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Bijoy Das

Tragedy Action

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Bijoy Das

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अकन नाम के एक लड़के की कहानी, भाग 2"

अकन नाम के एक लड़के की कहानी, भाग 2"

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पाठक,  अकन की कहानी के भाग 1 में आप लोगों ने देखा कि: -

गाँव वाले अकन के नाम से उसके भाई-बहन को चिढ़ाते थे। स्कूल जाते समय, गली में खेलते समय हर जगह उसका मजाक उड़ाया जाता था।

घर में भी उसे प्यार नहीं मिला। पिताजी और भाई-बहन उस पर गुस्सा निकालते थे, कभी गाली देते थे, कभी मारते भी थे। जिस दिन माँ घर पर नहीं होती थी, उस दिन उसे खाना तक नहीं दिया जाता था।

आकन अकेली सब सहती रही। भूखी सो जाती थी और भगवान से एक ही सवाल पूछती थी - प्रभु, मेरा कसूर क्या है?

फिर माँ ने हिम्मत दिखाई और उसका नाम पुराने स्कूल से निकलवाकर दूसरे स्कूल में लिखवा दिया।


अब आगे भाग २:   जब अकन ने दोबारा स्कूल में पढ़ाई के लिए दाखिला लिया, तो गांव के लोग और भड़कने लगे। कुछ लोग तो आपस में ही बातें करने लगे कि अरे ये पागल अब पढ़ाई करेगा, अब बूढ़ा चिड़िया फिर से बोलेगा। ऐसे ही सब गांव वाले बातें करके हंसने लगे।

एक दिन अकन घर में पढ़ाई कर रहा था, शाम के साढ़े तीन बजे के समय उसके पिताजी घर आए और अकन का नाम लेकर उसकी माँ को गाली देने लगे।
पिताजी जब गाली दे रहे थे, उनके भाई और बहनों ने भी पिताजी को बोला - पिताजी हम लोग भी तंग आ गए हैं इससे, आप कुछ कीजिये, कहीं भी जाओ लोग हमें इसके नाम लेकर गालियाँ देते हैं, हँसते हैं। और नहीं तो घर में ये रहेगा नहीं तो हम लोग रहेंगे, आप कुछ कीजिये।
पिताजी उनकी बातें सुनीं और उनकी माँ को फिर से बोला,बोले, सारे बच्चे अभी पैसा कमाने लगे हैं।नज़दीक की गांव के कमल के बेटे ने पैसा कमाकर घर में एक नया टीवी खरीदा, एक एसी लिया, सोफा सेट भी खरीदा और हमारे गांव के पुतुल के बेटे का नाम क्या है? रूपम, उसने भी पैसा कमाकर एक मोटरसाइकिल ली, और हमारा ये निकम्मा अभी बुहा उम्र में पढ़ाई करने लगा है। तुमने देखा है बूढ़े चिड़िया की आवाज निकालते हुए।

तब अकॉन की माँ ने उनके पिताजी और भाई- बहनों को गाली देकर कहा, क्या हुआ? जो बेटे ने फिर से पढ़ाई करने की ठानी है, जरूर मेरा बेटा कामयाब होगा। आप लोगों की बातें कम सुना करिए, लोग भला बुरा कहेंगे ही। गांव के लोग कभी भी मेरे बेटे की अच्छाई नहीं सहते हैं, उनके लिए तो मेरा बेटा ही इस धरती पर सबसे निकम्मा है। क्या आप चाहते हैं कि मेरा बेटा हमेशा ऐसे ही रहे?

तब पिताजी गुस्सा होकर तुम लोग जो करना है करो बोलकर घर से बाहर चले गए।

उसके बाद अकन की माँ अकॉन के पास आई और बोली, बेटा तुम किसी की भी बात मत सुनना, हम हैं तुम्हारे साथ।                                                               अकन का नया स्कूल घर से 2.5 किलोमीटर की दूरी पर था। स्कूल जाने के रास्ते में एक पान तमोल की दुकान और एक होटल था। उसी होटल में अकन कभी कभी स्कूल आते समय सना पकौड़ा खाने के लिए जाते थे।

अकन के गांव में स्कूल के रास्ते में एक पोल था, और पोल के किनारे एक दुकान थी। दुकान के सामने गांव के 10 या 12 लोग हमेशा अड्डा देते थे। इसी दुकान का दुकानदार गांव का एक बुजुर्ग था, नाम रमेश, अनुमानित उम्र 65 साल होगी। अकन को स्कूल जाने के लिए इसी रास्ते से दुकान के सामने से होकर जाना पड़ता था।
नए स्कूल में अकोन को ताने नहीं सुनने पड़े, टीचर भी बहुत अच्छे थे, उसके साथी भी उसके साथ बुरा सलूक नहीं करते थे, लेकिन घर में कभी-कभी उसके भाई-बहनों ने  उसके साथ बुरा सलूक करते थे।
एक दिन अकन स्कूल गया था, समय सुबह 8 बजकर 40 मिनट था। दुकान के बगल में पोल पर बैठकर रमेश दुकानदार, रामनाथ और अकन के 4 साथी कनाई, दीपक, रामेन, बसंता अड्डा दे रहे थे। उनके साथ दो बुजुर्ग औरतें भी थीं, दीपाली और अकन की मामी नयंतारा।

अकॉन को दूर से ही स्कूल जाते देख दुकानदार बोला, देखो ये बूढ़ा सेरिया अभी फिर से आवाज निकालेगा। उसकी बात सुनकर सभी लोग हंसने लगे।

तब अकॉन की मामी ने कहा, हम लोगों का महान सिंगर अभी पढ़ाई करेगा। जाने दो, सब कर लिया, अभी ये भी करके देख लो क्या होता है, शायद बूढ़े सेरिया की आवाज निकल जाए। ऐसा बोलकर जोर जोर से हंसने लगी।

और रामनाथ नाम के बुजुर्ग ने कहा, तुम लोगों को मालूम है, उस दिन मेरे साथ क्या हुआ, मैं तो डर गया, साथ में गाय भी डर गई और भागने लगी थी। उसके बाद फिर से सभी लोग हंसने लगे।

तब अकॉन के एक साथी दीपक ने कहा, रामनाथ चाचा  इसको भूत क्यों नहीं पकड़ता है? गांव के उस जंगल में तो दिन में भी कोई नहीं जाता। सुना है ये रात में भी उधर गाना गाते और बांसुरी बजाते रहता था, गांव के बहुत लोग इसे देखकर डर गए थे।

तब दुकानदार और बुजुर्ग औरतें बोले, ये खुद ही भूत है, इसको देखकर भूत भी दूर भागते हैं।

उन लोगों की बातें अकन ने सुनी लेकिन कुछ नहीं बोला, चुपचाप स्कूल चला गया।अकॉन ने सोचा ये लोग हमेशा मुझे ऐसे ही नफरत करते रहेंगे जब तक मैं कुछ नहीं बन जाता, मुझे अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना है। मुझे खुद के लिए कुछ करना है।


अकन को देखकर एक ने उसे ताना मारकर बोला, स्कूल जा रहे हो, जाओ अब क्या ये तुम्हारा नया कारनामा है, जंगल में जाना छोड़ दिया क्या आजकल?

अकन ने कुछ जवाब नहीं दिया, चुपचाप स्कूल चला गया।मन ही मन गुस्सा आया लेकिन कुछ नहीं कहा। सब भगवान पर छोड़ दिया, और सोचा अगर इस दुनिया में भगवान है तो मैं जरूर कुछ न कुछ करूंगा इन सबसे ऊपर जाके।ऐसे ही देखते देखते समय बीतता रहा और मैट्रिक परीक्षा का समय आ गया। अकन मैट्रिक की परीक्षा देने गया, फिर भी परीक्षा केंद्र में आते जाते समय गांव वालों के ताने और हंसी चलती रही। गणित की परीक्षा आखिर में थी। गणित की परीक्षा बृहस्पतिवार को थी, बुधवार की सुबह अकॉन अपने साथी रामेन के घर से दूध लेने के लिए गया था। उसकी माताजी ने उसे दूध लेने के लिए रमेश के घर भेजा था।

अकॉन रमेश के घर जाकर पूछा मौसी जी माँ जी ने भेजा है दूध लेने के लिए। मौसी बोली ठीक है बेटा लाती हूँ। अकन बैठ गया बरामदे में कुर्सी पर, थोड़ी देर बाद मौसी आकर दूध दिया और पूछने लगी तुम्हारी परीक्षा कैसी जा रही है?

अकन बोला ठीक ही जा रही है अभी तक, अगर गणित की परीक्षा भी ठीक हुई तो मुझे फर्स्ट क्लास मिल जाएगा।

मौसी बोली हँसी से उनका अपमान करके अरे साला तुझे फर्स्ट क्लास मिलेगा, अगर गलती से तू पास हो गया तो यही बहुत बड़ी बात होगी तेरे लिए।

अकन बोला नहीं मौसी मुझे फर्स्ट क्लास जरूर मिलेगा आप देख लेना।

मौसी बोली ठीक है देख लेंगे बड़ा आया फर्स्ट क्लास लेने वाला, तुम्हारा कल गणित का एग्जाम है ना?

अकन बोला हाँ मौसी कल गणित है।

मौसी बोली थोड़ी देर रुको हम कुछ लाते हैं तेरे लिए, उसके बाद मौसी अंदर जाकर एक गणित की आंसर नोटबुक का फटा हुआ पन्ना अकन की ओर बढ़ाकर बोली ये लो तुम, इसे छिपाकर ले जाना परीक्षा देने तुम जरूर पास हो जाओगे।

अकन बोला मौसी मैं चोरी करके पास होना नहीं चाहता हूँ, मैं अपनी खुद की मेहनत से फर्स्ट क्लास पास करूंगा।

मौसी बोली ठीक है तो फिर गांव की इज्जत मिट्टी में मिलाकर ही रहूँगी।

अकन:  मन में बुरा लगा लेकिन कुछ जवाब नहीं दिया, चुपचाप सह लिया ,बोला मौसी चलता हूँ।

उसके बाद अकन घर चला आया। परीक्षा हुई अकन ने ठीक से परीक्षा दी।

धान की खेती की फसल समेटने का समय आया अकन भी पिताजी के साथ खेत की फसल समेटने में लग गया।
खेत में गाँव के लोग पिताजी के सामने आकर बहुत बुरा कहते हैं, परीक्षा के बारे में पूछकर।

पिताजी बोलते हैं - मैंने इसको पढ़ने को नहीं बोला, ये सब इसकी माँ का आइडिया है, जो करना है करे, मैंने तो हाथ छोड़ दिया है। अभी लड़के को पैसा कमाना चाहिए , कमा के आगे के लिए पैसे जोड़ना है और हमारी ये अभी पढ़ाई करने लगी है।

मैं क्या ही बोलूँ।
एक दिन गांव में जॉब कार्ड की सरकारी योजना का काम हुआ था, अकन भी काम करने गया। गांव में नदी की खुदाई का काम हो रहा था, तब एक लड़का अकन के गांव का ही था उसका नाम दिम्पल, वो काम का सुपरवाइजर था, वो सबको बुलाकर साइन ले रहा था, तब अकॉन गया साइन करने के लिए और अंग्रेजी में अपना नाम लिखा, अकॉन ने अपना नाम अंग्रेजी में ठीक ही लिखा था लेकिन गांव के दिम्पल ने उसका मजाक उड़ाया तुमने अंग्रेजी कहां से सीखी? अंग्रेजी आती है क्या तुम्हें? बूढ़ा सेरिया अभी पढ़ाई करने लगा है, तुम्हारे साथी लोग अभी बीए फर्स्ट सेमेस्टर में हैं और तू अभी बोलना सीख रही हो, तू मर ही क्यों नहीं जाता तुझे देखकर मुझे उल्टी आती है, उसकी ये बातें सुनकर सभी लोग हंसने लगे और अकॉन का मजाक उड़ाने लगे, एक ने कहा इसको तुम दोपहर के समय गांव के जंगल में जाते समय गाना गाते और बांसुरी बजाते देखोगे, आजकल इसके डर से जंगल में कोई नहीं जाता है। अकन किसी को कुछ नहीं बोला मन ही मन उसको बहुत बुरा लगा लेकिन करेगा तो क्या करेगा अभी। काम खत्म हुआ सभी लोग घर चले गए और अकन भी घर चला गया।लेकिन घर में काम पर लोगों ने उसके साथ जो बुरा सलूक किया वही मन में आ रहा है।

मन ही मन उसने संकल्प लिया - लाइफ में कुछ करेगी तू जरूर, सबको दिखा देगी एक दिन।

रात के समय अकन के पिताजी ने अकन को बुलाया, अकन तुम 20 साल के हो गए क्या अभी भी तुम घर पर बैठकर मेरा खून चूसकर ही खाओगे क्या? तुम्हारे दोस्त दिगंत के साथ कल से काम करने के लिए शहर जाना। पढ़ाई लिखाई करके तुम कुछ नहीं उखाड़ पाओगे ये तुम्हारी बस की बात नहीं है।

अकन कुछ नहीं बोला ! उसकी माँ आकर पिताजी को बोली, आप लड़के को इतनी गाली क्यों देते हो रोज, ये तो आपका ही खून है, वो पढ़ाई करने के लिए ठाना है, आप उसको उसका काम करने दीजिए । अब तो एग्जाम खत्म है ,आपको कमा के दिया है ना ?जॉब कार्ड का काम करके पूरे दो हफ्ते का पैसा आपको ही दिया है। अपने लिए बेटे ने एक रुपया भी नहीं रखा है। , और क्या चाहिए आपको लड़के से?

पिताजी बोले आजकल पढ़ाई लिखाई से कुछ होता है क्या? क्या उखाड़ेगा ये निकम्मा पढ़ाई करके? जो उखाड़ना है वो तो उखाड़ ही दिया। अब क्या सारी उम्र मैं कमाता रहूं इसको मुफ्त में रोटियां खिलाता रहूं तू यही चाहती है ना?

माँ बोली आप रिजल्ट के लिए तो रुक जाइए, और एक महीने बाद रिजल्ट देगा, देख लेना मेरा बेटा कुछ ना कुछ अच्छा ही करेगा।

पिताजी बोले ठीक है देख लेंगे बूढ़े सेरिया की आवाज कैसे निकलती है।


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