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GURU SARAN

Inspirational


4.1  

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इश्क के रंग हजार

इश्क के रंग हजार

12 mins 166 12 mins 166

यकायक साहिल का फोन बज उठा क्लास चल रहा था। साहिल तुरन्त रिंग टोन आफ कर क्लास से बाहर निकल गया। थोड़ी देर बाद साहिल क्लास में वापस आया तो मैंने देखा साहिल का चेहरा उतरा थाl पीरियड खत्म होने पर मैं और जय उसके पास गए मैंने पूछा, "किसका फोन था तू परेशान क्यों है, " साहिल ने कहा, " राधिका काकी को दोपहर एक बजे पैरालिसिस (लकवा) का माइनर अटैक पड़ा है" साहिल ने जय से पूछा, "तेरा फोन रूम पर छूट गया है? श्याम काका तुझको फोन लगाते रहे लेकिन काल attend ना होने के कारण उन्होंने मुझको फोन लगाया" जय ने कहा, " मैं 5.00 बजे गोरखपुर से छपरा जाने वाली बस से निकलता हूँ, तुम लोग क्लास attend करो "साहिल ने जय से कहा, " राधिका काकी सिर्फ तेरी माँ है, हम तीनों की माँ नहीं है , इस तरह की बात कर दिल को चोट ना पहुँचाया कर हम भी चल रहे है " हम तीनों बस से रात्रि 11.30 बजे सिवान पहुँचे वहाँ से सदर हॉस्पिटल गए वार्ड03 में काकी भर्ती थी। हॉस्पिटल में श्याम काका, मोहन भाई (जय के चाचा के बेटे) थे। काका ने बताया की बाये भाग में हलका असर हुआ है तुरन्त मेडिकल ऐड मिल जाने के कारण कंट्रोल किया जा सका नींद का इंजेक्शन दिया गया है सो रही है। काका ने कहा, "तुम लोग भूखे होंगे जाओ आगे होटल है कुछ खा लो" हम लोगों ने कहा इस समय खाने की इच्छा नहीं है, चाय पीकर अभी आते है। चाय पी कर हम लोग आ गए साहिल ने कहा, "काका आप और मोहन भाई आराम कर लीजिए हम लोग काकी के पास बैठते है" लगभग 4.30 बजे मोहन भाई ने आ कर कहा की तुम लोग आराम कर लो सफर की थकान होगी। 

हम तीनों की दोस्ती के चर्चे आसपास के गाँव में भी है, लोग हमारी दोस्ती की मिसाल देते है जिस तरह हमारी दोस्ती मशहूर है उसी तरह हमारा गाँव सदाकत पुर आपसी भाई चारा, धार्मिक सदभावना, प्रेम एवं त्याग के लिए जिले में मशहूर है। हमारे गाँव में लगभग 125 घर है जिसमें 25 मुस्लिम परिवार है। हर पर्व हम मिल जुल के मनाते है। लगभग 20 वर्षों से बशीर काका हमारे गाँव के प्रधान है।

काकी 08 दिन हॉस्पिटल में रही सुबह हमारी बहन उपासना रात का खाना साजिया बना कर हॉस्पिटल भेजती रही। साजिया और उपासना लोक नायक इंटर कॉलेज में साथ 2 पढ़ती है। हमारे बाबूजी ( सत्येंद्र सिन्हा) और जय के बाबू जी श्याम सिंह इसी कॉलेज में टीचर है। हम तीनों ने भी इसी स्कूल से इंटर किया BSc(Stat) करने हम तीनों गोरख पुर यूनिवर्सिटी चले गए। 

धीरे 2 काकी के स्वास्थ्य में सुधार होता रहा उपासना और साजिया की सेवा रंग लाई

Bsc के फाइनल वर्ष के exam में जय ने टॉप किया मैं (चंदन) और साहिल 75% अंक से सम्मान सहित पास हो गए। साजिया और उपासना इंटर first div. से पास हो गई। साजिया और उपासना बी काम करने के लिए कर्पूरी ठाकुर महा , विद्यालय सिवान गई। हम तीनों Msc(stat) करने के लिए गोरखपुर लौट आये। हास्टल में एक कमरे में दो student ही रह सकते अत: किसी एक को दूसरे कमरे में रहना था। मैं और साहिल एक कमरे में जय दूसरे कमरे मैं देवरिया के कमल के साथ था यूँ तो हम तीनों एक साथ ही खाना बनाते खाते है, सोने के लिए ही जय अपने रूम में जाता है। 

Msc(stat) की फाइनल ईयर में साहिल ने टॉप किया। जय को second और मुझे third स्थान प्राप्त हुआ। उप कुलपति ने साहिल को अस्थाई प्रवक्ता पद पर नियुक्ति का आफर दिया जिसे साहिल स्वीकार नहीं कर रहा था लेकिन मेरे और जय के समझाने पर वह राजी हो गया। अब हम तीनों को Phd करना था अत: हम लोगों ने हॉस्टल नहीं छोड़ा। एक दिन मुझे बुखार आ रहा था मैं रूम पर था, जय और साहिल दोनों हेड साहब के घर गए थे, मैंने देखा एक बिल्ली बेड के नीचे आ गई बिल्ली को भगाने के लिए मैं झुका तो मैंने देखा एक डायरी फर्श पर पड़ी है, मैंने डायरी उठाया और उसके पन्ने पलटने लगा ज्यों 2 मैं आगे बढ़ता गया मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा खून जमता जा रहा है, साहिल ने हर दिन एक पत्र उपासना के नाम लिखा था, एक जगह उसने लिखा था उपासना मैं बुजदिल या कायर नहीं हूँ मैं सोचता हूँ की मेरे दोस्त कहीं मुझे गलत ना समझ ले मैं उपासना तुमसे इश्क करता हूँ इश्क का जिस्म से क्या वास्ता अगर मैंने अपने इश्क का इजहार कर दिया तो पूरा गाँव इम्तिहान में फंस जायेगा आपसी भाई चारा, सद्भाव, सभी मजहब का सम्मान जिसके लिए मेरा गाँव मशहूर है के असली इम्तिहान का वक़्त आ जायेगा। मैं इश्क और दोस्ती को इबादत का दर्जा देता हूँ। मेरा इश्क एक तरफा है, मैं ये नहीं जानता की मेरे इश्क का तुम्हारी नजर में कोई महत्व है या नहीं। प्यार के बदले प्यार मिले ये नसीब की बात है, प्यार के बदले प्यार मिले जरूरी तो नहीं। मेरा मजहब तेरा मजहब ये सब दुनिया ने दिया है, कुदरत ने हिंदू, मुस्लिम पैदा नहीं किया पैदा होने के बाद दुनिया वालों ने मेरे माथे पर मुस्लिम और तुम्हारे माथे पर हिंदू का ठप्पा लगा दिया। डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा था। हिंदू हो या मुस्लिम दोनों एक ही परम शक्ति को पुकारते है, विधि अलग 2 है। फिर हिंदू, मुस्लिम में इतनी दूरी क्यों आपस में इतने फसाद क्यों? Love is god कहने वाले प्यार करने वालों के दुश्मन क्यों हो जाते है? जब भिन्न 2 मजहब के दो नामवर आपस मे शादी करते है तो कोई बवाल खड़ा नहीं होता बल्कि बधाइयों का सिलसिला थमने का नाम नहीं लेता। परंतु यही काम जब आम इंसान करता है तो उपद्रव खड़ा हो जाता है, खून तक बह जाता है। वाह double standard दुनिया। मैं अपने इश्क का इजहार नहीं करूँगा गर मेरा इश्क सच्चा है तो मेरे इश्क की शीतलता का आभास तुझे जरूर होगा। गर मेरे इश्क का आभास तुम्हें ना हुआ तो कयामत तक तेरा इंतजार करूँगा। डायरी पढ़ कर मैंने वही रख दिया जहाँ से उठाया था। 

साजिया और उपासना का Bcom पूरा हो गया एक दिन बाबू जी का फोन आया बाबू जी ने बताया की उनके स्कूल के प्रिंसिपल का बेटा आकाश जो बैंक में नौकरी करता है के साथ उपासना की शादी की बात चलाई है कल वे लोग उपासना को देखने आ रहे है तुम भी आ जाओ। ये जानने के बाद की मेरा दोस्त मेरी बहन से बेइंतहा प्यार करता है मुझे कुछ करना चाहिए मैं जय और साहिल को बताये बिना घर को निकल पड़ा, बस में बैठने के बाद मैंने दोनों को फोन कर के बता दिया की वह जल्दी में घर जा रहा है जल्दी लौट आयेगा। घर पहुँच कर मैंने उपासना से पूछा, "क्या तू साहिल से शादी करना चाहेगी, साहिल एक नेक दिल काबिल इंसान है। उपासना ने कहा, "मैं क्या बताऊँ आप बड़े भाई है मेरे लिए जो करेंगे अच्छा ही करेंगे" मैं राबिया काकी के पास गया मैंने उनको बताया साहिल उपासना से बहुत प्यार करता है मैं अर्ज करने आया हूँ की आप अपनी बेटी उपासना को अपने पाक कदमों में जगह दे दीजिये। काकी ने कहा, " बेटा उपासना जिस घर की बहु बनेगी वो घर उसके पाक कदमों से पाक हो जायेगा उस घर पर खुदा की रहमत बरसेगी, लेकिन हमारे अलग 2 मजहब आड़े आएंगे " मैंने कहा" काकी दोनों बालिग है कोर्ट मैरिज करा देंगे उसके बाद एक दावत गाँव वालों को दे देंगे "काकी ने कहा, " बेटा इस गाँव में जब से मैं आई हूँ कभी अलग 2 मजहब के लड़की लड़के की शादी नहीं हुई, मैं तुम्हारे काका से बात करूँगी " मैंने घर पर आकर माँ को बताया की साहिल उपासना से बहुत प्यार करता है उपासना के लिए साहिल हर तरह से योग्य है। अम्मा ने कहा, " तेरी सब बात ठीक है, परंतु साहिल और हमारा मजहब अलग 2 है, रिश्तेदारी में लोग तरह 2 की बात बनायेंगे, तुम्हारे बाबू जी इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं होंगे " मैंने अम्मा से कहा, " अम्मा इतनी उम्र में मुझे पहली बार आप लोग अहसास करा रहे है की बशीर काका, काकी साहिल सब गैर है। अम्मा राबिया काकी का साहिल की सलामती के लिए छठ पूजा करना, मुझे ताजीय में पैगी बनाना क्या हम लोगों द्वारा एक दूसरे के मजहब का सम्मान नहीं है। गर ये शादी हो जाती है तो हमारे बीच मजबूत रिश्ता कायम हो सकता है हम हिंदू, मुस्लिम एकता की मिसाल कायम कर सकेंगे। 

रात को लगभग 7.00 बजे प्रिंसिपल साहब उनकी पत्नी उनका लड़का और लड़की दमाद सभी उपासना को देखने आये। बाबू जी ने उनके स्वागत सम्मान की पूरी तैयारी कर रखी थी । खाना वगैरह खा कर वे लोग विदा हुए। रात में अम्मा ने बाबू जी को सारी बात बताया बाबू जी ने कोई जवाब नहीं दिया और सोने चले गए। दूसरे दिन मैंने बाबू जी से पूछा, " आपने अम्मा को कोई जवाब नहीं दिया "बाबू जी ने कहा, " मैं फालतू बातों का जवाब नहीं देता, जिस समाज में हम रहते है, उस समाज के कायदे कानून का पालन करना हमारी ड्यूटी है, आकाश अच्छा लड़का है, उपासना खुश रहेगी " मैं गोरखपुर लौट आया। मुझ से जय और साहिल ने कहा, "यार तू हम लोगों को बिना बताए गाँव चला गया क्या बात थी बता" मैंने कहा, "कोई बात नहीं थी मैं समय आने पर सब बता दूंगा " एक हफ्ते के बाद बाबू जी का फोन आया उन्होंने बताया की उपासना उन लोगों को पसंद है, वो लोग मई में विवाह करना चाहते है, इस बीच सारी तैयारियां करनी है। मेरी समझ में नहीं आ रहा था की इस शादी को कैसे रोका जाए, साहिल अपने इश्क को मुझसे छुपा रहा था मैं भी ये जाहिर नहीं होने देना -----चाह रहा था की मुझे साहिल के इश्क के बाबत सब मालूम हो चुका है l  

बाबू जी ने फोन कर के बताया की 12 मई को तिलक और 20 मई को शादी होनी है। तिलक में प्रिंसिपल साहब ने कार की मांग किया है। सभी तैयारियों के लिए दो महीने का समय है। 

20 April को उपासना मामा के लड़के संजय के साथ मोटर साइकिल से मामा के घर दो दिन के लिए गोपाल गंज जा रही थी रास्ते में सामने से आती हुई जीप से मोटर साइकिल की टक्कर हो गई जिससे संजय की on spot मृत्यु हो गई उपासना को सर में चोट लगी थी जिससे वो बेहोश हो गई थी राहगीरों ने पुलिस को सूचना दिया पुलिस ने उपासना को जय प्रकाश मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया संजय की जेब से आधार कार्ड मिल गया जिसमें घर का पता लिखा था पुलिस ने संजय के घर पर दुर्घटना की खबर दिया आनन फानन में घर के सदस्य घटना स्थल पर पहुँच गए। संजय की गाड़ी का पंच नामा कर के पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया मामा के बड़े बेटे मंगल ने घर पर घटना की सूचना दिया सूचना मिलते ही बाबू जी, बशीर काका, श्याम काका गाँव के अन्य लोग जय प्रकाश मेडिकल कॉलेज पहुँच गए। उपासना OT में थी। अम्मा का फोन आया वो बहुत रो रही थी उन्होंने घटना के बाबत मुझे बताया। मैंने जय और साहिल को दुर्घटना की खबर दिया हम तीनों private taxi कर मेडिकल कॉलेज के लिए निकल पड़े। मेडिकल कॉलेज पहुँच कर मालूम हुआ की उपासना को सर पर गहरी चोट लगी है, खून निकल जाने के कारण तीन यूनिट खून की जरूरत पड़ी गाँव से आये हुए लड़कों ने खून दिया। उपासना को OT से ICU में शिफ्ट कर दिया गया अभी भी उपासना अचेत थी बाबू जी ने कहा तुम लोग यहाँ देखो मैं तुम्हारी अम्मा को लेकर तुम्हारे मामा के घर संजय की अंतिम यात्रा में शामिल होने जा रहा हूँ जल्द लौटूंगा हम तीनों ने अपनी 2 ड्यूटी तय कर लिया। दूसरे दिन उपासना को होश आया तो उसने डॉक्टर को बताया की उसे साफ दिखाई नहीं दे रहा। डॉक्टरों ने CT SCAN और MRI का बारीकी से अध्ययन किया तो उन्हें धुँधला दिखाई देने के कारण का पता चला नेत्र विशेषज्ञ से भी डॉक्टर ने सलाह लिया और उपचार शुरू किया। डॉक्टर द्वारा जब ये पता चला की उपासना को धुँधला नजर आ रहा है तो बाबू जी बहुत घबड़ा गए, साहिल ने on duty डॉक्टर से बात किया तो उसने बताया 70% साफ दिखाई देने के चांस है वो भी 06 महीने बाद। लगभग 20 दिन बाद उपासना को ICU से बेड पर शिफ्ट किया गया। तकरीबन रोज राधिका काकी, राबिया काकी और अम्मा 12 बजे हॉस्पिटल आती और 05 बजे शाम जाती रही। 

बाबूजी ने प्रिंसिपल साहब को इस दुर्घटना की सूचना देकर शादी की तारीखें आगे बढ़ाने की प्रार्थना किया l परंतु उनकी पत्नी ने शादी तोड़ने की बात कह कर बाबूजी का दिल तोड़ दिया लेकिन आँखें खोल दिया। प्रिंसिपल साहब को ज्यों ही पता चला की उपासना को साफ दिखाई देने में काफी समय लगेगा वो अपने वादे से मुकर गए। 

उपासना को पूरे एक माह बाद हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया गया। मैं और हमारे दोनों मित्रों ने अपनी 2 ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभाया। घर पहुँच कर बाबूजी ने कहा बेटा कल सुबह बशीर भाई से मिलना है। दूसरे दिन बाबू जी बशीर काका के सामने जा कर जमीन पर बैठ गए। बशीर काका कुर्सी से उठे और बोले , "अरे उठो भाई यूँ मेरे ऐसे जाहिल के सामने गुरु जमीन पर बैठे तो मेरा दोजख जाना यकीनन तय मानिये " बाबू जी ने कहा, "बशीर भाई देने वाले का हाथ ऊपर लेने वाले का नीचे होता है" बशीर काका ने कहा, "सिन्हा साहब तो नीचे मुझे बैठना चाहिए क्योंकि मुझे उपासना बेटी का साथ चाहिए अपने बेटे के लिए " ये सुन कर बाबूजी बशीर काका के गले लग कर रोने लगे और बोले, "यार तूने दोस्ती निभा दिया " बशीर काका ने कहा ये शादी ना काजी करायेगा ना कोई पण्डित ये शादी जमीं, आसमां चाँद सूरज को गवाह बनाकर होगी, अब से मेरे बेटे के माथे पर जो मुस्लिम का ठप्पा समाज ने लगाया है उसे मैं मिटाता हूँ आप उपासना बेटी के माथे पर लगे हिंदू ठप्पे को मिटा दे, हम सब हिंदुस्तानी, मजहब हमारा इंसानियत है। बशीर काका ने आवाज लगाया ओ साहिल की अम्मी तुमको तुम्हारी मन चाहि बेटी उपासना मुबारक इस खुशी के मौके पर मुंह तो मीठा कराओ, काकी एक थाली में मेवे के लड्डू ले कर आई, हम तीनों इस मुबारक घड़ी पर वही मौजूद थे। मैंने साहिल से कहा अब तुझे अपने इश्क का इंतजार कयामत तक नहीं करना पड़ेगा। मैं तुम लोगों को बिना बताये गाँव आया था क्यों की बाबूजी उपासना की शादी ठीक कर रहे थे ये जानकर की मेरा दोस्त मेरी बहन से बेपनाह मोहब्बत करता है मैं किसी और से शादी की बात सुनकर बेचैन हो उठा। 

इश्क की जीत हुई, एतबार की जीत हुए, गिर गई मजहब की दीवार, हम सब हिंदुस्तानी, मजहब हमारा इंसानियत

साहिल, उपासना की शादी मिसाल बनेगी दूसरों के लिए उपासना के जल्द ठीक होने की दुआ कीजिए। 



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