नाइट शिफ्ट ड्यूटी में रियल हॉरर अनुभव
नाइट शिफ्ट ड्यूटी में रियल हॉरर अनुभव
मैं नाइट शिफ्ट ड्यूटी में रियल हॉरर अनुभव कुछ बोल नहीं रही थी। उसने सफेद ड्रेस पहनी हुई थी। मैं उसके पास गया तो वो धीरे-धीरे हाईवे की तरफ पीछे जाने लगी।
तभी एक सुपर (तेज गाड़ी/बस) आ रही थी और वो औरत जोर से बोली "बचाओ मुझे" और हंसने लगी, फिर से बोली "बचाओ" और हंसने लगी और सुपर के नीचे गिर गई। लेकिन सुपर रुकी नहीं।
मैं जल्दी से उसके पास गया, लेकिन वहां कोई नहीं था। मेरे शरीर के बाल सीधे खड़े हो गए और मुझे एकदम ठंड लगने लगी।
5 मिनट बाद मैं वापस रेस्टोरेंट आया और देखा कि वो औरत फिर से मुझे देख कर मुस्कुरा रही है। तब मुझे लगा कि वो इंसान नहीं है, वो भूत है। मैं जल्दी से रेस्टोरेंट के अंदर आ गया। रेस्टोरेंट बंद था, रूम नंबर 1, 24, 23, 8 और 16 कस्टमर से भरे हुए थे, वो सब सो रहे थे, वहां कोई नहीं था जिससे मैं इस बारे में बात कर सकता।
मैं रेस्टोरेंट की टेबल पर बैठ गया। एक बार मैंने देखा कि वो लेडी मेरे बहुत करीब है, जब मैंने देखा तो वहां कोई नहीं था।
15 मिनट बाद मैंने देखा कि रेस्टोरेंट के कॉमन बाथरूम से आवाज आ रही है और कोई लगातार रो रहा है। जब मैं कमरे में गया तो वहां कोई नहीं था।
तब मैंने जल्दी से अपने मोबाइल में हनुमान चालीसा चलाई और भगवान का नाम लेने लगा राम, राम, राम। धीरे-धीरे मेरा डर बढ़ता ही जा रहा था, उस समय रात के 2:15 बज रहे थे। मैंने भगवान से प्रार्थना की और कहा, "हे भगवान प्लीज मुझे बचाओ और समय जल्दी निकाल दो।"
और टेबल पर बैठ गया और 5 मिनट बाद मुझे नींद आ गई।
अगली सुबह मैंने अपना अनुभव रेस्टोरेंट मैनेजर को बताया। तब उसने कहा, 5 साल पहले पीपल के पेड़ के पास एक औरत को किसी ने मार दिया था, उस समय यहाँ हमारा रेस्टोरेंट कुछ भी नहीं था। ऐसा ही अनुभव उसे भी हुआ था। जब मैंने लोकल लोगों से पूछा तो उन्होंने भी उस औरत की कहानी बताई, और कहा कि कभी भी अकेले पीपल के पेड़ के पास मत जाना।
भाग 2: मैनेजर के साथ बातें करने के बाद मैं घर चला आया!
और नहा के सीधा बीवी के साथ बैठ गया, सोचा था बीवी को ये बातें जो मेरे साथ हुई थीं उसे बताऊं, लेकिन मैंने सोचा मेरी बीवी इतनी डरपोक है ,अगर मैंने ये बातें बता दीं तो वो अकेली घर पर रहेगी नहीं!फिर मन में बोला चलो उसको नहीं बताऊंगा, लेकिन एक बात ठीक किया मैं ये नौकरी नहीं करूंगा ,जल्दी से जल्दी मुझे कोई दूसरी नौकरी ढूंढनी पड़ेगी। दिन बीतने लगा ऐसे ही ड्यूटी भी करने लगा।
एक दिन बीवी ने मुझे बोला हमें एक बार घर जाना है, मैंने पूछा क्यों घर जाना है तुमको? बीवी बोली मेरी माँ की हालत ठीक नहीं है, मैंने फिर पूछा क्या हुआ माँ को, बीवी बोली घर से फोन आया था !भाई बोला बहन तुम थोड़े दिन के लिए घर आ जाओ ,हो सके तो जीजा जी को भी साथ में लेके आना। मैंने तब बीवी को फिर पूछा !क्या बहुत इमरजेंसी है? क्या जाना ही पड़ेगा,?नहीं जाने से नहीं चलेगा क्या? बीवी ने जवाब दिया: नहीं, जाना पड़ेगा !माँ की तबीयत बहुत खराब है, मुझे मेरा मौसी ने भी फोन करके बोला। आज मौसी और हम बहुत देर तक बातें किए। तब मैंने बोला हम तो नहीं जा पाएंगे कल सुबह तुम चले जाना, मेरा घर है !असम के तिनसुकिया जिला में। बीवी और हम एक ही गाँव के हैं !हम दोनों का लव मैरिज हुआ था, मेरी बीवी का नाम रुंजुन है, प्यार से हम रुमा बुलाते हैं, हम दोनों का 7 महीने का एक बच्चा भी है! हम दोनों जोरहाट में रहते हैं किराए के मकान में।
बातचीत करने के बाद शाम हो गई ,मैं नहाने गया और बीवी खाना बनाने में लग गई, हम लोग की एक आदत है , हम लोग रात का खाना 7 बजे से पहले ही खा के सो जाते हैं, और सुबह जल्दी उठ जाते हैं! कभी-कभी 10pm या 10:30pm तक बीवी के साथ असमिया सीरियल देख लेते हैं! मेरी बीवी को साथ निभाना साथिया देखने में बहुत मजा आता है वो टीवी में हॉटस्टार डाउनलोड करके पुराना एपिसोड ही बार-बार देखती रहती है, हम कुछ नहीं बोल पाते हैं, क्या कुछ बोलूंगा तो झगड़ा करना शुरू कर देगी, इसलिए जब बीवी ये सब देखती है हम चुपचाप सो जाते हैं, बीवी बहुत देर तक नहीं देखती, थोड़ी देर बाद वो भी सो जाती है।
हम नहा के आए, उसके थोड़ी देर बाद बीवी और हम खाना खा के सो गए, सोने से पहले मेरी बीवी ने कपड़ा पैक करके रखा ;उसका और बच्चे का। देखते ही देखते रात कैसे बीत गई मालूम ही नहीं चला। बीवी नहा के आई जाने के लिए रेडी हुई, हम भी उनको बस स्टैंड तक बाइक से लेके गए, और बोला रुमा ठीक से जाना और बच्चे का ध्यान रखना। उसके बाद बीवी मायके चली गई हम भी वापस घर आ गए, मैंने सोचा आज मेरी ड्यूटी भी छुट्टी है ;मैं क्या करूं मन में सोचता रहा।
उसी टाइम मेरा एक फोन आया, फोन में मेरा दोस्त चिरंजीत था, चिरंजीत मेरे को बोला, अभी फ्री हो क्या, आ जाओ! आज मेरा मन ठीक नहीं है !दोनों मिलके दवाइयां खाएंगे, दवाइयां का मतलब है दारू, दारू हम रेगुलर नहीं पीते ,2 महीने में 1 बार ;कभी-कभी ज्यादा से ज्यादा 2 बार ,और मेरा दोस्त भी ऐसा ही है !वो भी रेगुलर दारू पीने वाला नहीं है, चिरंजीत जोरहाट का लोकल है, उसका घर की दूरी मेरे किराए के घर से 2km है। उसके बाद हम दोनों मिले; दुकान से एक दारू की क्वार्टर, और कुछ नमकीन लेके, सुनसान जगह में दारू पीने के लिए बैठ गए, दारू पीने के बाद हम अपने रूम चले आए, वो भी घर चला गया।
शाम हो गई 5pm हो गया! हमने प्रेशर कुकर में थोड़ा चावल, और दो आलू और एक टमाटर देके 3 सीटी मारने दी, उसके बाद खाना खा के बेड पर लेटा, नींद नहीं आ रही थी! बार-बार रेस्टोरेंट का वो नजारा मन में आ रहा था, रात को 11pm हो गया !अभी तक मेरी नींद भी नहीं आ रही थी, अचानक नींद आ रही थी !परंतु थोड़ी देर बाद मेरे रूम का दरवाजा खटखटाने लगा, और बाहर से आवाज आई प्रीतम दरवाजा खोल मैं हूँ, वो आवाज धीमी गति से थी !लेकिन मुझे साफ-साफ सुनाई दे रही थी, हम तो पूरा डर गए, और भगवान का नाम मन ही मन बोलने लगे धीरे-धीरे, और दरवाजे की तरफ देखता रहा, और बेड से उठके किचन का दरवाजा भी हुक लगा दिया!और खिड़की का पर्दा भी खींच के पूरे रूम को ढक दिया, मुझे बहुत डर लगा! मेरा दिल धड़कने लगा !इतनी रात कोई इंसान तो नहीं होगा, मालिक तो मेरे रूम में आता ही नहीं !मेरा किराए का घर मालिक के घर से अलग है! उनका बैकसाइड , मेरा किराए का घर है। मेरे घर के पीछे 500 मीटर की दूरी तक कोई घर नहीं है! एक पानी और पानी में उगने वाले पौधों से भरा हुआ पोखर है, बीच-बीच में लोगों का घर है।
मैंने सोचा क्या है वो क्या है, फिर मन में ख्याल आया क्या वही लड़की है ! जिसको ड्यूटी के टाइम पे देखा था, वही मन में सोच के हम सोने लगे! 10-15 मिनट बाद ,हमने अचानक देखा! वही सेम लड़की मेरे तकिये के सामने खड़ी होके हंसके मेरे को देख रही थी! हमने तुरंत जोर-जोर से भगवान का नाम लिया, और तकिये के नीचे से माचिस निकालके अगरबत्ती जलाई !उसके बाद देखा कोई नहीं है। हम बेड से उठ गए! और कुर्सी में बैठ के मकान मालिक को फोन लगाया !लेकिन फोन स्विच ऑफ। क्या करूं किसको पुकारूं कौन सुनेगा वही सोचके पूरा डगमगा रहा था। ऐसे बैठते-बैठते रात के 2 बज गए, लेकिन जागता रहा, और रूम में तेल के दो दीये जला के रखे !और लाइट भी जला के रखी।
रात 3 बजे, हमने सुना मेरे घर के पीछे से आवाज आई! कोई लड़की का जोर-जोर से रोने की ;और कभी-कभी जोर-जोर से हंसने लगती है !हमने सुना ,और बार-बार मेरे आगे पीछे देखने लगा सिर हिला के, पूरी रात जागता रहा !रात 4 बजे तक हम जागते रहे !रोने और हंसने की आवाज सुनते रहे। ऐसे करते-करते सुबह हो गई, हम ड्यूटी नहीं गए छुट्टी लेके बीवी को लाने चले गए।
बीवी के घर जाके सासू माँ और ससुर को ये सब बताया, पूरी कहानी विस्तार से। तब मुझे मेरा ससुर एक बूढ़े बाबा बोलके, गाँव के बैद्य के पास ले गया, और बैद्य को भी हमने ये सब विस्तार से बताया, उसके बाद बैद्य ने कहा ये लड़की तुम्हें साथ ले जाने के लिए आई थी !तुम्हारा भाग्य बहुत अच्छा था तुमको कुछ नहीं किया, क्योंकि तुम्हारे पास माचिस थी, और तुमने तुरंत अगरबत्ती जला दी। ऐसे बोलके वो हमको एक ताबीज दिया, वो ताबीज लेने के बाद मैंने फिर से उसको नहीं देखा। हम रेस्टोरेंट की ड्यूटी भी चेंज करके एक डीलर में नौकरी करने लगे और हमारा दिन ठीक चलने लगा। मेरा नाइट शिफ्ट वाला नौकरी भी गया, डीलर में हमारा ड्यूटी सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक है, और मेरी हॉरर एक्सपीरियंस कहानी यहीं खत्म हुई। धन्यवाद।
मेरी भाग 2: मैनेजर के साथ बातें से हॉरर अनुभव हुआ, और उसके बाद शिफ्ट वाली नौकरी छोड़ के डे शिफ्ट में डीलर में काम करने लगा, यही विस्तार से है कहानी के. भाग 2: मैनेजर के साथ बातें करने के बाद मैं घर चला आया!
और नहा के सीधा बीवी के साथ बैठ गया, सोचा था बीवी को ये बातें जो मेरे साथ हुई थीं उसे बताऊं, लेकिन मैंने सोचा मेरी बीवी इतनी डरपोक है ,अगर मैंने ये बातें बता दीं तो वो अकेली घर पर रहेगी नहीं!फिर मन में बोला चलो उसको नहीं बताऊंगा, लेकिन एक बात ठीक किया मैं ये नौकरी नहीं करूंगा ,जल्दी से जल्दी मुझे कोई दूसरी नौकरी ढूंढनी पड़ेगी। दिन बीतने लगा ऐसे ही ड्यूटी भी करने लगा।
एक दिन बीवी ने मुझे बोला हमें एक बार घर जाना है, मैंने पूछा क्यों घर जाना है तुमको? बीवी बोली मेरी माँ की हालत ठीक नहीं है, मैंने फिर पूछा क्या हुआ माँ को, बीवी बोली घर से फोन आया था !भाई बोला बहन तुम थोड़े दिन के लिए घर आ जाओ ,हो सके तो जीजा जी को भी साथ में लेके आना। मैंने तब बीवी को फिर पूछा !क्या बहुत इमरजेंसी है? क्या जाना ही पड़ेगा,?नहीं जाने से नहीं चलेगा क्या? बीवी ने जवाब दिया: नहीं, जाना पड़ेगा !माँ की तबीयत बहुत खराब है, मुझे मेरा मौसी ने भी फोन करके बोला। आज मौसी और हम बहुत देर तक बातें किए। तब मैंने बोला हम तो नहीं जा पाएंगे कल सुबह तुम चले जाना, मेरा घर है !असम के तिनसुकिया जिला में। बीवी और हम एक ही गाँव के हैं !हम दोनों का लव मैरिज हुआ था, मेरी बीवी का नाम रुंजुन है, प्यार से हम रुमा बुलाते हैं, हम दोनों का 7 महीने का एक बच्चा भी है! हम दोनों जोरहाट में रहते हैं किराए के मकान में।
बातचीत करने के बाद शाम हो गई ,मैं नहाने गया और बीवी खाना बनाने में लग गई, हम लोग की एक आदत है , हम लोग रात का खाना 7 बजे से पहले ही खा के सो जाते हैं, और सुबह जल्दी उठ जाते हैं! कभी-कभी 10pm या 10:30pm तक बीवी के साथ असमिया सीरियल देख लेते हैं! मेरी बीवी को साथ निभाना साथिया देखने में बहुत मजा आता है वो टीवी में हॉटस्टार डाउनलोड करके पुराना एपिसोड ही बार-बार देखती रहती है, हम कुछ नहीं बोल पाते हैं, क्या कुछ बोलूंगा तो झगड़ा करना शुरू कर देगी, इसलिए जब बीवी ये सब देखती है हम चुपचाप सो जाते हैं, बीवी बहुत देर तक नहीं देखती, थोड़ी देर बाद वो भी सो जाती है।
हम नहा के आए, उसके थोड़ी देर बाद बीवी और हम खाना खा के सो गए, सोने से पहले मेरी बीवी ने कपड़ा पैक करके रखा ;उसका और बच्चे का। देखते ही देखते रात कैसे बीत गई मालूम ही नहीं चला। बीवी नहा के आई जाने के लिए रेडी हुई, हम भी उनको बस स्टैंड तक बाइक से लेके गए, और बोला रुमा ठीक से जाना और बच्चे का ध्यान रखना। उसके बाद बीवी मायके चली गई हम भी वापस घर आ गए, मैंने सोचा आज मेरी ड्यूटी भी छुट्टी है ;मैं क्या करूं मन में सोचता रहा।
उसी टाइम मेरा एक फोन आया, फोन में मेरा दोस्त चिरंजीत था, चिरंजीत मेरे को बोला, अभी फ्री हो क्या, आ जाओ! आज मेरा मन ठीक नहीं है !दोनों मिलके दवाइयां खाएंगे, दवाइयां का मतलब है दारू, दारू हम रेगुलर नहीं पीते ,2 महीने में 1 बार ;कभी-कभी ज्यादा से ज्यादा 2 बार ,और मेरा दोस्त भी ऐसा ही है !वो भी रेगुलर दारू पीने वाला नहीं है, चिरंजीत जोरहाट का लोकल है, उसका घर की दूरी मेरे किराए के घर से 2km है। उसके बाद हम दोनों मिले; दुकान से एक दारू की क्वार्टर, और कुछ नमकीन लेके, सुनसान जगह में दारू पीने के लिए बैठ गए, दारू पीने के बाद हम अपने रूम चले आए, वो भी घर चला गया।
शाम हो गई 5pm हो गया! हमने प्रेशर कुकर में थोड़ा चावल, और दो आलू और एक टमाटर देके 3 सीटी मारने दी, उसके बाद खाना खा के बेड पर लेटा, नींद नहीं आ रही थी! बार-बार रेस्टोरेंट का वो नजारा मन में आ रहा था, रात को 11pm हो गया !अभी तक मेरी नींद भी नहीं आ रही थी, अचानक नींद आ रही थी !परंतु थोड़ी देर बाद मेरे रूम का दरवाजा खटखटाने लगा, और बाहर से आवाज आई प्रीतम दरवाजा खोल मैं हूँ, वो आवाज धीमी गति से थी !लेकिन मुझे साफ-साफ सुनाई दे रही थी, हम तो पूरा डर गए, और भगवान का नाम मन ही मन बोलने लगे धीरे-धीरे, और दरवाजे की तरफ देखता रहा, और बेड से उठके किचन का दरवाजा भी हुक लगा दिया!और खिड़की का पर्दा भी खींच के पूरे रूम को ढक दिया, मुझे बहुत डर लगा! मेरा दिल धड़कने लगा !इतनी रात कोई इंसान तो नहीं होगा, मालिक तो मेरे रूम में आता ही नहीं !मेरा किराए का घर मालिक के घर से अलग है! उनका बैकसाइड , मेरा किराए का घर है। मेरे घर के पीछे 500 मीटर की दूरी तक कोई घर नहीं है! एक पानी और पानी में उगने वाले पौधों से भरा हुआ पोखर है, बीच-बीच में लोगों का घर है।
मैंने सोचा क्या है वो क्या है, फिर मन में ख्याल आया क्या वही लड़की है ! जिसको ड्यूटी के टाइम पे देखा था, वही मन में सोच के हम सोने लगे! 10-15 मिनट बाद ,हमने अचानक देखा! वही सेम लड़की मेरे तकिये के सामने खड़ी होके हंसके मेरे को देख रही थी! हमने तुरंत जोर-जोर से भगवान का नाम लिया, और तकिये के नीचे से माचिस निकालके अगरबत्ती जलाई !उसके बाद देखा कोई नहीं है। हम बेड से उठ गए! और कुर्सी में बैठ के मकान मालिक को फोन लगाया !लेकिन फोन स्विच ऑफ। क्या करूं किसको पुकारूं कौन सुनेगा वही सोचके पूरा डगमगा रहा था। ऐसे बैठते-बैठते रात के 2 बज गए, लेकिन जागता रहा, और रूम में तेल के दो दीये जला के रखे !और लाइट भी जला के रखी।
रात 3 बजे, हमने सुना मेरे घर के पीछे से आवाज आई! कोई लड़की का जोर-जोर से रोने की ;और कभी-कभी जोर-जोर से हंसने लगती है !हमने सुना ,और बार-बार मेरे आगे पीछे देखने लगा सिर हिला के, पूरी रात जागता रहा !रात 4 बजे तक हम जागते रहे !रोने और हंसने की आवाज सुनते रहे। ऐसे करते-करते सुबह हो गई, हम ड्यूटी नहीं गए छुट्टी लेके बीवी को लाने चले गए।
बीवी के घर जाके सासू माँ और ससुर को ये सब बताया, पूरी कहानी विस्तार से। तब मुझे मेरा ससुर एक बूढ़े बाबा बोलके, गाँव के बैद्य के पास ले गया, और बैद्य को भी हमने ये सब विस्तार से बताया, उसके बाद बैद्य ने कहा ये लड़की तुम्हें साथ ले जाने के लिए आई थी !तुम्हारा भाग्य बहुत अच्छा था तुमको कुछ नहीं किया, क्योंकि तुम्हारे पास माचिस थी, और तुमने तुरंत अगरबत्ती जला दी। ऐसे बोलके वो हमको एक ताबीज दिया, वो ताबीज लेने के बाद मैंने फिर से उसको नहीं देखा। हम रेस्टोरेंट की ड्यूटी भी चेंज करके एक डीलर में नौकरी करने लगे। और हमारा दिन ठीक चलने लगा। मेरा नाइट शिफ्ट वाला नौकरी भी गया, डीलर में हमारा ड्यूटी सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक है, और मेरी हॉरर एक्सपीरियंस कहानी यहीं खत्म हुई। धन्यवाद।

