । इन टुकड़ों से सिगरेट का ब्रांड पता चल जायेगा । पर अफसोस की बात यह थी कि अभी तक मृतक के बारे में कुछ जानकारी नहीं मिली थी कि वह कौन था, क्या करता था ? तभी उसे याद आया कि एस पी साहब ने कहा था कि एक डॉक्टर की लाश पड़ी है । क्या यह डॉक्टर था ? अब तक के सबूतों से तो लग नहीं रहा है कि वह एक डॉक्टर था ! फिर एस पी साहब को कैसे पता चला कि मृतक एक डॉक्टर था ? चलो, एस पी साहब से ही पूछ लेते हैं ।
हरेंद्र ने एस पी साहब को फोन लगाया और कहा "सर , आपने कहा था कि एक डॉक्टर की लाश पड़ी हुई है यहां । मैं मौके पर आ गया हूं और मैंने लाश का मुआयना भी कर लिया है । लाश को यहां लाकर जलाया गया है । लाश निर्वस्त्र पड़ी है । और सबसे बड़ी बात यह है सर कि उसका गुप्तांग कटा हुआ है" !
"क्या ? ये क्या कह रहे हो तुम" ?
"मैं एकदम सही कह रहा हूं सर ! उसका गुप्तांग चाकू से कटा हुआ है" ।
"कोई गुप्तांग क्यों काटेगा" ?
"इसके पीछे दो कारण हो सकते हैं सर । प्रथम तो यह कि मृतक निहायत ही घटिया किस्म का इंसान रहा होगा । वह औरतखोर होगा । जोर जबरदस्ती करके या ब्लैकमेल करके वह महिलाओं के साथ दुष्कर्म करने का आदी होगा ? किसी महिला या उसके किसी परिजन ने आजिज आकर उसने इसका यह हाल किया होगा । आजकल न्यायालयों से सजा मिलती ही कितनों को है ? और जो मिलती भी है तो उसमें बीस पच्चीस साल लग जाते हैं । ये न्याय है या अन्याय ? न्याय व्यवस्था से लोगों का विश्वास खत्म सा हो गया है इसलिए लोग कानून हाथ में लेने लगे हैं । हो सकता है कि किसी ने मौके पर ही इसकी फाइल निपटा दी है" । हरेंद्र बड़े ध्यान पूर्वक एक एक बात बता रहा था ।
"गुड एनेलिसिस । और दूसरा" ?
"दूसरा यह कि संभवतः मृतक एक ऐसे धर्म विशेष का व्यक्ति हो जिसका "खतना" किया जाता हो । हत्यारे ने मृतक का गुप्तांग इसीलिए काटा हो कि उससे यह पता नहीं चले कि मृतक किसी संप्रदाय विशेष से था" ? हरेंद्र ने आशंका जताई ।
"बहुत बढ़िया । हरेंद्र , तुम्हें तो जासूस बनना चाहिए था, तुम इस पुलिस की नौकरी में कैसे आ गये" ?
"जर्रानवाजी है सर आपकी । लेकिन मैं जासूस नहीं एक पुलिस अधिकारी ही बनना चाहता था और मैं वह बन गया । जो काम जासूस करते हैं , वह काम मैं भी कर सकता हूं , यह मैं प्रमाणित कर दूंगा, सर" । हरेंद्र के स्वर में थोड़ी तल्खी आ गई थी ।
"ओ के, ओ के ! कूल डाउन मिस्टर हरेंद्र ! लाश के बारे में अब आगे बताओ" ?
"सर , एक बात और ! लाश के सिर पर भी कुछ चिपका हुआ है जो यह बता रहा है कि मृतक सिर पर 'विग' लगाता होगा । आग से वह विग जल गई होगी और जलकर उसके सिर से चिपक गई होगी" । एक श्वांस छोड़ते हुए हरेंद्र बोला ।
"बहुत अच्छा ! सही डाइरेक्शन में जा रहे हो हरेंद्र । कुछ और सबूत इकट्ठे करो जिससे इस केस को सॉल्व किया जा सके"
"सर , आपने अभी तक बताया नहीं कि आपको किसने कहा था कि एक डॉक्टर की लाश यहां पड़ी है" ?
"किसी न्यूज चैनल वाले का फोन था, वही कह रहा था"
"सर, क्या आप उस चैनल का नाम बता सकते हैं" ?
"अं अं अं , अब याद नहीं आ रहा है यार" !
"याद करिये सर ! कहीं वह लाल टोपी चैनल तो नहीं था" ?
"हां याद आ गया । लाल टोपी वाला चैनल ही था वह । पर इससे क्या फर्क पड़ता है" ?
"बहुत फर्क पड़ता है सर ! पहली बात तो यह है कि लाल टोपी चैनल को कैसे पता चला कि मृतक एक डॉक्टर है ? और यदि वह डॉक्टर है भी तो कौन सा ? चिकित्सा शास्त्र का डॉक्टर या पी एच डी वाला डॉक्टर ? दूसरी बात यह है कि यदि इसे पता है कि मृतक डॉक्टर था तो इसने उसे जिंदा अवश्य देखा होगा ? लाल टोपी चैनल वालों से और भी अनेक सबूत इकट्ठे हो सकते हैं , सर" !
"वाह ! क्या बात है हरेंद्र ! तुमने तो मुझे आज खुश कर दिया । इतनी सारी जांच कर ली है तुमने ? ग्रेट ! चलो, अब जल्दी से काम निपटा कर मेरे घर आ जाओ । वहीं से साथ ही डीजीपी साहब के घर चलेंगे डिनर के लिए" ।
"ओ के सर" । हरेंद्र फिर से अपने काम में मशगूल हो गया
शेष अगले अंक में

