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Archana kochar Sugandha

Inspirational


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Archana kochar Sugandha

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मनोबल की सेटिंग

मनोबल की सेटिंग

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रश्मि को कूड़ेदान में थर्मामीटर और ऑक्सीमीटर यंत्र डालते देखकर, चिराग एकदम से रश्मि इतने महंगे यंत्र कूड़ेदान में क्यों डाल रही हो, यह तो हमेशा काम में आते रहेंगे---?

रश्मि- "भगवान ना करें कभी इन खराब यंत्रों की फिर से जरूरत पड़े।"

चिराग- "खराब।"

रश्मि- "खिलखिला कर हाँ! जनाब खराब है। मगर तुम्हारे जीवन जोत में उजाला इन्हीं खराब यंत्रों ने ही भरा हैं।"

चिराग - "मतलब।"

रश्मि - तुम मौत के लिए साँसे गिन रहे थे और मैं तुम्हारी जिंदगी के लिए दुआ कर रही थी। तुम असहनीय पीड़ा के दर्द को झेल नहीं पा रहे थे और उखड़ती साँसों पर हिम्मत हार कर, मौत के लिए यमराज को पुकार रहे थे। तुम मेरा हाथ पकड़ कर, रश्मि मेरी मौत, आने में इतनी देरी क्यों कर रही है---? 

रश्मि - "तुम मेरे चिराग हो और अभी तुम्हें मेरे लिए जलना है, मुझे दिए सातों वचन निभाने हैं, मेरा तुम्हारे सिवा इस संसार में और है भी कौन--? तुम चिराग हो और मैं रश्मि, रोशनी भी इकट्ठे करेंगे और बुझेंगे भी इकट्ठे ।"

चिराग - "नहीं रश्मि! यह चिराग अब और नहीं जल सकता। मेरा आक्सीजन लेवल काफी कम है और बुखार भी एक सौ चार है। मेरी हिम्मत भी जवाब दे रही है।"

रश्मि - लगता है तुमने कम ऑक्सीजन लेवल और ज्यादा बुखार का वहम पाल लिया है। मुझे तो तुम्हारा बुखार और ऑक्सीजन लेवल बिल्कुल ठीक लग रहा है। कहीं तुम ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर का सही ढंग प्रयोग से न कर रहे हो। चलो मैं तुम्हें दोबारा से लगा देती हूँ । जैसे ही रश्मि चिराग को ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर लगाती है, ऑक्सीजन का लेवल और बुखार नियंत्रित सीमा में आ जाते हैं । रश्मि खुशी से चहकते हुए, मैं कह रही थी ना तुम थर्मामीटर और ऑक्सीमीटर का सही ढंग से प्रयोग नहीं कर रहे हो। ऑक्सीजन लेवल और बुखार को सही देखकर तुम्हारे मनोबल को मजबूत इच्छाशक्ति का सहारा मिलता है और शरीर दर्द की पीड़ा तथा उखड़ती साँसों से भी कुछ राहत महसूस होती है। अब यह मेरी सेटिंग का परिणाम था या मेरे आत्मविश्वास का जादू कि ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर, तुम्हारे ऑक्सीजन और बुखार का लेवल जैसे-जैसे सही दिखाता गया, वैसे ही तुम्हारा मनोबल बढ़ता गया और तुम बिल्कुल ठीक-ठाक होकर मेरे सामने हो।

चिराग - सेटिंग 

रश्मि - मुस्कुराते हुए हाँ चिराग सेटिंग।

इन अदने से यंत्रों के आगे तुम्हारी हिम्मत को हारते और तुम्हारे मनोबल को डगमगाते हुए मैं कैसे देख सकती थी। अत: मैंने इन यंत्रों के मनोबल को डगमगा कर, इनके लेवल को अपने हिसाब से सेट कर दिया था। जिसका परिणाम अब आपके सामने है। अब आप ही बताओं उठा लूँ वापिस इन्हें कूड़ेदान से।

चिराग उसे बांहों में भरते हुए, सच में सावित्री- सत्यवान की तुम महान हो ।



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