Win cash rewards worth Rs.45,000. Participate in "A Writing Contest with a TWIST".
Win cash rewards worth Rs.45,000. Participate in "A Writing Contest with a TWIST".

amar singh

Tragedy


4.0  

amar singh

Tragedy


जंगल की आग

जंगल की आग

8 mins 225 8 mins 225

यह कहानी है एक छोटी सी चिंगारी की जो जंगल के बीच किसी अंजान यात्री द्वारा कहीं जलाई गई जिसके बाद फिर वह चिंगारी कब पूरे जंगल को जला देने का कारण बनी, असंख्य वन्य जीवों का काल बन उन्हें लील गई। यह कहानी अनेक प्रश्न खड़े करती है। उस चिंगारी को लेकर, जलाने वाले उस मुसाफिर को लेकर और उन असंख्य जीवों को लेकर, जिसके निष्कर्ष का निर्णय मात्र पाठक ही कर सकते हैं कि आखिर एक चिंगारी आखिर क्या कर सकती है।

बात उस समय की है। जब तरूण अपनी तरूणावस्था को पार कर ही रहा था कि न जाने कब उसे क्या सूझी क्यों न किसी रोमांचक यात्रा पर जाया जाये। अंजान रास्तों पर अनेकों चुनौतियों का सामना करते हुए जाने का रोमांच ही कुछ अलग होता है। इण्टरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद दो महीनों की छुट्टियों को बिताने का यह आइडिया तरूण को एक फिल्म देखकर आया था। उसने अपने तीनों मित्रों को तुरन्त फोन किया और उन्हें इस यात्रा के बारे में बताया कि क्यों न इस बार कुछ अलग किया जाये? शहर से कुछ ही दूर करीब 50 किलोमीटर पर एक जंगल था जिसके चारों ओर वन विभाग ने कांटेदार बाड़ लगाई हुई थी और बाहरी किसी भी व्यक्ति का जंगल के अंदर जाना बिल्कुल मना था। तरूण ने अपनी इस रोमांचक यात्रा के बारे में अपने तीन दोस्तों को जो उसके ही हमउम्र थे, वह पहले तो थोड़ा झिझके लेकिन तरूण के पूरे प्लान को सुनकर उनकी भी आंखों में चमक आ गई और वो भी उसके साथ जाने को तैयार हो गये।

सुबह मौसम अन्य दिनों की अपेक्षा थोड़ा अधिक गर्म था लेकिन यह बात तरूण, मुकेश, राकेश और पियूष के लिए और अधिक अच्छी थी। गर्म मौसम को देखते हुए चारों ने तय किया कि क्यों न वह मोटरसाइकिल के द्वारा अपनी इस यात्रा पर चलें। दो मोटरसाइकिल पर चारों मित्र बड़े ही आराम से यह यात्रा कर सकते थे। रात वहीं जंगल में बिता कर फिर अगले दिन घर लौट आने का विचार था। जंगल के सफर के लिए आवश्यकतानुसार सभी चीजें जिसमें शिविर लगाने के लिए टेंट, कुछ औजार और हथियार, खाना बनाने के लिए कुछ बर्तन, बीयर की बोतलों का स्टाॅक लेकर वह चारों जंगल के सफर को चल पड़े।

वह जैसे-जैसे जंगल के निकट पहुंचने लगे रास्ते में उन्हें वन विभाग द्वारा लगाये गये बोर्ड द्वारा निर्देश दिखने लगे जिसमें वन्य सुरक्षा संबंधी अनेकों सुझाव लिखे थे लेकिन वह उन सब को नज़रअंदाज़ करते हुए ऐसे स्थान को तलाश रहे थे जहां से वह बिना किसी के नजर में आये वन के भीतर प्रवेश कर एक ऐसे वन के भीतर के नज़ारे का आनन्द ले सकें। जहां किसी भी मानव का अन्दर प्रवेश करना सख्त मना है। आखिर यही तो तरूण का रोमांचक आइडिया था। जहां पर आमजन का प्रवेश निषिद्व हो, वहीं पर जाने का रोमांच ही कुछ अलग होगा। बिना किसी के नजर आये वह वन में प्रवेश कर गहराई में अंदर तक जायेंगे वहीं कोई छोटा-मोटा शिकार कर रात बिता कर आ जायेंगे। लेकिन आगे जंगल में प्रवेश करने के बाद क्या होगा यह तो उनकी समझ से बाहर था और भविष्य की परतों में क्या छिपा होगा यह कोई नहीं जानता था।

मुख्य सड़क पर चलते-चलते रास्ते में एक सूखी नदी मिली जो जंगल के बीचों-बीच से गुजरती थी। चारों ने सोचा क्यों न इस नदी के रास्ते से जंगल में प्रवेश किया जाये और कुछ दूर जाकर फिर जंगल में प्रवेश कर लिया जाये। दोपहर का समय हो चुका था। सीधी धूप सिर पर लगती हुई चारों को गर्मी से बेहार किये थी। नदी के रास्ते जंगल में प्रवेश करते ही वह जंगल के अंदरूनी भागों में जाने लगे। गर्मी से चारों के गले सूख चले थे। तभी तरूण बोला-क्यों न यहीं थोड़ी देर रूका जाये और गर्मी में ठंडी बीयर से जो अब तक गर्म हो चुकी थी उसे से ही थोड़ा गला तर कर लिया जाये। फिर देखते हैं आगे क्या करना है। चारों वहीं जंगल में बड़े आराम से बैठने का इंतज़ाम कर वहीं खाने पीने लगे। कुछ देर में जंगल से कुछ अजीब सी आवाज़, जो शायद किसी के चलने की आवाज़ थी, सुनाई थी। मुकेश बोला-यार तुमने कुछ सुना, कोई आवाज़ आई। राकेश बोला-कुछ नहीं है, शायद तुम्हारे कान बज रहे हैं, या नशा हो गया है। तभी वह आवाज़ करीब से तेज आने लगी जिससे एकाएक चारों चैकन्ने होकर तुरन्त खड़े होकर इधर उधर देखने लगे कि यह आवाज़ किसे और से आ रही है और किसकी आवाज़ है। कहीं यह वन विभाग के कोई अफ़सर तो नहीं, नही तो बहुत मुसीबत हो सकती है। जल्दी से वह पेड़ों के पीछे छिप गये और आवाज की ओर देखने लगे। जैसे-जैसे आवाज़ और पास आती गई तभी सामने से एक झाड़ी हिलती हुई दिखाई पड़ी और फिर एकदम शान्त हो गई। चारों कुछ देर उस ओर देखते रहे कि आखिर वहां क्या है लेकिन कुछ भी हरकत न होने के कारण वो समझ गये कि वहां कुछ भी नहीं है कोई छोटा-मोटा जानवर होगा जो चला गया होगा। इतना कहकर तरूण जैसे ही बाहर निकलने लगा पियूष ने एकाएक उसे रोकते हुए कहा रूको वहां कोई खतरनाक जानवर भी हो सकता है। वह अपने साथ सुरक्षा एवं शिकार हेतु एक धारदार तेज बड़ा चाकू ले आया था। पियूष कहने लगा तुम तीनों यहीं रूको मैं देखता हूं, अगर कोई ख़तरा हुआ तो मैं तुम्हें इशारा करूँगा। पियूष जिसे पहले भी शिकार का अनुभव था और तीनों की अपेक्षा शारीरिक रूप में अधिक सुदृढ़ भी था। राकेश बोलने लगा नहीं तुम मत जाओ, मैं आगे बढ़कर देखता हूं, यदि कोई जंगली जानवर हुआ तो मैं भागकर पेड़ पर चढ़ जाउंगा और तुम पीछे से घात लगाकर मार सकते हो।

पेड़ के पीछे से राकेश हाथ में लाठी लेकर धीरे-धीरे झाड़ियों की ओर आगे बढ़ने लगा। जंगल में एकदम सन्नाटा सा छा गया था। राकेश को अपनी दिल की धड़कन बड़ी तेजी से सुनाई देने लगी लेकिन अपने डर पर काबू करते हुए वह बड़ी ही सावधानी से बिना कोई आवाज़ किये उस और बढ़ने लगा। डण्डे से जैसे ही उसने झाड़ियों को हटाया तो अचानक से एक बहुत तेज टक्कर उसके बांयी ओर से उसकी टांगों पर लगी और वह हवा में झिटकते हुए जमीन पर गिर पड़ा, उसकी टांग से खून बहने लगा जिस पर सींग का वार किया गया था। जैसे ही उसने पलटकर देखा एक जंगली सुअर उसकी ओर बड़ी तेजी से हमलावर मुद्रा में भागा चला आ रहा था। पेड़ पर चढ़ना तो दूर अब राकेश का दिमाग कुछ भी निर्णय लेने की स्थिति में न था और वह बहुत तेजी से चीखा। बचाओ।

पियूष बड़ी तेजी से भागता हुआ सूअर का ध्यान बंटाने के लिए उसके पीछे से हमलावर मुद्रा में चाकू से वार करने लगा। यह देख तरूण और मुकेश भी रस्सी और छूरे की सहायता उस जंगली सूअर पर एक साथ वार करने लगे किन्तु इस बीच पीयूष को भी बहुत गहरी चोटें लगी और वह जंगली सूअर उनके हाथ से निकल जंगल की ओर भाग निकला। थोड़ी देर चारों एक दूसरे की ओर भय से देखते ही रहे और किसी तरह अपनी चोटों को पानी से धोकर जो वह अपने पीने के लिए लाये थे। किसी प्रकार पट्टी कर शान्त बैठ गये। जंगल में अक्सर ऐसा ही होता है कभी शिकार शिकारी बन जाता है और कभी शिकारी शिकार। यह बात उन चारों को अब समझ में आ चुकी थी कि वास्तव में जिन्दगी इतनी आसान नहीं होती जितनी अक्सर हम समझते हैं। जो हम सोचते हैं, कई बार वह मात्र कल्पनाएं ही होती हैं। अभी तो वह मात्र जंगल में कुछ ही दूर तक आये थे, जिनमें उनका सामना एक खतरनाक सूअर से हुआ था। ऐसे अनेको खूंखार जानवर जो जंगल के इन अनजान रास्तों में उनका इन्तजार कर रहे थे। यह सोच कर उन्होंने फैसला किया कि अब वह रात इस जंगल में नहीं बिताने वाले, अब वह तुरन्त कुछ खाना बना और खाकर रात होने से पहले-पहले ही घर की ओर निकल जायेंगे। कुछ हल्का बनाकर ही उन्होंने काम चला पेट भर निकलने की सोची और थोड़ी ही देर में वह चारों अपना सारा सामान समेट कर वापिस अपने घर की ओर लौट गये।

अगली सुबह पीयूष सुबह घर पर नाश्ता करते हुए टेलीविजन को ओंन किया तो न्यूज आ रही थी कि पास ही के जंगल में भयानक आग लग गई है जो पिछले दिन किसी अनजान कारण से न जाने कैसे लग गई। जिसके कारण लाखों जानवर और वन जलकर स्वाहा हो गये। इस आग को बुझाने के लिए सरकार बड़े स्तर पर कार्य कर रही है। लाखों रूपये इस आग को बुझाने हेतु लगाये जा रहे हैं हजारों सुरक्षाकर्मी लगे हुए हैं लेकिन जंगल की यह आग रूकने का नाम ही नहीं ले रही। इस आग से निकले धुएँ से शहर का पूरा वातावरण प्रदूषित होने के कारण आम जनता को भी मास्क लगाने की सलाह दी गई और स्थिति पर जल्द से जल्द काबू पाने का वायदा किया। 

यह सब सुनने के बाद पीयूष मन ही मन खुद को कोसने लगा कि एक रोमांच के कारण उसने कितना बड़ा नुकसान कर दिया। आखिर हम कब सुधरेंगे? कब हम अपनी और अन्य जीव जन्तुओं की सुरक्षा के लिए बनाये गये नियमों को तोड़ना, रोमांच न समझकर इन नियमों का पालन करना अपनी जिम्मेदारी समझेंगे? नियमों को तोड़ना तो आसान है लेकिन उनके दुष्परिणामों से बच निकलना बहुत ही कठिन है। आखिर एक चिंगारी सम्पूर्ण जंगल को जला सकने में सक्षम है।


Rate this content
Log in

More hindi story from amar singh

Similar hindi story from Tragedy