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V. Aaradhyaa

Inspirational

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V. Aaradhyaa

Inspirational

पड़ोसी सबसे पहले शुभचिंतक

पड़ोसी सबसे पहले शुभचिंतक

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"रंग तो सबके लिए होते हैं गुड्डो....!"

माँ अक्सर कहा करती।

और गुड्डो को माँ की यह बात याद रह गई थी।


होली मिलन का समारोह था। नित्या ने अपने पड़ोस के सभी लोगों को बुलाया था और सब का बहुत ध्यान रख रही थी।नेपथ्य में गाना भी बज रहा था।

"हंसकर बोला करो बुलाया करो!"

वह इस ग़ज़ल को हमेशा से पसंद करती थी। तभी नित्या की बेटी गुड्डो से नहीं रहा गया। तो उसने कहा कि,

"मम्मी ! आज तो आपने अपनी पड़ोस और सोसाइटी की सभी सहेलियों को बुलाया है। चाची और बुआ को क्यों नहीं बुलाया?"

तो नित्या का बड़ा सटीक सा जवाब आया।


"बेटा ! हमारे रिश्तेदार हमसे दूर रहते हैं। और कई बार हमारी चीजों पर टीका टिप्पणी भी करते रहते हैं। वक्त जरूरत हमारे पड़ोसी हमारे सबसे ज्यादा काम आते हैं। इसलिए यह समारोह इन्हीं पड़ोसियों के लिए रखा है। इसके बाद हम होली मिलन के लिए रिश्तेदारों के घर जाएंगे!"


वहां उपस्थित अन्य लोगों ने भी नित्या की बात सुनी और इस बात की सराहना की।

एक तरह से उन्हें नित्या की यह बात अनुकरणीय लगी कि पड़ोसियों कोई की भी खास खातिरदारी की जानी चाहिए।

 क्योंकि वह हमारे हर वक्त के साथी होते हैं सुख दुख में सबसे पहले पड़ोसी ही तो काम आते हैं।


और ....

 बाद में उस सोसाइटी में एक क्रम सा चल पड़ा कि हर त्यौहार में कोई ना कोई अपने पड़ोसियों को पार्टी देता था। फिर सब इकट्ठे होकर दुखम सुखम बतियाते और त्योहार को आनंद से मनाते थे।


सच... पड़ोसी हमारे सबसे नज़दीकी होते हैं... जो वक्त ज़रूरत काम आते हैं।


(समाप्त )



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