कस्टडी
कस्टडी
बोलो बेटा किसके साथ जाओगे पापा के साथ की मम्मी के साथ"जज ने कांस्टेबल का हाथ पकडे हुए नन्हे मासूम निशांत से पूछा।
निशांत ने सर उठाकर एक बार जज व दूसरी बार अलग अलग खड़े हुए अपने माता पिता को देखा। "मुझे दोनों के साथ रहना है "निशांत रोते हुए बोला। "लेकिन बेटा आप को एक के ही साथ जाना होगा "जज साहेब बोले। किरण ने निशांत की दुविधा भांपते हुए उसके पास जाकर पुचकारते हुए कहा "बेटा मम्मी आपको बहुत प्यार करती है आप मम्मी के साथ चलोगे न "हाँ माँ लेकिन पापा वो हमारे साथ नहीं रहेंगे "निशांत बोल।
"नहीं बेटा अब मम्मी पापा अलग अलग रहेंगे "किरण बोली। जज ने फैसला सुनाते हुए कहा की" क्योंकि बच्चे की उम्र सात साल से कम है इसलिए उसकी कस्टडी माँ को सौंपीजाती है और प्रत्येक शनिवार को उसके पापा उसे तीन। घंटे के लिए बाहर ले जा सकते है "। "चलो बेटा "किरण ने निशांत की ऊँगली पकड़ते हुए कहा "निशांत किरण का हाथ छुड़ाकर दौड़ कर अपने पापा के पास गया और गले से लिपटकर रोने लगा।
सुधीर की आँखों में आंसू आ गए। "बेटा मैं आऊंगा न तुम्हारे पास "सुधीर ने नम आँखों से कहा। "चलो बेटा देर हो रही है "किरण ने लगभग निशांत को घसीटते हुए कहा। निशांत जोर जोर से रोने लगा और जोर से चिल्लाकर बोला "पापा जरूर आना"।
किरण और सुधीर की शादी को पांच वर्ष ही हुए थे और दोनों का प्रेम विवाह हुआ था। पेशे से दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे शादी के शुरू में सब ठीक था पर धीरे धीरे दोनों में छोटी छोटी बातों में झगडे शुरू हो गए जो बढ़ते ही चले गए। दोनों में अहम् का टकराव होने लगा और बात तलाक तक आ पहुंची। लेकिन मासूम निशांत जो महज चार साल का ही था दोनों से प्यार करता था। उसको नहीं समझ में आ रहा था की मम्मी पापा साथ क्यों नहीं रह सकते।
"मोंटी के मम्मी पापा तो साथ में ही रहते है फिर पापा हमारे साथ क्यों नहीं रह सकते है मम्मी "निशांत ने पूछा किरण ने डांटते हुए कहासो जाओ तुम अब बहुत रात हो गई है निशांत अगले दिन सो कर उठा और किरण से पूछने लगा मम्मी शनिवार कब है पापा कब आएंगे।
बेटा आज से चार दिन बाद "किरण बोली। निशांत बेसब्री से शनिवार का इंतजार करने लगा। शनिवार सुबह से ही निशांत अपने घर की बालकनी से झाँकने लगा पापा आएंगे " शाम को चार बजे के करीब उसे दूर से सुधीर आता हुआ नजर आया। "पापा आ गए पापा आ गए ख़ुशी से चिल्लाते हुए निशांत बोला। सुधीर आया और उसके हाथ में चॉक्लेट और खिलोने थे। " ये लो बेटा "सुधीर बोला और निशांत दौड़कर उसके गले लग गया। "पापा घूमने चलो "निशांत बोला। सुधीर उसको लेकर चला गया। निशांत बहुत खुश रहा पूरे दिन। लौटकर जब सुधीर जाने लगा तो वो रोने लगा। "में फिर आऊंगा बेटा "सुधीर बोला "
इसी तरह दिन बीतने लगे और निशांत बड़ा होने लगा। लेकिन जब उसकी समझ में आया तो और बच्चो के सामने उसे शर्म महसूस होती थी। "यार तेरे मम्मी पापा साथ नहीं रहते "गोलू बोला और बच्चो को देखकर उसको भी लगता था की मम्मी पापा साथ रहे साथ साथ घूमने जाये। एक दिन उसने पापा से कहा पापा आप हमारे साथ आकर रहो ना। "नहीं बेटा तुम्हारी मम्मी को अच्छा नहीं लगता है "सुधीर बोला। तुम्हारी कस्टडी मम्मी के पास है ना इसलिए। निशांत का बाल मन ये समझने में असमर्थ था की ये कस्टडी क्या होती है और ये कब ख़त्म होगी और कब वो मम्मी और पापा दोनों के साथ रहेगा।
