मेरा प्रिय भोजन पुलाव
मेरा प्रिय भोजन पुलाव
मम्मी आज पुलाव बनाना गोभी मटर डालना जब मैं स्कूल से आऊं तो बना मिले ! मम्मी ने मेरा माथा चूमकर हामी भर दी और मैं स्कूल चली गई।
मन बहुत खुश कि घर जाकर पुलाव आम का अचार खाऊंगी भूख भी लगी थी।
घर आई बैग फेक कर मम्मी से कहा दो पुलाब मम्मी कपडे धो रही थी बोली हाथ धोकर कुकर से निकाल ले और अपने भाईयों और मेरे लिए बचा देना।
मैंने कूकर खोला तो उसमें जरा सा पुलाव एक करछुल भी नहीं। मैं मम्मी के पास आई और बोली कहाँ है पुलाव
अरे नहीं बेटा मैंने तो बहुत सारा बनाया था !
तो कहाँ गया मैं रोने लगी। मम्मी ने चुप कराया रसोईघर में जाकर देखा तो पुलाव कम था।
तभी मम्मी को याद आया पड़ोस के एक भैया जो पोलिटेकनिक की पढ़ाई कर रहे थे कॉलेज से आकर मम्मी से बोले आन्टी जी भूख लगी है कुछ है क्या ?
मम्मी ने कहा हां जाकर पुलाव खाले गरम है और भाई ने स्वाद स्वाद में सारा पुलाव सफाचट करके कूकर बंद करके चले गये ये भी न सोचा कि आन्टी जी ने अपने बच्चों के लिए बनाया था।
मम्मी को गुस्सा तो बहुत आया पर चलो अपना बेटा समझकर माफ कर दिया। फिर मम्मी ने आलू की पकौड़ी बनायी और भाई जी भी आ गये और माफी माँगते हुऐ पकौड़ी भी चटकाई।
