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Gopal Agrawal

Abstract


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Gopal Agrawal

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मायूस मत होना

मायूस मत होना

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महेश रोजाना की तरह आॅफिस से घर लौटा तो उसकी पत्नि अंजली ने पूछा,

नव्या के पापा, आपकी तबियत तो ठीक है। आप बहुत थके हुए एवं उदास लग रहे हो।

महेश ने अंजली से कहा- ऐसी कोई बात नहीं है। तुम जाकर चाय बना लाओं अदरक वाली, चाय पीते हुए फिर अंजली यह बात कहती है कि आज आपका चेहरा बहुत उतरा हुआ दिख रहा है।आखिर बात क्या है।

महेश ने बताया कि आॅफिस का में बाॅस को बदलने के प्रोसेस चल रही है। यदि वो बदला गया तो अपनी नौकरी को भी चली जाएगी।

महेश एक निजी कंपनी में काम करता है। उसके परिवार में उसकी पत्नि अंजली एक बेटा रवि व एक बेटी नव्या है। छोटा सा परिवार है

एक काॅलोनी में परिवार रहता है। महेश के पापा ने पहले मकान बना लिया था। रवि ने इंजीनियरिंग की है। लेकिन अभी कहीं जाॅब नहीं मिला।

महेश पहले व्यापार करता था लेकिन समय की मार के चलते व्यापार ठप्प हो गया व वह लम्बे समय से परेशानी के दौर से गुजर रहा है।

दो साल पहले ही यह जाॅब मिला है।

एक सप्ताह बाद महेश थका हारा घर पर आया तो अंजली सीधे चाय बनाने पहुंची व चाय बनाकर महेश को देते हुए बोली

नव्या के पापा बहुत दुखी व मायूस नजर आ रहे हो, क्या बात है।

महेश ने अंजली से कहा कि कंपनी ने नया बाॅस रख लिया है और उसने पूरा स्टाॅफ नया रखा है।

अंजली महेश को दिलासा देते हुए कोई बात नहीं है नव्या के पापा आपके पास बहुत अनुभव व हुनर है। हम सब मिलकर नया रास्ता तलाश लेगें।

उसी रात को पूरा परिवार एक साथ बैठा और आगे क्या करना एवं कैसे करना है इस बात पर चर्चा की।

बेटे रवि ने कहा कि पापा क्यों न हम डिर्पाटमेंटल स्टोर घर पर ही खोल ले, अपनी काॅलोनी में कोई सामान की दुकान भी नहीं है।

महेश ने कहा कि बेटा बात तो अच्छी बताई है लेकिन इसके लिए बहुत पैसा लगेगा और तुझे पता है कि तेरे पापा के पास पैसे की शुरू से कमी है।

तभी तो अच्छे चलते धंघे को बीच में ही घाटा उठाकर बंद करना पड़ा था।

इस बीच अंजली सभी से बोलती है अभी रात हो गई है, जाकर सब सो जाओं, सुबह क्या करना है इस पर चर्चा करेगें।

उधर अंजली की सहेली मंजू जो कि काॅलोनी में ही रहती थी उससे अंजली अपने परिवार की सभी बाते साझा करती थी। दूसरे दिन अंजली मंजू भाभी के घर पहुंची।

परिवार की चर्चा करते हुए नई डिपार्टमेंटल स्टोर की योजना बताती है।

मंजू कहती है अंजली भाभी बहुत अच्छी योजना है आप जल्दी ही इस पर काम करों, काॅलोनी से बाजार बहुत दूर भी पड़ता है।

मंजू यह भी कहती है कि मैं एक महिलाओं के समूह को जानती हूं जो लोन देती है मेरी गारंटी पर तुमको वहां से लोन दिलवा दूंगी,

साथ ही मकान के कागजात पर बैंक से भी किस्तो पर लोन मिल जाएगा।

फिर रात को फिर घर के सभी लोग एक साथ बैठकर चर्चा करते है तो अंजली मंजू भाभी के दिए प्रस्ताव को सभी को बताती है।

अंजली की बाते सुनते ही बेटी नव्या अंजली के गले लगते हुए कहती है कि मम्मी आप तो कमाल हो, मिनटो में पापा की समस्या का हल निकाल दिया,

साथ ही हम सब भी एक स्टोर वाले के नाम से जाने जाएगें। सचमुच में मां आप बहुत जीनियस हो।

उधर बेटा रवि अंजली की बाते सुनने के बाद कहने लगा मम्मी प्रस्ताव बहुत अच्छा है। रवि इस बीच घर के हाल को देखने नीचे पहुंच जाता है।

कुछ देर बाद सभी को आवाज लगाकर बुलाता है, और हाल में कैसे डिपार्टमेंटल स्टोर बनाया जा सकता है अपने इंजीनियर दिमाग लगाकर बताता है।

अंजली कहती है कि यह हुई न बात, रवि के पास दुकान का सामान लेकर आएगें, नव्या और रवि दुकान पर बैठेगें। मैं अपनी नई रेस्पी से पापड़, अचार, चिप्स आदि ताजा चीजे बनाउंगी।

जिसका स्वाद किसी के पास नहीं होगा। हर हाल में काॅलोनी तो क्या पूरे शहर के लोग हमारी दुकान पर आएगें।

रवि उसी दिन अपने कुछ दोस्तो से पैसा उधार लेकर घर में तोड़फोड़ करते हुए एक बढ़िया हाॅल बनाते हुए उसे अच्छा डेकोरेट करवा दिया।

उसके पापा महेश खुश होते हुए बोलते है कि मुसीबत में इंजीनियर बेटे ने घर में ही डिपार्टमेंटल स्टोर के लिए जगह निकाल दी है। नहीं तो एक किराए की दुकान तलाशना पड़ती।

अंजलि ने कहा आपकी बेटी नव्या भी कंप्यूटर का कोर्स कर रही है ग्राहकों को कंप्यूटर का बिल बना कर दे देगी।

उधर अंजली ने भी समूह से लोन उठाकर दुकान में सामान भर दिया।

आपका स्टोर्स के नाम से रवि व नव्या काॅलोनी में घर घर कार्ड बांटते है, आज अपना स्टोर्स का बेहतरीन तरीके से ओपनिंग हो गया।

अंजली उसी रात परिवार के लोगों से कहती है कि नव्या के पापा हम सभी साथ हो जाए तो परेशानी तो दूर उसकी हवा तक हमको छू नहीं सकती।

आज के बाद आप कभी मायूस मत होना।


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