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एम एस अजनबी

Romance


2.5  

एम एस अजनबी

Romance


जीना सीखा दिया

जीना सीखा दिया

11 mins 483 11 mins 483

गर्मी का महीना, दोपहर का वक़्त था मैं ऑफिस में था उसी दौरान एक फोन आया।

मैंने फोन उठाया, हैलो कौन ?

आप शिव बोल रहे हैं.. 

हाँ, बताएं आपने कैसे कॉल किया ? 

काम तो तो कोई नहीं सिर्फ आपसे बात करनी है।

ओके जी, आप मुझे कैसे जानते है मेरा नंबर कैसे मिला

आप पहचानिए हम कौन है

मैं ऐसे कैसे कह सकता हूँ की आप कौन है कुछ हिंट दीजिये।

आपने ही अपने नम्बर में फोन करने को कहा था एक दिन

ओह तो आप भाभी के फोन पर जो काल की थी वो हैं आई ऍम राईट।

हाँ, 

आपका नाम

मेरा नाम सुभी है एक शादी में मिले थे हम। कुछ औपचारिक बातें करने के बाद फोन रख दिया।

धीरे धीरे हम लोगों की प्रतिदिन बाते होने लगी।..........

 हम दोनों की बातें अक्सर शाम के वक़्त होने लगी। इन दिनों सुभी के मैसेज पढ़कर कभी कभी मुझे शक होता की शायद ये लड़की मुझे प्रसंद करने लगी है। 

इस तरह कई महीने गुजर चुके थे एक दिन फोन पर सुभी ने अपने प्यार का इजहार कर दिया। 

मैंने इस बात के लिए कभी सोंचा भी नहीं था। सो बिना कुछ कहे फोन काट दिया।

दुबारा न तो सुभी का फोन आया और न ही मैंने किया।

कई दिन बाद सामान्य रूप से हमारी फिर से बात होने लगी। एक दिन अचानक सुभी ने फिर सवाल किया शिव आप मेरे को प्यार नहीं करते न करो पर मेरे से दोस्ती करने में क्या हर्ज है

सुभी इस बारे में अभी बात करने का मूड न है मेरा।

ओके शिव, हम इंतज़ार करते हैं....

सुभी हमेशा दोस्ती के लिए कहती। मैं हमेशा बात टाल जाता।

एक दिन मैंने समझाया, सुभी मैं लडकियों से दोस्ती नही करता। 

इसके बाद सुभी ने इस बारे में कभी बात नहीं की...... 

लेकिन एक दिन..

 मैं अपनी सहपाठी अमिता से बात कर रहा था। इसी दौरान सुभी का वेटिंग में काल आया। 

आमतौर पर मैं सबसे 1 या 2 मिनट बात करता था पर आज मेरी बात अमिता जी व् उनके पति से लगभग 10 मिनट तक हुई।

खाली होकर जब मैने सुभी को काल किया

उत्सुकतावस सुभी ने पूछ लिया, शिव आज आपने इतनी देर तक बात की। किससे बात हो रही थी ?

जिस सहजता से सवाल वैसा ही जवाब दिया अमिता से। सुभी को मेरे परिवार के व् अधिकतर दोस्तों के नाम पता थे सो

ये कौन है ?

मेरी दोस्त 

सुभी गुस्से से, तो मेरे से दोस्ती करने में क्या हर्ज है।

काफी देर बहेश होने के बाद सुभी ने रोते हुए फोन कट कर दिया।

अब सुभी बोलती की मेरे में वो कमी बता दो जिसकी वजह से दोस्ती नहीं करना चाहते। मैं कभी ये बात नहीं करुँगी।

मेरे पास कोई जवाब न होता

दिन बीतते गए। इस बात को लेकर वो बहुत रोती और एक दिन...

शिवा आज के बाद मैं आपसे दोस्ती करने को न कहूँगी। 

दिन बीतते गए ......

फिर 

 दिवाली का दिन था रात 10 बजे होंगे। मैं दोस्तों के साथ खेतों में घूम रहा था आज मैं बहुत ही असमंजस में था क्योंकि आज फिर से सुभी को दिन में फोन पर रोते हुए सुना था।

मैंने सुभी को फोन किया

हेलो सुभी.... हाल चाल पूछने के बाद मैंने कहा।

सुभी मैं आपसे दोस्ती करने को तैयार हूँ........

शिव मुझे आपसे दोस्ती नहीं करनी और गुस्से से फोन कट कर दिया।

मैंने दुबारा फोन करना उचित नहीं समझा।

लगभग 30 मिनट बाद सुभी का फोन 

हाँ सुभी क्या हुआ..

लगभग रोते हुए....शिव मैं आपको दोस्ती के लिए न कैसे कर सकती हूँ जिसके लिए मैं आपसे लडती थी तरसती थी आज वो ख़ुशी मिली तो मैं न कैसे कर सकती हूँ।

अब वो बहुत खुश थी खुश तो मैं भी था सुभी को खुश पाकर।

इस तरह हमारे हँसी ख़ुशी से दिन बीतने लगे।

हमारी शाम को प्रतिदिन एक दोस्त की तरह बात होती थी पर सुभी के मन में मेरे प्रति प्यार व्याप्त हो चुका था 

एक दिन शाम के वक़्त- शिव कभी तो हमें भी थोडा प्यार दे दिया करो किसके लिए बचा के रखे हो

मैं समझा नहीं सुभी

अरे कभी कभी हमें भी फोन में ही किस विस दे दिया करो थोडा प्यार कर दिया करो इतना तो हक हमे भी है।

शिव ने बात बदलनी चाही, पर..सुभी आज जिद पर थी और हाँ में ही जवाब सुनना चाहती थी। 

शिव की ओर से कोई जवाब मिलता न देख बोली मुझमे कोई कमी है इसी लिए आप मुझे प्यार नहीं करते। क्या कमी है यही बता दो।

सुभी आपमें मुझे कोई कमी नजर नहीं आती।

सुभी का जन्मदिन नजदीक था फोन पर सुभी ने शिव से कहा..... मेरा जन्मदिन का गिफ्ट आपसे "किस के साथ विस" होगी।

जन्म दिन की सुबह.....फोन पर

सुभी जन्मदिन मुबारक हो

थैंक यू शिव, लेकिन मुझे आपसे "किस के साथ विस" ही चाहिए।

शिव की तरफ से कोई उम्मीद न देख सुभी गुस्से से बोली अब तो मुझे किस फोन पर नहीं सीधे ही चाहिए और फोन कट....

शिव ने वक़्त की नजाकत के हिसाब से सिर्फ मौन रहना उचित समझा।

शिव को सब प्रसंद था पर किसी की आँखों में आँसू नहीं।

शाम के वक्त..

शिव ने सुभी को काल किया

सुभी ...बोलो शिव क्या बात है

सुभी मुझमे क्या ऐसा खास है जिसकी वजह से आप मेरे से इतनी नजदीकियां बढ़ा रहे हो मुझे नहीं लगता मैं कहीं से भी आपके लायक हूँ न मैं दिखने में इतना खूबसूरत, न बहुत पैसे वाला फिर..

जानती हूँ, यू नो शिव, मेरे अनुसार जब एक लड़की, जो सच में किसी को दिल से चाहती है तो न तो उसे बहुत पैसे की चाह होती है और न ही बहुत खूबसूरत चेहरे की।

रही बात मेरी तो मुझे जो भी चाहिए वो सब गुण आपमें हैं और सच कहूँ तो मैं खुद आपके लायक न हूँ। जानते हो शिव मैंने आपसे प्यार किया आपकी दौलत और चेहरे से नहीं।

आपका व्यक्तित्व ऐसा है जो मैं आपकी ओर अनायास आकर्षित हो गई हूँ। शिव आपने हमेशा मुझसे कहा की मैं शायद वो खुशियाँ आपको न दे पाऊँ जिनका सपना तुमने सँजो रखा है पर सच ये भी है आपके सामने आपके गुणों के सामने मेरे सारे सपने कोई मोल नहीं रखते। मेरा विस्वास है जितना आपको समझा है मेरे सपने मुझे मिल जायेंगे।

इस दुनिया में चेहरे सुन्दर बहुत मिल जाते हैं पर दिल सुन्दर मिल जाये ऐसा मुस्किल से होता है।

और जिसका दिल इतना सुन्दर हो जिसकी सोंच इतनी सही हो उसके साथ रहकर मेरे सपने अधूरे रह जाएँ हो ही नहीं सकता। शिव आपके साथ रहकर भले ही मुझे पैसे का सुख न मिले पर विस्वास और प्यार भरपूर मिलेगा। फिर हम दोनों मेहनत करेंगे तो हमारी जरूरतों की पूर्ति में कोई कमी नहीं होगी।

हमारा छोटा घर होगा छोटी गाड़ी होगी पर दिल से खुशियाँ ही खुशियाँ होंगी और क्या चाहिए मुझे।

शिव अब हम सोने जा रहें है आप भी ज्यादा मत सोंचो और कल बात करते हैं

शुभ रात्रि शिव

शुभ रात्रि सुभी

और फोन कट हो गया

शिव सोच में डूब गया...कब नीद आ गई पता ही न चला...

सुबह जब शिव की नीद खुली तो शरीर साथ न दे रहा था न चाहते हुए आज शिव आफिस गया.....

अब शिव का सुभी से बात करना तो होता पर मन से नहीं। लेकिन इस बात का अहसास सुभी को नहीं हो पाया.

2 दिन बाद, आज शिव् की छुट्टी थी आफिस में, वह घर ही था 1 बजे के लगभग सुभी का फोन आया।

हेलो शिव कहाँ हो

घर पर हूँ क्यों क्या हुआ।

सुभी- घर पर ही रुकना हम आपसे मिलने आ रहे हैं। 

शिव- अचानक, कोई काम 

सुभी- हाँ, अपनी किस लेने आ रही हूँ क्योंकि तुम आओगे नहीं देने

शिव- मत आओ सुभी सही न है ये..

सुभी- क्या सही न है शिव ? गलत, सही मुझे पता है। आपने हाँ बोला था किस के साथ विश के लिए फिर मुकर न सकते।

सुभी वक़्त तो निकल गया वो दिन गुजर गया...

सुभी गुस्से से- शिव मैं आ रही हूँ 

शिव कोई जवाब दे पता जब तक इधर फोन कट हो गया।

शिव सोच में डूब गया.....

कैसी जिद्दी लड़की है कुछ समझती ही नहीं दोस्ती कर ली तो अब जबरन प्यार की तरफ बढ़ रही है। 

कैसे इस लड़की को समझाऊँ, कुछ सुनती ही नहीं.....

तकरीबन 1 घंटे बाद सुभी शिव के घर पहुँच गई।

तब शिव सोंच से वर्तमान में आया

हाय शिव

शिव कुछ न बोला

इत्तेफाक से आज घर पर शिव के अलावा कोई न था 

सुभी- इतना गुस्सा आपको कब से आने लगा

शिव- सुभी गुस्सा न हूँ पर आप मुझे और मेरे विचारों को न समझ रही हो। इस बात का दुःख है ।

सुभी- शिव आपको किस बात का डर है की मुझे आपसे प्यार न हो जाये। अरे ऐसा न है तुम चिंता न करो।

और तुम्ही बताओ शिव जिसे मैं अपना दोस्त मानती हूँ फिर ऐसा दोस्त जो हमेशा सही राह दिखाता है उसे प्यार से एक किस करना या पाना गलत है क्या ? 

अब शिव के पास कोई जवाब न था क्या कहता कुछ न बोल सका।

सुभी ने मौके का पूर्ण फायदा लिया और शिव के होठों पर किस कर दिया।

शिव् इस स्पर्श से अन्दर तक हिल गया

शिव अब तुम मुझे किस करो 

प्लीज.......

शिव कुछ तो बोलो इस तरह से चुप मत रहो

कोई जवाब न पाकर सुभी ने शिव को हिलाया...

हाँ सुभी

शिव किस करो न 

पर शिव की हालत तो ऐसी थी जैसे जान ही न बची हो बिलकुल जड़वत

इधर सुभी खुश थी अपनी जीत पर और उत्साहित भी की अब तो शिव किस करेगा ही।

शिव आई ऍम एक्साईटेड ऐन्ड कांट वेट। प्लीज शिव और इंतज़ार मत कराओ किस करो न।

सुभी आपने तो किस कर लिया और क्या चाहिए ? 

किस चाहिए

मुझे किस करनी नहीं आती।

अरे बुद्दू लड़के मुझे पता है तभी करके बताया अब तुम करो किस मुझे।

शिव ने बहुत देर तक हिम्मत जुटा करके आखिर सुभी को किस किया।

इसके बाद करीब 1 घंटे तक सुभी शिव के साथ रही बहुत सी बातें की और फिर अपने घर चली गई।

शिव ख्यालों में....

आज भी मुझे याद है जब पहली बार रिश्ते के लिए मना किया था तो क्या क्या बोल रही थी

शिव मैं जानती हूँ मैं आप जितनी न तो सुन्दर हूँ और न ही समझदार हूँ इसके अलावा मुझे जो प्रॉब्लम है उसे लेकर मुझे कोई प्यार नहीं करता, तुम भी नहीं

ये बात सुनकर ही मैंने दोस्ती की। पर प्यार के लिए हाँ कैसे कह दूँ

घर पहुँच कर सुभी ने शिव को फोन करके घर पहुँचने की इन्फार्मेशन दे दी।

अब सुभी शिव को कुछ ज्यादा फोन करने लगी, धीरे धीरे प्यार के लिए हाँ करने के लिए शिव पर दबाव बनाने लगी। इस बात से शिव को गुस्सा करता पर सुभी इस बात को नजरअंदाज कर देती। 

शिव के गुस्सा हो जाने पर हर तरीके से शिव को मनाती।

सुभी का मनाने का अंदाज ही इतना निराला था की शिव को मानना पड़ता।

अब शिव का जन्मदिन आ रहा था जिसे लेकर शिव से ज्यादा सुभी उत्साहित थी

शिव को जन्मदिन को लेकर उत्साह इसलिए नहीं था क्योंकि कोई मुबारकवाद भी देने वाला नहीं था पर अबकी कुछ अलग होना तय था।

रात 12 बजते ही शुभी ने शिव को जन्मदिन की बधाई एक प्यारी सी किस के साथ दी। 

सुबह उठते ही सुभी ने शिव को फिर से जन्मदिन की बधाई किस के साथ दी और रात में फिर से। 

सुभी आज जो भी जिस अंदाज में शिव से बोली, शिव के दिल में एक अलग छाप एक अलग जह बना ली।

आज शिव सोच रहा था कि ऐसी ही खुशियों के खातिर लोग जन्मदिन का इंतज़ार करते हैं।

अभी तक जिस इन्सान ने बहुत लोगों को (उसमे सुभी भी शामिल है) ख़ुशी से ज़िन्दगी जीना सिखाता था आज अब वो खुद सुभी से ज़िन्दगी जीना सीख रहा था।

अब शिव को भी सुभी से मोहब्बत हो गई । जब शिव ने सुभी को अपनी मोहब्बत का इजहार किया तो सुभी बहुत खुश हुई। 

शिव हमें आपसे मिलना है 

सुभी ऐसी क्या बात है बता दो आप

शिव मिलोगे तब बताएँगे हम आपके पास आ रहे है और आज आप हमें रोकोगे नहीं

कुछ घंटे बाद सुभी शिव के सामने थी शिव को देखते ही सुभी शिव से लिपट गई।

क्या हो गया सुभी दूर हटिये हमसे कोई देख लेगा तो क्या कहेगा ?

इतना सुनते ही सुभी और तेजी से बच्चों की तरह चिपक गई और फूट फूट कर रोने लगी।

सुभी क्या हो गया कुछ तो बोलो रो क्यों रहे हो ?

शिव हमें कभी अपने से अलग मत करना, हम आपके बिना जी नहीं पाएंगे मर जायेंगे और शिव के चेहरे पर किस की बरसात कर दी।

शिव आज हमें आपके साथ बाइक पर घूमने जाना है। शिव ने सुभी की बात मान ली। और दोनों बाइक पर घूमने निकल गए।

सुभी बाइक पर शिव से लिपट कर बैठी थी जैसे वह शिव को एक पल के लिए छोड़ना नहीं चाह रही ।

अब सुभी जब तक दिन भर में कम से कम एक बार शिव के मुख से अपने लिए आई लव यू नहीं सुन लेती उसे सुकून न मिलता।

 फिर एक दिन शिव ने सुभी से एक सवाल किया। 

सुभी आप मुझे कब से चाह रही हो।

शिव मैं सच कहूँ तो आपको तब से चाहने लगी थी जब आपसे नार्मल फोन में बात किया करती थी आपकी बातों ने मुझे दीवानी बना दिया था

जब आपने इनकार किया तो बहुत दुःख हुआ साथ ही मुझे खुशी हुई की बन्दे में कोई तो बात है जो एक लड़की के प्रपोजल को सिरे से नकार रहा है।

अब आपको पाने की चाहत और बढ गई। हर सम्भव प्रयास किया, पर आपने कभी नजदीक आने न दिया।

इस बात से ज्यादा और ज्यादा आप पर फ़िदा होती गई। 

शिव इस बात से कभी मत परेशान होना की आप मुझे पूर्णतः प्यार दे पाओगे या नहीं। सच तो ये है की आपसे 10 प्रतिशत भी मुझे मिल जायेगा तो मेरे लिए बहुत है।

जो गैरों का अपनों की तरह सहारा बन सकता है वो अपनों को कभी दुखी नहीं देख सकता। जिसका जो हक है उसे आप वक़्त के साथ बखूबी देते आये हो और आगे भी देते रहोगे । यही विस्वास है की मुझे जो भी जितना भी चाहिए उतना आप जरुर देंगे। 

अब अक्सर दोनों का साथ में वक़्त बीतने लगा। सुभी ने अपने घर में शिव के बारे बता दिया। 

अब दोनों अपनी ज़िन्दगी एक दूजे के साथ हंसी ख़ुशी से बिताने लगे।

अर्ज है एक शेर-

श्रद्धा का पैगाम भेजा, स्नेह का ख़िताब आया है

अर्ज की थी दुआ, क़ुबूल हुई आशीष लाया है

प्यार से बाँटा है जो हरपल ख़ुशियों का गुलाब

ये मौसम वही खुशबू की बहार बेसुमार लाया है।


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