मूर्ख राजा
मूर्ख राजा
एक राजा था, हर रोज राजा ने अपने राज्य मे पुरजनों को देखने केलिए एक जासूस की तरह जाते थे।
एक दिन वो बाजार आए थे, वहा सारे वर्तकों घोड़े बिकते थे। हरेक व्यक्ति अपने अपने घोड़े के बारे मे बताते थे एक तो तेजी चलने वाली है तो एक निडर वाली जैसे वैसे बताकर अपने घोड़े को बिकते थे। एक आदमी राजा के पास आकर मेरा घोड़ा उडनेवाला है बताकर बेचा। राजा भी वो घोड़ा खरीद कर खिले चलेगए।अगले दिन मंत्री को बुलाकर घोड़ा को उडाने को बताया मंत्री ने सेनापति को हुलाकर विषय बताया तो सेनापति ने राजा से बताया की घोड़ा तो उडान वाले नहीं है।
व्यापारी ने आपको धोखा दिया था।
तुरंत लइस व्यापारी को बुलाकर आप क्यों झूठ बोला पूछा वो तो जवाब दिया की उड़ने वाले का मतलब उड़ने के जैसे तेजी दौड़ने वाली है मेरा घोड़ा बताया।
अगले दिन सभा मे राजा आदेश दिया की घोड़े को उड़ाने वालो को उपहार देने का तयार है लेकिन कोई भी नहीं आया।
काजा एक एक व्यक्ति को बुलाकर घोड़े को उडाने की तयार करने को बताते है जिन लोगों ने असफल हुआहै उन लोगों को मारते थे। अंत मे सोमनाथ नामक एक सैनिक से राजा पूछा था की आप इस घोड़े को उड़ने को सिखाइए।
सोमनाथ भी एक वर्ष कालावकाश पूछा घोड़े को सीखने की। इस बात पूरा देश पर फैलाहुआ। सोमनाथ की पत्नी को भी मालूम हुआ ये विषय पति घर आने के बाद पूछा था की राजा आपको घोड़े की उड़ाने को सीखने को बताया क्या ? आप कैसे सिखाएँगे। बात तो मुश्किल है लेकिन सोचोअगर मै इन्कार किया है तो तुरंत राजा मुझे मारनेवाले है इसलिए एक वर्ष समय माँगा मैंने, इस एक वर्ष मे कुछ भी हो सकता है राजा को समज मे आसकता है की घोड़ा उड़ने वाला नहीं है या घोड़े भी उड़ सकते है कौन जाने, ये मूर्ख राजा से अब बचा लिया मैंने देखेंगे क्या होगा।
