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Dinesh Divakar

Thriller

4  

Dinesh Divakar

Thriller

जग्गा जासूस- द भुत मिस्ट्री

जग्गा जासूस- द भुत मिस्ट्री

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बचपन से ही जग्गा को जासूसी करने का बड़ा शौक था.वह था भी बहुत होशियार और चालाक जब भी कोई परेशानी होती थी तो सब जग्गा की मदद से उसे सुलझाते थे. सब उसे जगा जासुस कहते थे और धीरे-धीरे जग्गा ने अपनी एक प्राइवेट जासूस का आफिस खोल लिया.

एक दिन सुबह के समय जग्गा अखबार पढ़ते पढ़ते चाय पी रहा था. तभी जग्गा की बुआ गंगावती का फोन आता है. जो पास के एक कस्बे सोनपुर में रहती हैं. 

जग्गा- अरे बुआ कैसी हो? तबीयत तो ठीक है आपकी। बताइए कैसे फोन किया।

बुआ- बेटा तुम्हे एक परेशानी बताना चाह रही थी। हमारे कस्बे में एक ही स्कूल है और आजकल वहां बहुत गड़बड़ चल रही हैं। सभी ने अपने बच्चों को स्कुल भेजना बंद कर दिया है। तुम्हें अगर परेशानी ना हो तो यहां आओ। और मामले की तफ्तीश कर के देखो

जग्गा तुरंत रवाना हो जाते हैं। वहां पहुंचते-पहुंचते शाम हो जाती हैं।जग्गा सीधे बुआ के घर पहुंचते हैं

बुआ- कुछ दिनों से स्कूल में बच्चों को भुत दिखते हैं और बच्चे बीमार भी हो रहे हैं। हमें तो इस बात पर यकीन नहीं लेकिन बाकी गांव वाले यही सोचते हैं। तुम कुछ कर सको तो बहुत अच्छा होता।

जग्गा गांव के मुखिया के घर जाकर उनसे भी बात करते हैं।

मुखिया- मैं भी बहुत परेशान हूं। इस स्कूल को एक बड़ी समाज सेवी संस्था सरकार से गोद लेने वाली हैं। वह और ज्यादा अच्छी शिक्षा बच्चों को दे पाएगी। लेकिन ऐसे बच्चे स्कूल छोड़ते रहे तो पता नहीं यह संभव कैसे हो पाएगा

जग्गा- तो यह बात है

तभी जग्गा दीवार पर एक तस्वीर देखता है।

जग्गा- यह किसकी तस्वीर है ?

सरपंच- समीर मेरा भतीजा नाटक में काम करता है मुखिया बताते हैं कि उनका भतीजा नाटकों के लिए कॉस्ट्यूम भी किराए पर देता है 

दूसरे दिन गोपीचंद सुबह सुबह ही तफ्तीश के लिए स्कूल पहुंच जाते हैं स्कुल के आसपास की जगहों का निरीक्षण करते हैं तभी चौक उठते हैं और ध्यान से जमीन पर झुककर कर देखने लगते हैं। और स्कूल के सभी कमरे को भी देखते हैं।

थोड़ी देर बाद बच्चों और स्कूल स्टाफ का आना शुरू हो जाता है।

जग्गा- बच्चों और स्कूल टीचर से बात करते हैं उन्हें मामला गंभीर लगता है तो वे अपने असिस्टेंट गीता और सुभाष को भी वहां पहुंचने को कहते हैं 

तभी जग्गा की नजर स्कूल के गेट पर खड़े खोमचे वाले पर पड़ी जो खाने-पीने का सामान बेचता था और बच्चो की भीड़ इकट्ठे थी। वे भी वहां जाते हैं और खोमचे वाले से बातचीत करते हैं और उनसे कुछ खरीदते हैं।

जग्गा कपने असिस्टेंट सुभाष को खोमचे वाले से खरीदा खाने का सामान देकर कहीं भेज देते हैं उसके बाद गीता को लेकर अचानक ही मुखिया के बेटे समीर के कॉस्ट्यूम शॉप देखने के लिए निकल पड़ते हैं।

वहां पहुंचकर वह पूरी दुकान को और कपड़ों को अच्छे से देखते हैं उसके बाद समीर से बोलते हैं- तुम्हारी शाप दो सचमुच बहुत अच्छी है लेकिन लगता है कि तुम्हारे यहां आने वाले लोगों को सफेद कपड़े कुछ ज्यादा ही पसंद है।

समीर- यह तो एक नाटक के लिए। 

तब जग्गा बोलें- कम से कम इन्हें साफ तो करवा दो देखो तो इनमें से कई पर कितनी मिट्टी लगी हुई है लगता है अभी अभी उपयोग में आए हैं.

जग्गा और उसके असिस्टेंट गीता वापस गांव आ जाते हैं तभी सुभाष भी आकर खाने के सामान की रिपोर्ट के बारे में बताते हैं 

तब जग्गा मुखिया जी से कहते हैं- सरपंच जी गांव के स्कूल में जो भी कुछ घट रहा है उसका जिम्मेदार आपका भतीजा है। समीर स्कूल में भूत बनकर बच्चों को डराता है। मैं अचानक उसकी दुकान पर चला गया था जहां मुझे कुछ सफेद लबादे दिखे जो गंदे भी थे उन पर लाल मिट्टी लगी थी जैसी स्कूल में है यहां तक कि स्कूल में इन लोगों ने छुपकर आने जाने के लिए सुरंग भी खोद रखी है। 

सरपंच- आप क्या कह रहे हैं जग्गा सर ? ऐसा कैसे हो सकता है ? समीर !

तब सीमा बोली स्कूल के बाहर बैठा खोमचे वाला भी उसका साथी हैं वह खाने के सामान में एक दवाई मिला देता था जिसे बच्चों की तबीयत खराब होने लगती थी

तब उसकी बुआ बोली-लेकिन जग्गा, यह ऐसा कर क्यों रहा है।

तब जग्गा बोले- एक बड़ी प्राइवेट कंपनी स्कूल को खरीदना चाहती है क्योंकि पूरे कस्बे में एक ही है और इससे वे बहुत फायदा कमा सकते हैं। लेकिन जब उस समाज सेवी संस्था के उस स्कूल को गोद लेने के बारे में उन्हें पता चला तो उन्होंने सोचा क्यों ना स्कूल को उस संस्था के हाथों में जाने से रोका जाए और इसके लिए समीर को उन्होंने रुपयों के लालच लालच दिया और उनसे यह काम करवाया।

उसके बाद फिर क्या था पुलिस को उनकी सच्चाई का पता चल गया और उन्होंने समीर और उनके साथियों को गिरफ्तार कर लिया और जग्गा और उसके असिस्टेंट सीमा और सुभाष का धन्यवाद किया।


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