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एम एस अजनबी

Drama

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एम एस अजनबी

Drama

दोस्ती - एक प्रेम कहानी

दोस्ती - एक प्रेम कहानी

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कुछ रिस्ते, रिस्ते नहीं अपित एक अहसास होते हैं एक ऐसा अहसास जो जो कभी न मिटने वाली छाप छोड़ देते है। ""दोस्ती"" ये शब्द नही एक अहसास है एक रिस्ता है वो ऐसा रिस्ता जिसका कोई मोल नही है। न जाति पाति, न भेद भाव, न ऊंच नीच, न छोटा बड़ा, न अमीर गरीब,न कोई बंधन, न खून के रिस्ते। उन सबसे बढ़कर एक खाश और अलग अहसास, अपने पन का अहसास बिना किसी बंधन के। सच ही कहा है किसी ने - कि किसी के दिल मे जगह बनाना आसान न है और अगर बन जाये दिल मे में जगह तो दूर होना मुश्किल। "दोस्ती का रिश्ता" "अनमोल रिस्ता" ये एक ऐसा रिस्ता है जिसमें अनेकों रिश्तों के अहसास समाहित होते है इसीलिए ये रिस्ता बहुत खास और अनमोल होता है

हर एक इंसान की अपनी कुछ अभिलाषाये होती है और वह सामने वाले से वही अपेक्षा करता है जैसे उसे क्या प्रसन्द है क्या नहीं। यही सभी बातें ध्यान में रखते हुए अपनी लाइफ को मैं जीने लगा। अब तो दिन ही नही साल बीतने लगे। मैं गांव से शहर अपनी आगे की शिक्षा के लिए आ गया। वो दिन भी आया जब पहली बार मैने उससे अपने दिल की बात कही। और उसने मेरी बात को स्वीकार किया।अब वह दोस्त के साथ मेरा प्यार भी है कुछ वक्त बाद मुझे उसने बताया कि अब आपके ही इंतेज़ार में पलकें बिछी रहती है कि कब मेरे सामने आओगे।

 वो मेरी पहली दोस्त और पहला प्यार भी है।आज मुझे लगभग उसको चाहते हुए 20 साल हो चुके है और हम दोनों को साथ रहते हुए लगभग 15 साल हो चुके हैं। मुझे कभी ऐसा महसूस नही हुआ कि उसकी वजह से मैने कुछ खोया है। हाँ ये जरूर कहूंगा कि उसकी वजह से मैने वो हर मुकाम हासिल किया, आज जहाँ पर हूँ मैं। उसकी चाहत न होती तो शायद मैं अपने काम को इतनी सिद्दत से न करता । आज जो भी है मेरे पास चाहे धन हो या दौलत या सामाजिक पैठ ये सब की वजह वो ही है। मेरी जिंदगी में अगर वो लड़की न आई होती तो शायद मैं इन उचाईयों को कभी न छू पता, जिन उचाईयों पे मैं हूँ। हो सकता है एक गुमनाम ज़िन्दगी जी रहा होता जहां मेरी कोई पहचान न होती।


हाँ सही मायनों में ये बात सौ प्रतिसत सही है आज हमलोग अगर चाहते भी हैं तो एक दूसरे से अलग न रह पाते हैं ज़िन्दगी हमें जो खुशियां देना चाहती है चाहे छोटी हों या बड़ी उन खुशियों को दिल खोल के जीने की कोशिश करनी चाहिए। जब हम सिर्फ अपनी खुशियों के बारे में सोचते हैं उसी जगह से हम खुशियों को पाना नहीं बल्कि खोना सुरु कर देते हैं। हम अपनी जिद पे कुछ वक्त तक खुशियों को समेट सकते हैं हमेशा नहीं। अगर सामने वाला खुश न होगा तो वो कितने वक्त तक और कितनी दूर तक साथ चलेगा। कभी अपनी खुशी के लिए सामने वाले को झुकाए तो कभी उसकी खुशी के लिए खुद झुक जाएं। जहां दिल और अहसास के रिस्ते होते हैं वहां हार में भी जीत होती है अहसासों के रिश्तों में सिर्फ जीतने की कोशिश करोगे तो एक दिन रिस्ते हार जाएंगे। जो रिस्ते हार गए तो आप जीत के भी हार जाओगे। अहसासों के रिस्ते वहीं दूर तक जाते हैं जहां हम एक दूसरे की खुशियों के लिए झुक जाते है। और इसी तरह ही बन गया हमारा कभी न मिटने वाला रिस्ता, एक अनमोल रिस्ता दोस्ती और प्यार का। 

मैं सुक्रगुजार हूँ उन सभी का जिन्होंने मुझे ऐसे दोस्त और प्यार से मिलाया। और साथ में उसका भी जिसने मुझे अपने दोस्त और प्यार के काबिल समझा..........

 



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