Bhawna Kukreti

Drama


4.2  

Bhawna Kukreti

Drama


"कोरोना लॉकडाउन-5(आपबीती)"

"कोरोना लॉकडाउन-5(आपबीती)"

8 mins 197 8 mins 197

सुबह के 5:30 हो रहे हैं,

मम्मी जी नीचे गेट खोलने गईं हैं, ये सहारनपुर जाने के लिए तैयार हो रहे हैं।पर मुझे लग रहा है की वो काम वाली नही आयेगी।

सवा सात हो गया है।मम्मी जी बहुत नाराज हैं ।लगातार बोले जा रही हैं। मुझे भी घुमा कर कह रही हैं।सब भर-भर समान उठा के दे देते हैं पर समय पर कोई काम नही आता है।इतना सीधा नही होना चाहिये।दुनिया तो चाहती ही है की बिना मेहनत कहीं से कुछ मिल जाय। अब कुछ नही देना है किसी को।

मन किस काम को लेकर निश्चिंत हो जाये और फिर अचानक ही सारा लभार आ जाये तो ऐसा होना स्वाभाविक ही है।अभी मम्मी जी की हालात बहुत खराब भी है।घुटने देर तक खड़े होने से सूज रहे हैं। दर्द भी हो रहा होगा।काम घर का पूरा है उपर से दोनो बेटों, परिवारों की चिंता। बेटे से कह रही हैं कुछ करने को वो झुंझलाने लगा है। गलती मेरी ही है ।न बेटे को ना इनको कभी काम मे हाथ बटाने को कहा।तो अब आदत नही है तो रोज उसी काम को नियम से करना बंधन और बोझ लग रहा है।वो आकर बिस्तर पर लेट गया है।लिखते लिखते उसे समझा भी रही हूं पर वो भी ऊब गया है कह रहा है की इस से अच्छा तो स्कूल खुला रहता , स्कूल जाता।

कोफ्त होने लगी है मुझे भी खुद के बिस्तर पर होने पर। ये थोड़ा राशन लेने गये थे,अब लौट आये हैं। कह रहे हैं की गुप्ता जी की वाइफ भावना को याद कर रहीं थी। अपना नम्बर दिया है कहा है की कोई जरुरत हो कॉल कर देगी।बेटा घर समान पहुन्चा देगा, और एक दो दिन मे कोई काम वाली भिजवा देंगी जो झाड़ू पोछा बर्तन खाना सब कर देगी। कह रहीं थी की अभी ऐसी ही काम वाली रखो जो सिर्फ तुम्हारे यहां काम करे।

मम्मी जी इनको नाश्ता करने के लिये कह रहीं हैं, इन्हे जल्दी निकलना है।ये बस सेब खा कर निकलना चाहते हैं, मम्मी ने डांट दिया है की सही से नाश्ता करो,नखरे मत दिखाओ। ये मेरी ओर देख कर डायनींग टेबल पर बैठे घड़ी दिखा रहे हैं और सर हिला रहे हैं।मैने चुप रहने का इशारा किया है चुपचाप थोड़ा खा लेने को कहा है।मम्मी जी चाय भी चढ़ा रहीं हैं।ये उठ गये हैं, मैने एक बार चूड़ी खनकाई है, इन्होने ध्यान नही दिया है ,घड़ी देख रहे हैं।चेहरे से लग रहा है की ये भी कुछ तनाव मे आ रहे हैं। मम्मी इनके लिये टिफिन भी रखना चाह रही हैं। ये मना कर रहे हैं की ये एक सेब और संतरा ले जा रहे हैं , जरूरत नहीं है।मम्मी अब बहुत नाराज हो रहीं है की तुम्हारे लिये बनाये है , वहाँ एक टाईम शुद्ध खा लोगे।इनके स्टाफ का फोन सुबह से ही आने लगा है की सर कहां पहुंचे।मीटिंग का समय होने वाला है।और ये अभी भी यहीं हैं, लगभग डेढ़ घन्टा लगेगा सहारनपुर पहुंचने मे।लाइव लोकेशन भी जाती है। उपर के लोग जरा भी रियायत नही दे रहे हैं । नीचे का स्टाफ शिकायत कर रहा है की वे जान जोखिम मे डाल कर रिपोर्टिंग कर रहे हैं और उनके एरिया की खबर अखबार मे नही ली जा रही है।इनकी परेशानी समझ आ रही है।

मम्मी जी को ये भी चिंता हो रही है की एक बेटा तो था ही फील्ड मे और ये दूसरा तब निकल रहा है जब सहारनपुर मे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।कह रही हैं वहां कमरे से बाहर न निकले।मैने फिर चूडियां दो बार खनकाई हैं।इस बार इन्होने तुरंत पलट कर देखा है।ये हमारा अरजेंसी का इशारा है। ये कमरे मे चले आए हैं।

आठ बज गये अब। मम्मी दवा का पैकेट लिये कमरे मे आई हैं।ये अपनी दवा भूल गये है।उनको समझाया है की वे वहां ले लेंगे।मम्मी जी को समय से दवा खानी है।हाँ मुझे भी तो समय से खानी है।आज सुबह की हडबडी मे खाली पेट खाने वाली दवा का तय टाईम निकल गया।अभी खा लूँ क्या? छोड़ो खा लेती हूं खाली पेट ही तो खानी है , सिर्फ चाय और एक बिस्किट लिया था 6 बजे । पेट तो वैसे हमेशा भरा भरा लगता है। छोड़ो झंझट ,खा लूंगी।

अभी वत्सप्प पर 9 बजे के करीब पापा का एक वीडीओ मेसेज देखा ।ईश्वर पर भरोसा बनाए रखने का। ग्रुप मे मेसेज दिया था की ये सहारन पुर निकले हैं।एडिटर ने इनको वहाँ रह कर वर्क फ्रॉम होम कहा है। जिस जिस सम्बंधी, परिचित को पता चल रहा है वे भावुक हो अमर उजाला के एडिटर को कोस रहे हैं। कह रहे हैं की अब तो इनका काम न्यूज़ मेनेजमेन्ट का है, वो घर से भी हो सकता था।सब लॉक डाऊन है।सारे अधिकारी मिलने से बच रहे हैं, फोन पर वीडियो कालिंग से निर्देश दिये लिये जा रहे हैं। सब नाराज हैं।मम्मी जी मन्दिर के आगे हाथ जोड़े खड़ी हैं " दुर्गा मैया दोनो बाबू लोगों की रक्षा करना।" मैं लेटी लेटी मन्दिर मे रखी मूरत को देख रही हूं।

10 बज गये हैं मम्मी जी बालकनी मे बडी देर से खड़ी थीं ।एक काम वाली को जाते देखा तो उसको आवाज दे कर बुला लाई थीं, वो तीनघर काम करती है। कल से 8:30 पर आया करेगी।बगल के घर मे आती है, रुपयों की जरूरत है,कह रही है" काम नही करूंगी तो कौन रुपया लुटायेगा।" मेरा दिल अब जैसे परिस्थितियों के बीच अबोध बच्चे सा खड़ा हो गया है।

इनका वीडियो कॉल आया था 11 बजे।अपने होटल रुम मे पहुंच गये हैं।अब वहीँ से काम करेंगे। बता रहे हैं हॉटेल में सब ठीक है ।प्रेकौशन अच्छा ले रहे है । इन को मिलाकर कुल 5 लोग हैं और सब नीचे रेस्टोरेंट में जाकर के खाना खाया करेंगे और वहां पर अच्छी व्यवस्था है सैनिटाइजेशन की ।लेकिन मेरा मन नहीं मान रहा है अभी तो जब वहां के स्थानीय लोगों को अधिकारियों को पता चलेगा कि यह पहुंच चुके हैं तो कोई ना कोई मिलने आएगा। मेरे मन में डर है कि पता नहीं वह संक्रमित होगा या स्वस्थ होगा । मैं अपने मन का बताने लगी थी, देर तक सुनते रहे फिर बोले "अब पहले ये बताओ तुमने दवा खाई?" फिर आखिर में बोले " मुझे ध्यान है कि तुम बेटा और मां वहां अकेले हो , तुम लोग अपना ख्याल रखोगे तो मै यहां रिलैक्स रहूंगा और जैसा तुम चाह रही हो वैसे ही सतर्क रहूंगा जरा भी चिन्ता न करो"। तकनीकि इसी वजह से कभी कभी अच्छी लगती है। अपने एक दूसरे के चेहरे, आवाजे देख सुन पाते है।अब बेटा आ गया है , उसे मोबाइल पर गेम खेलना है।

अभी शाम 6:12 पर मेल आयी, लिंक भेजा गया है।ओपन माइक पोएट्री वाला, पहला प्रयास था तो ठीक ठाक लगा। एक कविता तो बैकग्राउंड के डिस्टर्बेंस में खो गयी । छोटी वाली साफ थी।सिर्फ इनको भेजा है, आखिर इन्होंने ही तो सब किया। इन्होंने अभी देखा नही है,व्यस्त होंगे। मम्मी जी ने टी वी आन किया है, दिल्ली के निजामुद्दीन में 200 संदिग्ध कोरोना पेशंट मिले है, दरगाह गए थे बाता रहे थे। बस हो गया बंटा धार सबका।सच,अब मुझे डर नही गुस्सा आने लगा है। और ये बीबीसी , इसे भारत से कोई दुश्मनी है क्या? जब देखो तब वो खबर लाएगा जिस से भारत की छवि खराब हो, अच्छा नही है क्या इस देश मे कुछ या अभी भारत के लिए वही औपनिवेशिक सोच बनी हुई है इसकी।यार बातों में अब मैं भी कहाँ से कहाँ जा रही हूँ ।मम्मी जी गर्म पानी ले आयी हैं ,कुछ दिन से गले मे खराश है, आज गले मे कुछ कफ जैसा अटका सा लग रहा है। कल देर रात मेरी रीना से बात हुई थी वो और उसके हस्बैंड कह रहे थे कि इस दैरान किसी भी बात को गंभीरता से लो। तो कल रात मैने गार्गल किया। वहमी दिमाग में आ रहा है कि कोरोना तो नही होगा न , क्योंकि MRI के लिये गयी थी तो वहां गंदे एप्रन छूए थे , पता नहीं MRI मशीन का जो रैग्जीन का बेड था वो सनीटाइज़ था भी की नहीं? और जो दवाएं चल रही हैं उसमें पैरासिटामोल है, तो बुखार का पता तो चलना नही और गले मे खराश और पेट थोड़ा गड़बड़ है।

शायद ज्यादा ही सोच रही हूँ।

8:22 हो रहा है। स्कूल में एक एजुकेशनल एक्टिविटी कराई थी, लेटे लेटे मोबाइल पर उसका एक वीडियो बना डाला है और एक दो जगह शेयर भी कर दिया। एक अरविंदो सोसाइटी संस्था है उसके FB ग्रुप में भी डाल दिया ,डिटेल के साथ। इसके अलावा कुछ एक साइट पर कुछ कुछ लिख दिया है,और क्या करूं अब? ये बिज़ी होंगे नही तो इनको वीडियो कॉल करती। कुछ एक दोस्तों से बात करने का बड़ा मन है पर छोड़ो, सब हंसी खुशी अपने परिवार में हैं क्या डिस्टर्ब करना। हां, एक मैंम ने अपनी माँ की याद में कविता लिखने का आग्रह किया था उनके लिए कविता लिखी थी । आज उनको शेयर कर दी। जीवन मे काफी सालों बाद ऐसा किया है । स्कूल में थी तो सहेलियों की फरमाइश पर दो दो लाइन लिखती थी।फिर कोचिंग में एक थी सौम्या, वो मुझसे कोट लिखवाती थी और कलेक्शन करती थी।उनका जाने क्या करती थी पर कहती थी कि उसे मेरे कोट अच्छे लगते हैं।

9 बज गए हैं , बेटा स्कूल से मिले असाइनमेन्ट में बिजी है। मम्मी जी मेरे लिए खाना ला रही हैं। अब खाना खा कर, इनसे बात कर सोने की कोशिश करूँगी,जाने क्यों चार पांच दिन से कहती तो हूँ कि सोने जा रही मगर नींद नहीं आती।सारी रात जगी रहती हूँ। आज तो यार जैसे भी हो सो ही जाउंगी।


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