STORYMIRROR

chandraprabha kumar

Action

4  

chandraprabha kumar

Action

होनहार बिरवान के होत चीकने पात-५

होनहार बिरवान के होत चीकने पात-५

2 mins
234

अनीशा एम.बी.बी.एस. के फ़ाइनल ईयर में थी और पढ़ाई के साथ - साथ उसे अस्पताल में भी काम करना होता था। एक बार जब वह अस्पताल में ड्यूटी कर रही थी , उसने देखा कि एक छोटा लड़का अस्पताल में भर्ती हुआ, उसके एक पैर में परेशानी थी।उस लड़के के पिता साथ में थे।उस लड़के को कई टैस्ट करवाने के लिये कह दिया गया। 

लड़के के पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, फिर भी उन्होंने बताये गये सारे टैस्ट करवाये। कुछ दिन लड़का अस्पताल में रहा। उसे दवाई भी दी गई। इसके बाद एक दिन राउण्ड देते समय अनीशा को मालूम हुआ कि लड़के के आपरेशन की तैयारी हो रही है। लड़के का पैर घुटने के पास से काट दिया जायेगा। अनीशा की सहानुभूति जाग्रत हुई। उसने मालूम किया कि क्या पैर काटना ज़रूरी था और क्या लड़के को बता दिया गया था कि उसका पैर काटा जायेगा। उसे पता चला कि लड़के को या उसके पिता को पैर काटने के बारे में कुछ नहीं बताया गया था। अनीशा के यह जानकर धक्का सा लगा। 

 लड़के को बिना कुछ बताये या समझाये पैर काटना ठीक नहीं था। पता नहीं लड़का इसके लिए तैयार था या नहीं। या वह कुछ दिन दवाई लेकर देखना चाहता था। 

अनीशा ने लड़के व उसके पिता को बता दिया कि आपरेशन से लड़के का पैर काटा जायेगा और यदि वे चाहें तो दूसरी जगह जाकर सेकेंड ओपिनियन ले सकते हैं। या कुछ दिन दवाई लेकर देख सकते हैं। 

यह सुनकर लड़के व उसके पिता ने इस जानकारी के लिए अनीशा का धन्यवाद दिया। वे अभी पैर कटवाने को तैयार नहीं थे। कुछ दिन दवाई लेकर देखना चाहते थे। और दूसरे डाक्टर को भी दिखाना चाहते थे। लड़के का पैर कटने से वह अपंग हो जाता और ज़िन्दगी भर इसे झेलता। उसे अनभिज्ञ रखना ठीक नहीं था। 

 अस्पताल से डिस्चार्ज कराने में अनीशा ने उनकी मदद की। इस उपकार के लिये उन्होंने अनीशा की सहृदयता का आभार माना। 


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Action