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खाकी रंग

खाकी रंग

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हर तरफ होली का हुड़दंग और हर्षोल्लास था। सड़क पर होली है चिल्लाते लोगों की आवाज़ थाने के अंदर भी सुनाई पड़ रही थी।

इस समय एसएचओ कामिनी गुप्ता ड्यूटी पर थी। हवलदार बीना सिंह उन्हें अपने बचपन के किस्से बता रही थी।

"क्या बताऊँ मैडम मुझे होली का कितना क्रेज़ रहता था। इतना रंग खेलती थी कि अगले चार पाँच दिन तक मुंह लाल नीला नज़र आता था।"

एसएचओ कामिनी ने कहा,

"पर अब तो होली खेल नहीं पाती।"

"हाँ अब ड्यूटी रहती है। पर कोई बात नहीं दिल से अभी भी होली का मज़ा लेती हूँ। घर से मम्मी ने गुझिया बना कर भेजी थीं। साथ लाई हूँ। खाएंगी।"

कामिनी कुछ बोलती तब तक एक भीड़ थाने में घुसी। दो लोगों ने एक आदमी को पकड़ रखा था। वह आदमी नशे में था। ऐसा लगता था कि उसकी पिटाई भी हुई है। साथ में एक औरत थी। वह बोली,

"मैडम मुझे इसके खिलाफ रिपोर्ट लिखानी है।"

उसने नशे में चूर आदमी की तरफ इशारा कर कहा,

"ये मेरा पड़ोसी है लल्लन प्रसाद। इसने मेरे साथ छेड़खानी की है।"

कामिनी ने लल्लन को डांटते हुए कहा,

"क्या बात है। नशा करके औरतों को छेड़ते हो।"

लल्लन ने सफाई देते हुए कहा,

"मैडम छेड़ नहीं रहा था। रंग लगाने गया था। थोड़ी दिल्लगी कर दी तो ये नाराज़ हो गई।"

"अभी एक झापड़ पड़ेगा तो नशे के साथ दिल्लगी भी गायब हो जाएगी।"

उसी वक्त एक दूसरी औरत थाने में दाखिल हुई। कामिनी से विनती करने लगी।

"मैडम ये मेरा पति है। नशे में इससे गलती हो गई। माफ कर दीजिए। वैसे भी इन लोगों ने जम कर धूना है इसे।"

शिकायत करने वाली औरत चिल्लाई।

"मारते नहीं तो क्या करते। रोज़ निकलते बैठते परेशान करता है। आज होली के बहाने हद पार कर दी।"

"अब मेरा मुंह मत खुलवाओ...."

लल्लन की पत्नी कामिनी की तरफ देख कर बोली,

"मैडम ये रिश्ते में मेरे पति की भाभी लगती है। पहले दिन में दस बार हमारे घर के चक्कर लगाती थी। हंस हंस कर मेरे पति से बात करती थी। ना जाने किस बात पर ये और इसका खसम नाराज हो गए। अब बेकार की बातें करती है।"

शिकायत करने वाली औरत कुछ कहने वाली थी तभी कामिनी ने डांट दिया। 

"चुप करो तुम दोनों। ये थाना है।"

लल्लन की पत्नी ने अपना स्वर बदलते हुए शिकायत करने वाली औरत से कहा,

"अच्छा मैं अपने पति की तरफ से माफी मांगती हूँ। त्यौहार के दिन ये थाने में रहें ठीक नहीं है। माफ कर दो। शिकायत वापस ले लो।"

कुछ देर तक उन दोनों के बीच बातचीत चलती रही। लल्लन को लेकर आए दोनों आदमी चुप खड़े थे। अंत में शिकायत वापस ले ली गई। कामिनी ने लल्लन को डांटते हुए कहा,

"अगर अपनी हरकतें नहीं सुधारीं तो बहुत बुरा होगा।"

सबके जाने के बाद बीना ने पूँछा,

"मैडम आप भी बचपन में मेरी तरह होली खेलती थीं।"

कामिनी सिर्फ हल्के से मुस्कुरा दी। उसे चार साल पहले की होली याद आई। उसके पति एसपी राजेंद्र गुप्ता के साथ वह उसकी अंतिम होली थी। उस दिन वह जल्दी ही उठकर राजेंद्र के उठने की प्रतीक्षा करने लगी। राजेंद्र जब उठकर आए तो उसने पीछे से जाकर चुपके से उनके चेहरे पर गुलाल मल दिया। राजेंद्र ने भी गुलाल की पूरी प्लेट उस पर उड़ेल दी थी।

उस दिन शाम को राजेंद्र का शव घर आया था। होली के हुड़दंग में दो गुटों के बीच झगड़ा हो गया। गोलियां चलने लगीं। बीच बचाव के लिए गए राजेंद्र को एक गोली लग गई। 

राजेंद्र के जाने के बाद कामिनी ने यूपीएससी आईपीएस कैडर का इम्तिहान पास कर यह वर्दी पहनी। अब खाकी उसका सबसे पसंदीदा रंग है।

बीना ने उसे उसके विचारों से बाहर निकालते हुए कहा,

"मैडम एक रिक्वेस्ट है।"

"क्या ?"

"मैं एक पुड़िया में गुलाल लाई हूँ। थोड़ा सा लगा दूँ।"

कामिनी ने हामी भर दी। बीना ने उसे एक टीका लगा दिया। कामिनी ने भी थोड़ा सा गुलाल उसके गाल पर लगा दिया।


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