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Bijoy Das

Drama tragedy

2.5  

Bijoy Das

Drama tragedy

"अकन नाम के एक लड़के की कहानी, भाग १

"अकन नाम के एक लड़के की कहानी, भाग १

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एक गाँव में एक आदमी रहता था। उस आदमी का नाम धनीराम तामुली था और उसकी पत्नी का नाम दीपिका फुकन था। वो आदमी बहुत कंजूस और अहंकारी था। उनके 5 बच्चे थे। सबसे बड़े लड़के का नाम अकन था, बीच वाले का नाम दिगंत था, और सबसे छोटे का नाम मोइना था। उनकी दो बहनें थीं, एक का नाम रीमा और दूसरी का नाम जूली। रीमा, अकन और दिगंत से छोटी थी और जूली रीमा के बाद थी, मोइना से बड़ी।

अकन बहुत प्यारा था, देखने में भी मासूम लगता था और उसका दिल भी बहुत सीधा-सादा और कोमल था। अकन को लोगों की मदद करना बहुत पसंद था और जब उसे समय मिलता तो हमेशा घर के पीछे जंगल में जा कर बाँसुरी बजाता था। अकन कोमल दिल का था, उसे कोई चालाकी नहीं आती थी, वो बस एक ही बात जानता था कि इंसान की जिंदगी में जो कुछ भी होता है सब भगवान ऊपर से देखते हैं। इसीलिए अकन किसी को बुरा-भला नहीं कहता था, किसी के बारे में बुरा सोचता भी नहीं था।
 अकन की इस सरलता का फायदा उठा कर गाँव के लोग उसे ठगते थे और कोई-कोई लोग उसका अपमान करते थे और बावला पगला कह कर उसका मज़ाक उड़ाते थे !अकन पढ़ाई में अच्छा था, कक्षा 5 से लेकर कक्षा 7 तक वो हमेशा दूसरा स्थान लाता था, लेकिन कक्षा 8 में आते ही उसका पढ़ाई से मन हट गया। जब कक्षा 8 में उसका रिजल्ट आया तो उसे सिर्फ पास होने लायक नंबर मिले, पहले अकॉन को 600 में से 510, 495 ऐसे नंबर मिलते थे लेकिन कक्षा 8 में आते-आते उसे सिर्फ 190 नंबर मिले।लेकिन उसका मुख्य कारण स्कूल में हमेशा दोस्तों द्वारा की गई बेइज्जती थी।स्कूल में कोई दोस्त उसे भाव नहीं देता था, बेंच पर हमेशा अकेला बैठता था, कोई उसके साथ नहीं बैठता था।                                              टिप्पणी :   जब अकन 5वीं कक्षा में था तब उसके पिता ने उसका नाम "कलंगा मध्य अंग्रेजी विद्यालय" में लिखवाया था। वहीं 5वीं कक्षा में ही उसे एक लड़की से प्यार हो गया, लड़की का नाम अंजलि कलिता था। लेकिन 8वीं कक्षा आते ही "बरखलिया हाई स्कूल" में अकन और अंजलि दोनों का एडमिशन हो गया। हाई स्कूल में आकर अमीर लड़कों को पाकर अंजलि ने अकन जैसे लड़के को भाव देना बंद कर दिया।
नया स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चे अमीर घर के हैं, अकन के पिताजी की हैसियत के हिसाब से अकन का ऐसे स्कूल में पढ़ना ही अकन के लिए बहुत बड़ी बात है। स्कूल, अकन के घर से 1.5 किलोमीटर की दूरी पर थी,उधर स्कूल में अकन के साथ उसका भाई भी पढ़ता था। अकन स्कूल में कक्षा 8 में और उसका भाई स्कूल में कक्षा 5 में पढ़ता था।  स्कूल अकन के घर से बहुत दूर नहीं थी, इसलिए उनके पिताजी ने स्कूल में अकन के साथ-साथ उसके भाई का भी दाखिला करवा दिया !

अकन के स्कूल में एक भी ऐसा दिन नहीं गया जिस दिन उसको उसके दोस्तों के ताने न सुनने पड़े, उसके दोस्त, उसकी सरलता का फायदा उठा कर हमेशा स्कूल में उसका मज़ाक उड़ाते थे। लेकिन उसके भाई के साथ ऐसा नहीं होता है ,क्योंकि वह अकन की तरह नहीं है। अकन को हर रोज़ उसके स्कूल के साथी कक्षा में अकेला बैठाते हैं, कोई भी उसके साथ बैठने के लिए राजी नहीं होता है। उसके कपड़ों और पहनावे को लेकर हमेशा लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे। ऐसे ही लोगों के ताने और ठोकरें खाते-खाते अकॉन ने कक्षा 8 पास कर ली और कक्षा 9 में चला गया।

एक दिन 12 बजे का समय  विद्यालय में अल्पाहार का अवकाश था, अकन अंजलि के पास गया और बोला,
अकन: अंजलि रुको ना,
अंजलि: क्या हुआ बताओ।

अकन उसके पास जाकर प्यार भरी नज़रों से अंजलि को देख कर बोला: अंजलि पहले तू ऐसी नहीं थी, मेरा कितना ख्याल रखती थी, लेकिन अब ऐसा क्या हुआ जिसके कारण तुम मुझे देख कर दूर भागती हो!आखिर मेरी गलती क्या है? मैंने ऐसा क्या गुनाह किया, घर में, स्कूल में मेरे खुद के गाँव में भी मुझे कोई भी अच्छे से नहीं बुलाता,  बावला पगला यही सब मेरी पहचान है, और स्कूल में मेरी पहचान है गरीब, हमेशा लोगों के मज़ाक बनता हूँ, लोग मेरे कपड़ों और पहनावे को लेकर हमेशा मेरा मज़ाक उड़ाते हैं। क्या तुम भी ऐसे ही सोचती हो मेरे बारे में?

अंजलि: मुझे तुमसे कोई मतलब नहीं है। मैं तुम्हें प्यार से बोल रही हूँ, मुझसे दूर रहा करो। अभी मेरा पढ़ाई में मन है मुझे ये सब में पड़ना नहीं है ,अगर प्यार होगा भी तो तुम जैसे एक गरीब से नहीं, जिसका आत्मसम्मान ही नहीं है, पहले खुद को कंपेयर करके देखो मेरे साथ, तुम्हारा और मेरा मैच नहीं होता, कहाँ मैं क्लास की टॉपर, और कहाँ तुम क्लास में सिर्फ पास मार्क्स लेके पास करने वाले, तो आज के बाद मुझसे दूरी बना के रहो, पहले जो हुआ था वो भूल जाओ।

अकॉन ने मन ही मन सोचा जिसको माँ के सिवा घर वाले भी इज्जत नहीं देते हैं बाकी सब क्या देगा। वो भगवान के ऊपर छोड़ दिया और उसकी दोनों आँखें आँसुओं से भर गईं, और अंजलि को देखकर बोला आज के बाद हम तुम्हें किसी भी दिन परेशान नहीं करेंगे तुम टेंशन मत लो। ये बोलके अकॉन क्लास में चला आया और अंजलि भी क्लास में आ गई।

दोनों का सेक्शन अलग-अलग है लेकिन गणित की क्लास एक ही साथ होती है।  गणित की क्लास का टाइम था, दोनों A और B सेक्शन को एक ही रूम में क्लास के लिए बुलाया गया !थोड़ी देर बाद राजीब भाटिया सर क्लास लेने आएंगे। सभी लोग अपनी-अपनी जगह पर बैठे हैं लेकिन अकन को बैठने के लिए किसी ने जगह नहीं दी, वो लास्ट के एक कोने में आकर खड़ा हो गया। सभी साथी साथ में अंजलि भी उसका हुलिया देखकर हँसने लगी, राजीब सर की क्लास में एंट्री हुई, सर आके देखा सभी लोग अपनी-अपनी कुर्सी पर बैठे हैं, लेकिन एक छात्रा अभी  खड़ी थी।राजीब सर ने अकन को पूछा: तुम्हारा नाम क्या है? तुम क्यों बैठा नहीं? बैठ जाऊँ !अकन :सर, मेरा नाम अकन है।
सर मेरे बैठने के लिए कोई जगह नहीं है,
राजीब सर: जगह है एक बेंच में 5 बैठ सकते हैं कोई-कोई बेंच पर 3 ही बैठे हैं तुम उधर जाके किसी एक के साथ बैठ जाओ,
अकॉन: सर ये लोग हमें उनके साथ बैठने नहीं देते हैं हमें लास्ट बेंच में अकेला बैठना पड़ता है, अभी बेंच खाली नहीं है ,हम ऐसे ही ठीक हैं!

राजीब सर ने अकन के सहपाठी लोगों को खूब डांटा और उसको बैठने के लिए दिया, प्रणय, बसंता, और अरुण के साथ!उनकी बगल की बेंच में राधिका,पिंकी , और अंजलि बैठी थी । अंजलि और राधिका तीनों मिलके प्रणय को इशारा करके बात कर रही थी,कैसे बैठा है इससे, इसके बदन और कपड़ों से बदबू आ रही है, प्रणय, बसंता और अरुण ने बोला सर को जाने दो उसके बाद देख लेंगे इसको,

राजीब सर ने गणित के अलजेब्रा पार्ट का नया चैप्टर आरम्भ किया, और 3 या 4 सवाल कराने के बाद क्लास खत्म हुई। घंटी बजी सर चले गए उसके बाद प्रणय, बसंता, और अरुण मिलके अकॉन को बहुत पीटा, अंजलि: ने उन लोगों के सामने अकन की बहुत बेइज्जती भी की, साले भिखारी कहीं का, बदन से बदबू आ रही है कपड़े तू घर पर धोया कर, प्रणय न जाने तुम लोग इसकी बदबू कैसे बर्दाश्त किए, सभी दोस्त अकन के ऊपर हँसने लगे और 15 मिनट तक उसका मज़ाक उड़ाया गया।
इसीलिए अकन का धीरे-धीरे पढ़ाई में मन लगना बंद हो गया । और उसने सोचा कि वो गायक बनेगा, क्योंकि उसे आज तक लोगों से एक अच्छा शब्द भी सुनने को नहीं मिला था, सब उसका मज़ाक उड़ाते थे और मारते थे। उसने सोचा गायक बनने पर लोग उसे बहुत पसंद करेंगे, प्यार करेंगे, क्योंकि वो देखता था कि लोग गायकों और फिल्म के अभिनेताओं को बहुत इज्जत देते थे।

वैसा ही सोच कर अकन ने एक दिन स्कूल छोड़  दिया, अकन ने कक्षा 9 की फाइनल परीक्षा देकर स्कूल छोड़ा था। वह कक्षा 10 में पास भी हो गया, लेकिन सहपाठियों के तानों और गर्लफ्रेंड की बेवफाई के कारण उसका मन टूट गया और उसे स्कूल छोड़ने पर मजबूर किया।
 स्कूल छोड़ने के बाद आकन ने फैसला किया कि वह गाना गाएगा और गायक बनेगा !यह सोच कर अकन जंगल में जहाँ कोई नहीं होता वहाँ चीख-चीख कर गाने का रियाज़ करने लगा। लेकिन अकन की उस सरलता को लोगों ने और भी बुरा समझा, पहले जो लोग उसे पसंद करते थे वो भी उसे ना-पसंद करने लगे। गाँव के लड़कों के माँ-बाप ने अपने बच्चों को उसके साथ रहने से मना कर दिया। उसे देख कर दरवाज़ा बंद कर देते थे और अगर 5 लोग इकट्ठे होते और उसे देख लेते तो गाना गाने को कह कर "बावला पगला" कह कर आपस में उसका मज़ाक उड़ाते थे।

अकन इतना समझता नहीं था, वो सोचता था कि लोग उसका गाना पसंद करते हैं ,इसलिए गाने को कहते हैं, लेकिन बात उल्टी थी। ये बात अकन धीरे-धीरे समझने लगा। इसलिए वो रात को और दोपहर को जंगल में गाने का रियाज़ करने जाते थे ,और पेड़-पौधों के सामने अपना दुख कहते थे!क्योंकि वो  जानते थे कि उसका दुख कोई नहीं समझेगा, घर के लोग भी उसे नहीं समझते। इसलिए वो अपने मन का दुख पेड़-पौधों के सामने निकालता था । रो-रो कर कहते थे, "प्रभु मैंने क्या गलती की है, आज तक किसी का बुरा नहीं किया, मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है।"

अकन अक्सर बाँसुरी बजाता था, जंगल में अकेला रहता था और पेड़ों के साथ, जीव-जंतुओं के साथ अपने मन की बात कहते थे। एक दिन दोपहर को अकन जंगल में बाँसुरी बजा रहा था ,और बीच-बीच में 100 साल पुराने बरगद के पेड़ को गले लगा कर "मैंने क्या गलती की है, क्यों लोग मुझे बुरा समझते हैं, क्यों घर के लोग भी मुझे देखना नहीं चाहते" कह कर अकेले पेड़ से रो-रो कर पूछ रहा था। तभी दोपहर को रामनाथ नाम का एक बुजुर्ग आदमी गाय ढूंढते हुए जंगल में आया, और उसने अकन को ऐसे रोते हुए देख कर गाँव में जाकर शोर मचा दिया कि धनीराम का बड़ा लड़का पागल हो गया है और उसपर भूत चढ़ गया है।

उस दिन से अकन को गाँव के लोग और घर के लोग और भी ज्यादा ना-पसंद करने लगे। धनीराम अकन को हमेशा गाली देता था और मारता-पीटता था, यहाँ तक कि माँ के अलावा भाई-बहन भी अकन को देखना नहीं चाहते थे। धीरे-धीरे दिन बीत गए और अकन पर गाँव के लोगों, पिता और भाई-बहन का अत्याचार बढ़ता गया। अकन हमेशा भगवान के सामने धूप जलाकर कहता है, "प्रभु मैंने कौनसा पाप किया है? लोग मुझे देखना नहीं चाहते, मैंने तो किसी का बुरा नहीं किया, मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?"
गाँव वाले अकन कि भाई-बहन को अकन के नाम से चिढ़ाते थे। स्कूल जाते वक्त हँसते थे, गली में खेलने-कूदने जाए तब भी हँसते थे।
अकन के पिताजी को अकन का जंगल में जाकर बांसुरी बजाना और गाना गाना ये सब पसंद नहीं थी ,अकन की इसी हरकत की वजह से अकन के भाई, बहनों और पिताजी को लोग बहुत बातें सुनाते थे, कोई-कोई पिताजी के अपने रिश्तेदार बोलते हैं !तुम्हारा लड़का पागल हो गया है, ये खुद से बातें करता है, जंगल में जाता है, गाना गाने के लिए और पेड़ के पास बैठकर कभी-कभी दोपहर को बांसुरी बजाता है, वो भी गाँव के जंगल में जाकर जहाँ लोग दिन में भी जाने से डरते थे!इसके ऊपर भूत सवार हुआ है ,नहीं तो ये पागल हो गया है ,तुम इसका कुछ करो नहीं तो इसकी ये बीमारी, ये भूत गाँव के सभी लोगों के लिए खतरा है,तब  उनके पिताजी को बहुत गुस्सा आ जाते थे।। और घर में जाकर अकन को गाली देकर पीटते थे।
पिताजी कभी-कभी दुकान से सामान लाने के लिए उसके भाई-बहन को भेजते थे, लेकिन दुकान वाला भी उनको अकन के नाम लेकर भला-बुरा कहता था। यह सुनकर उसके भाई-बहन घर आकर पिताजी को बता देते थे, और पिताजी आकर अकन को गाली देते थे, कभी-कभी मारते भी थे।जब पिताजी अकन को मारते थे तब यह देख कर उसके भाई-बहन मन ही मन बहुत खुश होते हैं।

जिस दिन माँ घर पर नहीं होती थी, उस दिन अकन को उसके भाई-बहन और पिताजी खाना भी नहीं देते थे। कहते थे, ,निक्कोमा तू मर क्यों नहीं जाती? तेरे कारण हमें हर रोज़ लोगों के ताने सुनने पड़ते हैं।

 अकन कुछ नहीं बोलती थी। चुपचाप मन में सब सह कर भूखी ही सो जाती थी। कभी-कभी भगवान का नाम लेकर भगवान से सवाल पूछती थी।
एक दिन अकन ने सपने में देखा कि उसने स्कूल में फिर से नाम लिखवाया है। लेकिन सपना देख कर उसने सोचा गाना नहीं गा पाऊँगा, गायक बनने के लिए  पैसे चाहिए, मुझे पैसे कौन देगा, कोई तो मुझे प्यार ही नहीं करता। इसलिए उसने रो कर माँ से कहा, "माँ मैं फिर से पढूँगा, मुझे स्कूल में नाम लिखवा दो, मेरा वैसे भी मैट्रिक देने के लिए 1 साल ही बचा है।" माँ को ये बात सुन कर अच्छा लगा, मन ही मन खुद को बोला।लड़का पढ़ना चाहता है तो पढ़ने दो। माँ ने हिम्मत जुटाई,पुराने स्कूल से अकन का नाम कटवाकर दूसरे स्कूल में नाम लिखवा दिया। अकन की एक नई यात्रा फिर से शुरू हुई।

"अकन के साथ क्या हुआ, दोस्तों और गाँव के लोगों की कठोर यातना के बीच भी उसने खुद को कैसे स्थापित किया, ये जानने के लिए कहानी को लाइक कीजिये। और अगर कहानी ने आपके दिल को छुआ है तो मेरी गलतियों को सुधार कर आशीर्वाद के रूप में अपनी सलाह कमेंट में देना ना भूलें, धन्यवाद।"                                                   


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