Ravi Verma

Drama Fantasy

5.0  

Ravi Verma

Drama Fantasy

हत्या

हत्या

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क्यों?''

"मैंने ऐसा क्या किया?"

"मैंने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा? क्यों तुम मुझे मारना चाहते हो? अगर भूल से मैंने कुछ ग़लत कर दिया तो मुझे माफ कर दो। तुम मुझे जो भी सजा दोगे मैं चुपचाप सह लूंगा। लेकिन मुझे मत मारो। मैं, जीना चाहता हूँ। आखिर ऐसी कौनसी गलती है जिसके लिए तुम मेरी जान लेना चाहते हो। तुम कुछ बोलते क्यों नहीं? जवाब क्यों नहीं देते मेरे सवालों का? मैं तुम्हारे पैर पड़ता हूँ। मुझे छोड़ दो। मुझे जीने दो।"

सड़क पर पसीने से लथपथ पड़ा हुए वह उस आदमी से अपनी जान की भीख मांग रहा था।

"तुम्हें याद है कैसे तुम बचपन में मेरे लिए सब से लड़ जाया करते थे और जब भी कोई मेरे बारे में तुम से ग़लत बोलता तो तुम उससे रुठ जाते थे। अब ऐसा क्या हो गाय है? क्यों हम लोगों में इतनी दूरियाँ आ गई है? बताओ?"

"चलो! मैं ऐसा करता हूँ; मैं किसी के सामने नहीं आऊँगा। मैं जमाने से छुप कर रहूँगा। तुम जैसा बोलोगे वैसा करुँगा। जो रास्ता दिखाओगे उस रास्ते पर चलूँगा। बस तुम मुझसे मेरी ज़िन्दगी मत छीनो।"

आदमी उसकी ओर देखता है और उसे य़ूँ रोते हुए देख हँसता है।

"हँस क्या रहे हो! तुमने मुझे बड़ा ही क्यों होने दिया? जब तुम मुझे पाल नहीं सकते हो। क्यों तुमने मुझे ख्वाब दिखाए? और क्यों उन ख्वाबों को अपने ख्यालों से सींचकर खड़ा किया। जब तुम्हारी औकात नहीं थी तो क्यों मुझे हौसला देते रहे?"

उसकी बात सुनकर आदमी को गुस्सा आता है और वह पैर उठाकर अपना जूता उसके मुँह में ठूंस देता है। जूते की नोंक उसके हलक तक उतर जाती है। वह अपने शरीर में बची हुई हिम्मत से पूरा जोर लगाकर आदमी के पैर को अलग करने की कोशिश करता है, लेकिन नाकामयब हो जाता है। आंसूओं की रेल उसकी दोनों आंखों से दौड़ी चली आती है। वह आदमी के सामने अपने जीवन का आत्मसमर्पण कर देते है। लेकिन वह अपनी मौत की वजह जानकर मरना चाहता है।

"मैं तुम्हें बचपन से जानता हूँ। तुम ऐसे कभी नहीं थे। आखिर मुझसे ऐसा कौन-सा गुनाह हुआ कि तुम इस हैवानियत पर उतर आए. मैं जानना चाहता हूँ।"

आदमी मुस्कुराता हुआ उसकी तरफ देखता है और अपने हाथ को उठाते हुए सड़क कि दूसरी ओर इशारा करता है। जमीन पर खून से लथपथ पड़ा हुआ वह अपनी गर्दन को उठाता हुआ पीछे कि तरफ देखता है। सड़क की दूसरी ओर उसे उम्र के बोझ को उठाए हुए बूढ़े आदमी-औरत नज़र आते हैं। वहीं उनके बगल में चेहरे पर ढेर सारे सवाल लिए एक औरत खड़ी होती है। औरत के साथ में एक बच्ची खड़ी है जिसने अपने सीने से किताबों को लगाया हुआ है और दूसरे हाथ में पेंसिल पकड़ी है। अब वह सड़क की ओर फिर से देखता है। उसे परिवार के साथ ही सड़क के किनारे बड़ी-बड़ी बिल्डिंग खूबसूरत कार और सड़क पर एक जैसे कपड़े पहने एक जैसी हँसी हँसते हुए बहुत सारे लोग नज़र आते है।

'थू! कायर है तू इन सब लोगों को अपने पछतावे की ढाल बनाना चाहता है। तू भी उन सभी लोगों कि तरह क जैसे कपड़े पहनना चाहता है। एक जैसी हँसी हँसना चाहता है। तू मुझे मार दे। मैं तेरे जैसे निकम्मे और कायर आदमी के साथ नहीं रहे सकता हूँ। अच्छा हि हुआ कि तू मुझे मार रहा है, वरना मैं ही तूझे छोड़कर चला जाता। "

'मैं उस इन्सान के साथ नहीं रह सकता जो अपनी सांसे गिरवीं रखकर ऑक्सीजन खरीदता हो।" तू मुझे मार दे! अब खड़ा देख क्या रहा है? मारता क्यों नहीं मुझे? मार ना!'

उसकी बात सुनकर आदमी को बहुत तेज गुस्सा आता है। आदमी दोनों हाथों से उसका मुँह दबाता है। लेकिन वह फिर भी आदमी के ऊपर हँसता रहता है। आदमी उसकी हँसी बर्दशत नहीं कर पाता है और गुस्से में इतना पागल हो जाता है कि सड़क पर पड़े हुए उस शख्स की शर्ट की जेब से पेन निकाल कर उसके सीने पर लगातार मारता है, जब तक उसकी हँसी बंद नहीं हो जाती आदमी उसके सीने में तब तक पेन से वार करता रहता है।

सड़क पर पड़ा हुआ वह शख्स अब लाश में बदल जाता है। पूरी सड़क उसके खून से ढक जाती है।

तभी वह आदमी देखता है, जमीन पर पड़ी हुई लाश का चेहरे बिल्कुल उससे मिलता है। आदमी को तेज आलार्म की घण्टी सुनाई देती है। वह अचानक बिस्तर से सकपका कर उठता है। खुद को बार-बार छूकर देखता है। वह समझ जाता है, ये सपना है। क्योंकि कल के सपने में उसने बचपन को मारा था।


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