किश्मत का लिखा हुआ - एक सच्ची कहानी !
किश्मत का लिखा हुआ - एक सच्ची कहानी !
एक सच्ची कहानी !आज से लगभग 130 साल पहले एक आदमी नानाजी हर रोज सुबह 4 बजे फज़र मैं उठकर एक आउट इलाके की दरगाह पर प्रतिदिन जाया करते थे और उस आउट इलाके की दरगाह पर आजान देकर प्रतिदिन नमाज़ अदा किया करते थे और इसी महनत की वजह से उनको फकीरी मिली और फकीरी मैं उनको एक अनमोल चीज़ मिली जो की एक एसी अनमोल चीज़ थी की अगर लोहे पर घिस दी जाये तो लोहा सोना बन जाये तो नानाजी काफी ज्यादा खुश हुए ! हुआ यह की उस अनमोल चीज़ को नानाजी अपने घर ले आये और अपने कमरे मैं एसे ही रख दी लेकिन अपने किसी घर वालो को उसके वारे मैं नहीं बताया जब वह घर पर नहीं थे तब उनके घर की किसी लेडिस ने उनके कमरे की सफाई करने के दोरान उन अनमोल चीज़ को घास फूस समज कर फेक दिया जब नानाजी घर बापस आये तो उस अनमोल चीज़ को अपने कमरे मैं नहीं पाया तब पता चलने पर उनको यह पता चला की उस अनमोल चीज़ को उनके घर की किसी लेडिस ने सफाई के दोरान फेक दिया है तो वह बहुत तंग रह गए और घर वालो को सारी बात बताई की केसे वह अनमोल चीज़ लोहे को सोना बनाने की ताकत रखती है तो सारे घर वाले हेरान रह गए लेकिन अब वह अनमोल चीज़ कूड़े मैं जा चुकी थी इसी को कहते है किश्मत का लिखा हुआ ! इस कहानी को कोई झूटी कहानी नहीं समझना !
