STORYMIRROR

Bhagwati Saxena Gaur

Inspirational

3  

Bhagwati Saxena Gaur

Inspirational

नायाब तोहफा

नायाब तोहफा

2 mins
156

यशवंत बाबू अपने बेटे से मिलने अमेरिका जा रहे थे। बहु का फोन आया, पापा आप कोई ऐसा तोहफा लाना जिससे आपके बेटे को सबसे ज्यादा लगाव हो। उन्हें कभी लकड़ी की तीन पट्टी की साइकिल कभी लट्टू और कभी पुरानी किताबें नजर आती ।  पत्नी हर चीज को देखकर कहती नहीं ये सही तोहफा नहीं है। वो घबराकर बोले, मुझे कुछ याद नहीं आ रहा,  तुम ही सोच समझ कर जो ठीक लगे, ले लेना। मैं तो दिन भर खेतों में काम करता था, मुझे उसकी पसंद कहाँ याद है।


अगले दिन विदेश जाने की सारी तैयारी हो गई, नहीं चाहते हुए भी वो पत्नी से पुछ बैठे, नंदू का सबसे प्रिय सामान रख ली, उनकी पत्नी ने हाँ में सिर हिलाया।


 एयरपोर्ट से घर पहुँच कर बहू को खूबसूरत अपने हाथों से कढ़ाई की हुई समीज सलवार दिया। पोते को रंगीन और सुंदर मनी बैंक दिया। अब अक्षय की बारी थी। बाबूजी मेरा तोहफा कहाँ है? बोले तेरे खिलौने और तेरी यादों से तो पूरा घर भरा है। समझ में नहीं आ रहा था कि तुम्हें सबसे ज्यादा क्या पसंद था। तभी उस की माँ पूछ बैठी, बताओ..तुम्हारी यादों में सबसे प्यारा और अनोखा क्या था?


अक्षय बोला माँ शायद तुम्हें याद नहीं पर जब मुझे कंधे पर बाबूजी स्कूल ले जाते थे और लेकर आते थे तो आते आते रात हो जाया करती थी। और मुझे टास्क मिलता था तो मैं बनाकर नहीं ले जाता था। क्योंकि उस समय घर में एक ही लालटेन थी, जो बाबूजी खलिहान में रखते थे, और घर आते समय घर लेकर आते, और उसकी रोशनी में हमलोग बैठकर खाना खाते थे।


एक दिन मैंने तुम्हारे दवा की शीशी से दीया बनाया..और फिर उस दिन से मेरी पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आई। मुझे वह दीया सिर्फ दीया नहीं, हमारे हौसले और सफलता का चिराग लगता था।और सच में आज मैं जो कुछ भी हूँ, उस दीया के कारण। तभी माँ ने वह दीया अपने बैग से निकाल कर टेबल पर रख दिया। अक्षय ने दौड़कर उसे जलाया, और घर की सारी लाइट बुझा दी। ये था नायाब तोहफा...



Rate this content
Log in

Similar hindi story from Inspirational