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Hemisha Shah

Drama

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Hemisha Shah

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मैं यानि की नदी

मैं यानि की नदी

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पानी जीवन होता हैं मानवजाति के लिए। पानी बरसते बरसात के रूप में या पहाड़ों की चोटी से झरनो के द्वारा मुझ में मिलता हैं 

मैं यानि की नदी जमीन के विशाल पट में फैली हर गांव, हर जंगल और शहर बीच बहती चली जा रही हूँ।

रुकना मेरा नाम ही नहीं हैं

बस जहा जाती हूँ हरियाली फैलाती हूँ। किसानों के लिए तो में देवता सामान हूँ।

कभी शांत तो कभी उछलती कूदती ,कभी रौद्र स्वरुप तो कभी पाताल में भी चली जाती हूँ

कभी कोई जगह मुझे पवित्र मानते हैं।

पर गांव के बच्चे तो मुझसे सिर्फ मस्ती करना जानते हैं।

कुछ धर्म मेंजाती में इंसान का आखरी अंश मुझ में ही विलीन होता है।

लोग कचरा डाल के मुझे गंदा बहुत करते हैं ये मुझे कतई पसंद नहीं हैं ! कचरेका डिब्बा किसके लिए बना हैं ? समझाओ सब को। आज आपसे कहना हैंके में अंत में दरिया में मिल जाती हूँ मुझे कोन रोकेगा !

रोक लो ना ! मुझे खारा नहीं होना हैं !

कितनी मीठी हूँ मैं बस मुझे रोक लो !


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