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प्रीत - (एक सीख)

प्रीत - (एक सीख)

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सफ़र के दौरान एक दिन लेखक के हाथ में एक पेपर का टुकड़ा लगा जिसपे एक शेर लिखी हुई थी...

"जो मोहब्बत चेहरे से हो वो मोहब्बत नहीं एक फरेब है।

जो मोहब्बत बसे दिल में वो मोहब्बत दिल की विशेष है।


रिश्तों की पहचान बताकर ऐ इल्जाम लगाने वाले

कुछ तो रहम कर मुझे मेरी पहचान बताने वाले।।

एक बार तो इस दिल को दिल से दिल समझो

इस दिल को पत्थर-ओ-बेजान समझने वाले।।"


नीचे शेर लिखने वाले का नाम और पता लिखा था।  लेखक के मन में जो भी चल रहा था वो इस शेर की तह तक जाना चाहता था सो लेखक महोदय दिए पते पर दूसरे दिन ही जा पहुँचे। जब लेखक महोदय शेर लिखने वाले से मिले तो उन्हें बहुत ही आश्चर्य हुआ, क्योंकि उनकी उम्र महज 29 साल की रही होगी।

औपचारिक बातों के बाद लेखक महोदय ने उस शेर का जिक्र किया। पहले तो जनाब ने इस बारे में कोई भी बात करने से साफ इंकार कर दिया पर लेखक जी के बहुत निवेदन करने पर जो बात सामने आई वो कुछ यूँ थी:

ये कहानी की शुरुआत कई साल पहले हुई थी। जिसमे सिर्फ मन का मन से और दिल का दिल से लगाव था। लेकिन कुछ ऐसा हुआ जिसमें जीवा के जीवन में एक तूफान खड़ा हुआ। एक ऐसी ग़लती की सजा उसे मिली जो ग़लती उसने की ही नहीं।


उसके प्यार ने ही उसके प्यार में वो ग़लती निकाली, प्यार को गलत साबित करते हुए मन के प्रेम को तन और हवस के पुजारी कहा जो बात उसने सपने में सोचा नहीं। उसे वही बात कहके एक ऐसा दर्द उस इंसान ने दिया जिसे जीवा ने ता ज़िन्दगी के लिए अपना मन अर्पण किया था। 

ये कहानी नायक "जीवा" और नायिका "लिका" की है।

जीवा और लिका की प्रेम कहानी में जीवा का प्यार लिका के लिए मन का मन से और दिल का रिश्ता था एक ऐसी मोहब्बत थी की जीवा लिका की आवाज़ सुनकर उसकी मनोदशा बता देता था। की लिका क्या चाहती है वह क्या सोच रही है।

जीवा ने लिका के तन से नहीं मन से प्यार किया था। लिका के हँसने की अदा, बात करने का सलीका, और लिका का वो शरारती बचपना जिसमें वह जीवा से बात बात पर झगड़ती लेकिन जीवा के दो मीठे बोल सुनके सार गुस्सा, दर्द सब ख़त्म हो जाता। कितना भी लड़ते झगड़ते लेकिन एक दूसरे पर जो विश्वास की डोर मजबूत थी कम होने की बजाये बढ़ती जा रही थी।


प्यार के नाम पर कभी किसी ने कोई बात नहीं कही थी। जीवा ने हमेशा एक ही सपना देखा था की लिका पढ़ लिख कर एक ऊंचा नाम कमाए। जिसकी वजह थी की वो पढ़ना तो बहुत चाहता था लेकिन पैसों की तंगी के चलते दिल के सपने सपने ही रह गए थे। जिनको वह लिका के सपनों के रूप में पूरा करना चाहता था। इसलिए लिका की हर ज़िद के आगे वो झुकने लगा। अब लिक ने उसके प्यार पर ही तोहमते लगानी शुरु कर दी। 

लिका की ग़लती पर भी यदि लड़ाई होती तो जीवा अपनी ग़लती मान कर माफ़ी माँग लेता।

जीवा नहीं जानता था की आज जिन बातों को न बढ़ाने के लिए अपनी ग़लती मानता है माफ़ी मांग लेता है कल इन्ही की वजह से उसे एक मुजरिम बना दिया जायेगा। प्यार की अदालत में उसके प्यार का गला घोट दिया जायेगा। धीरे धीरे बातों में जीवा को ताने सुनाये जाने लगे के तुम मन के नहीं तन के पुजारी हो। जीवा एक दुबला पतला लड़का था और अब इसी बात को लेकर लिका जीवा को ताने मारने लगी थी। 

लिका कहती जीवा से के तुम्हारे शरीर को लेकर मेरे दोस्त कहते है की खूबसूरत नहीं हो।


जो लिका मन का प्रेमी चाहती थी उसे अब तन से प्यार हो गया था लिका को अब मन का नहीं तन का खूबसूरत दिखने वाला प्रेमी चाहिए था। लिका को उस तन से चाहत हो गई थी जिसका कल का कोई भरोसा न था। नस्वर तन के लिए मन के प्रेम पर इतनी तोहमते लगाईं की जीवा टूट कर बिखर गया। जीवा ने आगे बताया कि मैंने सिर्फ लिका से एक सवाल किया

"नहीं बांधता बंधन में बंधने को तुम तैयार नहीं

है एक प्रीत का बंधन कहीं इससे भी तो तुमको इनकार नहीं"

और उस वक़्त जीवा को मिला तो सिर्फ उपेक्षा भरा इनकार लिका की तरफ से।

इसके बाद जीवा ने जो बात कही वो मेरे दिल को भी छू गई: "तू है तो दुनिया का सब है, तेरे बिन मैं कुछ भी तो नहीं।।"


आगे जीवा ने एक सवाल उन सभी स्त्रियों के लिए किया है जो ये कहती हैं की मर्द सिर्फ तन और खूबसूरती के प्रेमी होते है। जहाँ भी खूबसूरत लड़की देखी फिसल गए। वो लड़की के मन में बसने वाली प्रीत नहीं कर पाते। वो मन के मीत नहीं बन पाते।

आगे उसने कहा, क्या आपलोगों (स्त्रियों) ने कभी मन के प्रेमी से प्रेम किया है। आपने कभी ऐसे प्रेमी का सपना देखा हो जो सुन्दर राजकुमार न हो। जो तन से और ख़ूबसूरती में आकर्षक न दिखता हो। जब आज तक आप सपने में भी ऐसे इंसान की कल्पना नहीं कर पाए हो तो सामने वाले से ही सारी उम्मीदें क्यों? मैं तो आज भी ये सोच कर खुश हूँ की मैंने दिल से मन का प्यार लुटाया था उसपे और जब तक साँस है लुटाता रहूँगा। क्योंकि मैंने उसमें मन का मीत खोजा था। हम कई साल साथ रहे लेकिन अब तो उसे शरीर से प्यार हो गया है। उसे आकर्षक दिखने वाले इन्सान की ललक हो गई है।


तभी मैंने दिल के दर्द को शायरी के रूप में शब्दों को पिरोया। क्योंकि कोई तो चाहिए जिससे दिल के दर्द को बताया जा सके। मेरे पास लिका के अलावा कोई और है ही नहीं। और लिका किसी भी तरह से मेरी बात सुनने को तैयार ही नहीं थी। जीवा की ज़िन्दगी में सिर्फ लिका थी जो हर सुख और दुःख की हिस्सेदार थी आज वो भी नहीं थी।

जीवा बिना रुके बोले जा रहा था आज वो अपने दिल में बसे गुस्से को निकाल रहा था। और मैंने बीच में रोकना उचित नहीं समझा।

आगे जीवा ने कहा:

"गर कोई मान ले खुद को गलत बिना ग़लती के

गर वो खुद का सर झुका दे तेरे मान को।

न झुकने दिया हो तेरा सर कभी गैरों के सामने

उस मोहब्बत में है क्या खोट, अब तू ही बता दे।।"


ये बातें बताते बताते उसके दिल का दर्द आँखों और चेहरे से मैं साफ देख रहा था, अब मैं जीवा की बात सुनकर पूरी तरह निशब्द था। कई महीने हो चुके है मुझे जीवा से मिले, लेकिन आज भी मेरे कुछ सवाल ज्यों के त्यों अधूरे हैं फिर भी लिखने की कोशिश की।

और इस कहानी के माध्यम से मैं सभी प्रेमियों को एक सन्देश देना चाहता हूँ की आप सभी लोग अपने मन के मीत, अपनी सच्ची प्रीत को बखूबी समझने की कोशिश करे। सामने वाले से लड़ने की जगह उसके हालातों को खुद से परखने की कोशिश करें।

हो सकता है आपके मन का मीत आपकी सच्ची प्रीत आपको फिर से मिल जाए।


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