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Dr. Pradeep Kumar Sharma

Inspirational

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Dr. Pradeep Kumar Sharma

Inspirational

नेकी कर दरिया में डाल

नेकी कर दरिया में डाल

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"वाओ, गजरा... वह भी मेरे लिए ? आज अचानक ? देर आयद दुरुस्त आयद, चलिए शादी के पॉंच साल बाद ही सही, हमारे पतिदेव को पता तो चला कि श्रीमती जी को कभी गजरा भी दिया जा सकता है ?"

"अरे यार, अब लाया हूँ, तो पोस्टमार्टम मत करो न। चुपचाप लगा लो।''

"हूँ, सच बताना, किसके कहने से आपने ये गजरा लिया ?"

"ऑफिस से लौटते समय रास्ते में सुरेश मिल गया था। हम चाय पीते हुए एक महिला की उसकी सहेली से हो रही बातचीत सुन लिए, जिसके बच्चे की तबीयत बहुत खराब है और उसके इलाज के लिए उसे पैसों के जरुरत है। इसलिए वह घूम-घूम कर गजरा बेच रही थी। वह बहुत ही स्वाभिमानी लग रही थी। हम उसे पैसे देते, तो शायद नहीं लेती। सो हमने उसके बचे हुए दोनों गजरा खरीद लिए। इसके अलावा हमने उसे पाँच-पाँच सौ रुपए एडवांस के रूप में देकर यह भी कह दिया है कि कल सुबह ठीक 10 बजे उसी जगह हम दोनों को दो-दो बुके दे दे। इस बहाने उसकी थोड़ी मदद हो जाएगी।''

"ये तो आपने बहुत ही अच्छा किया जी। पर आप उन दो-दो बुके का करेंगे क्या ?''

"कल हम बुके लेने जाएँगे ही नहीं। हमारा मकसद उसकी मदद करना है, जो हम कर चुके। अब तुम और ज्यादा पूछताछ मत करो। ये पहन लो।"  

''आप दो मिनट रुकिए जी, मैं अभी आई।" पत्नी ने कनखियों से देखते हुए कहा और कमरे से बाहर निकल गई।

पाँच-सात मिनट बाद जब वह लौटी, तो पति ने पूछा, "कहाँ रख दिया है गजरा ?"

"वह तो मैंने देवर जी को दे दिया।"

"उसे क्यों भला ?" पति ने आश्चर्य से पूछा। 

"आज सुबह देवर जी की हमारी देवरानी से किसी बात पर कहासुनी हो गई थी। तब से दोनों मुँह फुलाए बैठे हैं। मैंने देवर जी से कहा है कि आपके भैया को फोनकर मैंने ये गजरा मंगवाया है। अब आप इसे हमारी देवरानी जी को पहनाकर मना लो। इस बहाने गजरा का सदुपयोग भी हो जाएगा। मैंने सही किया न जी ?"

"बिलकुल। मुझे तुम पर पूरा विश्वास है कि तुम कभी कुछ गलत कर ही नहीं सकती।" पति ने उसे अपनी बाँहों में भरते हुए कहा।   



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