नयी दिशा
नयी दिशा
"आपको ये कहाँ मिलीं?पूरी डिटेल्स आप पुलिस को देदीजे हम लोग इन्हें अंदर लेके जाते हैं"
डॉक्टर ने विनय से इतना कहते ही जया को अंदर ले जाने के लिए कहा।
जया ज़ख्मी थी, सर पे चोट लगने से बेहोश हो गई थी, विनय की गाड़ी से टकरा कर गिर गई थी, विनय ही उसे अस्पताल लाया था।
जया की फैमिली को इन्फॉर्म हो गया था।विनय वहीं पास बैठा था।जया होश में आने लगी।
"आप कौन?" जया ने पूछा।
"जी आप मेरी ही गाड़ी से टकरा गयीं थी आप कहीं खोयी थी मैंने कितने हॉर्न दिए आप सुन ही नहीं पाई और गिर गई।"
"जी वो"…
जया रुक गई।
"विनय अब जया खतरे से बाहर है और एक खुशखबरी भी है जया इस प्रेग्नेंट वो माँ बनने वाली है।उसकी फॅमिली को आने दो तुरंत इन्फॉर्म कर दूँगा उन्हें।"
जया की फैमिली से बड़ा भाई और भाभी आये।
"क्या हुआ डॉ?क्या हुआ जया को?"
जया के भाई आत्माराम ने पूछा।
"देखिए डरिये मत ,जया बिल्कुल ठीक है उनका बीपी लो होने की वजह से वो बेहोश हो गईं कार से टकराने की वजह से सर पे हल्की चोट आ गई थी अब बिल्कुल ठीक है बल्कि एक खुशखबरी है आपलोगों के लिए।"
"खुशखबरी कैसी खुशखबरी?आत्माराम ने उत्सुकता से पूछा।"
"जी जया इस प्रेग्नेंट "
"क्या?"
आत्माराम और उसकी पत्नी सुलोचना चौंक जाते हैं।
"दादा ,वहिनी माफ कर दीजे मुझे मैं जानती हूँ मैं माफी के लायक नहीं हूँ।"
जया ने रोते हुए कहा।
"डॉ साहब क्या जया का अबॉर्शन नहीं हो सकता?"
आत्माराम ने हाथ जोड़ कर पूछा।
"कैसी बातें कर रहे हैं आपलोग क्या प्रॉब्लम है?"
डॉ ने पूछा।
"सर वो "
आत्माराम की पत्नी अल्का कुछ रुकी फिर बोली ।
"सर जया शादीशुदा नहीं है ,उसकी सगाई हुई है पर अभी तक शादी नहीं देखिए अभी ये बच्चा हम नहीं चाहते हैं आई को पता चलेगा तो वो सदमे में आ जाएगी ।"
"देखिए मैं आपकी बात समझ सकती हूँ, लेकिन बच्चा तीन महीने का हो चुका है और अब ओबोर्शन से माँ और बच्चे दोनों को खतरा है।"
विनय चौंक गया ।
"क्या जया?तुम शादीशुदा नहीं हो?"
"नहीं विनय ,ये बच्चा मेरे मंगेतर का है मैंने उसे बताया भी ,उसने मना कर दिया बोला मैं नहीं अपना सकता अब इस बच्चे को न मुझे, मेरी आई पहले से ही इस शादी के खिलाफ थी अब ये बच्चा मैंने बहुत बड़ी भूल करदी विनय इसलिए अब नहीं जीना चाहती।"
"नहीं जया ऐसे मत सोचो ,जीवन में जीना छोड़ देना तो बहुत डरपोक लोग करते हैं देखो मैं विकलांग हूँ ,मेरे ड्राइवर की वजह से तुम मेरी गाड़ी से टकरा गई थी, मैं तुम्हें यहाँ लाया।मेरा सोचो मेरे एक पैर बेकार हैं,मुझसे कोई लड़की शादी नहीं करना चाहती, मुझे तो अपनी ज़िंदगी से बिल्कुल उम्मीद नहीं होनी चाहिये फिर भी मुझे उम्मीद है जीता हूँ और खुश रहता हूँ।तुम्हें पता है आज इंटरव्यू देने जा रहा था जब तुम टकराई।"
"अरे विनय !तुम मेरी वजह से इंटरव्यू छोड़ के यहाँ।"
जया रोने लगी, तभी अलका आयी ।
"चल जया आई अस्पताल आ गयी है मिल ले उसे।"
"नहीं वाहिनी किस मुँह से मिलूँ अब आई से ,उसकी बात नहीं मानी आज यहाँ ये मुँह लेकर क्या बोलूं उसको।"
तभी अचानक आई पीछे से आवाज़ देती है।
"बेटी तूने कैसे सोचा मैं तुझे छोड़ दूँगी।"
जया ने पलट कर देखा।
उसकी आई पीछे ही खड़ी थी।
"मुझे माफ़ करदे मेरी आई मैं तेरे पैर पड़ती हूँ।"
विनय वहाँ सबको खुश देख वहाँ से जाने लगता है, की जया आवाज़ देती है।
"विनय जी मैं आपको आज अकेले नहीं लौटने दूंगी, क्या आप मुझे और मेरे बच्चे को ज़िंदगी में इस बेसहारा समाज से विकलांग होने से बचाएंगे?"
विनय अटपटा के बोला
"मैं, मुझ जैसा विकलांग तुम्हें क्या देगा जया?"
"आपने नयी ज़िंदगी नई दिशा दी है ,विकलांग हौसलों से होता है इंसान यूँ नहीं ।"
विनय खुशी के आँसू से जया का हाथ थाम लेता है।
