Harrshit Guptaa

Romance Inspirational Children


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Harrshit Guptaa

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हमनफ़स

हमनफ़स

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तवज्जो हर उम्र में अच्छी लगती है, फिर चाहे वो आपको किसी भी लम्हे के रूप में मिले... उसका अहसास आपको ताउम्र अपना मुरीद बना कर रखता है...


कुछ ऐसी ही एक खूबसूरत याद अमान के दिलों में बसती थी, जिसकी चोट के निशान तो उसके गालों पर थे, पर उसे जो पल मिले उसका दर्द उसके दिल में हमेशा यादगार बनकर रहा।


गर्मियों का महीना था, आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले अमान के स्कूल का आज आखरी दिन था, प्रिंसिपल महोदय ने अगले दिन से ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा कर दी थी, जो हम 90ज के जमाने में हुआ करती थी, आज के जमाने के बच्चों के नसीब में वो सुख कहाँ... 


जैसे ही स्कूल की आखरी घंटी बजी अमान ने अपना बस्ता उठाया और झूमते गाते अपनी ही धुन में मस्त मलंग चला आ रहा था घर को अपने.. आखिर खुश क्यों ना होता वो, दादी माँ के घर जाने की पूरी तैयारी कर रखी थी उसने, उसकी दादी माँ उसकी खुशियों की तिजोरी थीं, 


जो मस्ती और कांड करने की कसक शहर में उसकी अधूरी रहती थी वो सब वो गांव आकर पूरी करता था, न कोई रोक - न कोई टोक... हमेशा हांथो में वीडियो गेम पकड़े रहने वाला अमान गांव आते ही टायर पकड़ लेता था, और चलाते चलाते आम के बगीचों मे घुस जाता था... 


देसी घी में डूबी उसकी दादी माँ के हांथो की हथपोई रोटियां हो, प्योर दूध से बना मावा या भरी दोपहरी में सतुआ खाने की ललक... बस उसकी थाली में आने की देर होती थी, और एक पल में ही वह उसके पेट में होता था, घर में ही किराने की छोटी सी दुकान भी थी, उसके जी में जब भी आता चुपके से अपनी जेब में कभी ऑरेंज वाले कम्पट या चूरन भरकर सरक लेता था... कभी पकड़ा भी जाता तो दादी माँ के आँचल में जाकर छुप जाता था...


पर कहते हैं ना जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु भी एक दिन निश्चित है, 


यही विधि का विधान है 


अमान की छुट्टियाँ खत्म होने ही वाली थीं कि एक दिन उसकी दादी माँ ने अपनी आखरी नींद ली, और वह अगले दिन का सूरज नहीं देख सकीं.. अमान का दिल सबसे ज्यादा रो रहा था क्योंकि वह दादी के साथ ही सोया था, उसकी दादी ने कब इस संसार को त्याग दिया और उसे एक पल की खबर भी ना लगी


रीति रिवाज, अंतिम संस्कार व तेरहवीं आदि की रस्म होते होते काफ़ी दिन बीत गये, इधर अमान का स्कूल खुल चुका था और वह हर दिन अपने सैलेबस में पिछड़ता चला जा रहा था... जैसे ही वह अपने शहर लौटा अगले दिन फौरन उसने स्कूल का रुख किया.. अमान अपनी क्लास का टॉपर था इसलिये उसकी परेशानी जानने के बाद किसी भी शिक्षक ने उसे कुछ नहीं कहा, पर जल्द ही सैलेबस पूरा करने की हिदायत जरूर दी, चौबीस वर्षीय पारुल जोशी जो अमान की सोशल साईंस की शिक्षिका थीं, उन्होंने उसी वर्ष स्कूल ज्वाइन किया था, व अमान और पारुल जोशी दोनों ही एक दूसरे के व्यवहार से परिचित नहीं थे, उसके क्लासमेट्स ने उसे उनके खौफ के बारे में पहले ही आगाह करा दिया था... पांचवे पीरियड में जैसे ही पारुल जोशी ने क्लास में अपने कदमों को रखा, एक सुर में गुड मार्निग की बांग के साथ पूरा क्लास खड़ा हो गया ।


अपने पल्लू को सीधा करते हुए उन्होंने सभी से अपनी तशरीफ़ रखने का अनुरोध किया, 


चलो सभी लोग अपने अपने नोट्स निकालो और कल जो मैने होम वर्क दिया था उसे चेक कराओ, पारुल जोशी ने कहा..


अमान का जब नंबर आया तो उसकी कॉपी एक दम कोरी थी, होमवर्क तो छोड़ो पिछले एक महिने मे पढ़ाया सारा सैलेबस ही गायब था... पर आज वह उसका पहला दिन ही था, इससे पहले अमान अपनी सफाई में कुछ पेश कर पाता, एक ज़ोर के

तमाचे ने उसके कानों को बंद कर दिया था, दहशत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस तमाचे से उसके दो तीन कदम पीछे हो गये थे.. और वह गिरते गिरते बचा था, हालांकि पारुल जोशी को उसकी हकीकत पता चलने के बाद आत्मग्लानी भी हुई पर तीर अब कमान से निकल चुका था, अमान ने इस तमाचे को अपनी ईज्जत पर ले लिया, जैसे स्कूल में उसका सालों का बनाया रुतबा तबाह हो गया था, जैसे ही वह स्कूल से लौटा न ही उसने कुछ खाया और ना ही खेलने गया बस कॉपी किताब लेकर बैठ गया छूटा हुआ सैलेबस पूरा करने, एटलीस्ट पारुल जोशी के सबजेक्ट का वह हर हाल में आज कैसे भी कर के पूरा करना चाहता था।


अपनी रातों की नींद व खाने पीने को त्यागकर वह आखिर कार पारुल जोशी का सबजेक्ट पूरा करने में कामयाब रहा, कड़क स्त्री व चमकते जूतों के साथ आज उसने पूरे आत्मविश्वास के साथ स्कूल में कदम रखा था, जैसे ही आज क्लास में पारुल जोशी ने एन्ट्री ली वह बिना एक पल गँवाए उनके पास अपनी कॉपी चेक कराने पहुंचा, पारुल जोशी को इतनी जल्दी अमान से सैलेबस पूरा करने की उम्मीद नहीं थी, और वह वैसे ही पिछले दिन उस पर हांथ उठाने के गिल्ट में थी, थोड़ी सी गिल्ट अमान ने सैलेबस पूरा कर के और बढ़ा दी थी, अपनी आंखो को झुकाए उन्होंने उसकी कॉपी चेक की और रिमार्क में खूबसूरत हैण्डराईटिंग के लिये वैरी गुड भी दिया, शायद यह उनकी तरफ से अपना एक गिल्ट थोड़ा हल्का करने का तरीका भी था, पर अमान ने उनकी तरफ देखा भी नहीं, उसकी कॉपी को उसके हांथो मे थमाते हुए जैसे ही उन्होंने अपने हाथ अमान के गालों की तरफ सेहलाने के लिये बढ़ाया उसने उन्हें इग्नोर कर दिया, पारुल जोशी उसके इस व्यवहार से अन्दर से टूट गयीं।


वह रोज़ अमान को कभी पाठ सुनाने या ब्लैक बोर्ड पर कुछ लिखने के लिये बुलातीं और उससे बात करने के बहाने तलाशती पर उनकी उम्मीद पर पानी फिर जाता था..


एक दिन की बात है, लंच का वक्त था पर अमान अपनी दादी की याद में प्लेयिंग ग्राउंड में बैठा रो रहा था, तभी पारुल जोशी उसे अकेला बैठा देखकर उसके करीब आईं और उससे रोने का कारण पूछा, अपने आंसुओ को पोछते हुए वह उन्हें इग्नोर करके जाने ही वाला था कि किसी फिल्मी सीन की तरह पारुल जोशी ने अमान का हांथ थाम कर उसे रोक लिया, पर जब उन्हें थोड़ा असहज लगा तो उन्होंने उसका हाथ छोड़ दिया व उसे कुछ पल उनके पास रुकने के लिये कहा, उन्होंने पुनः उससे उसके रोने का कारण पूछा व उस दिन उस पर हांथ उठाने के लिये कान पकड़ कर सॉरी बोला, अपनी टीचर के इस बर्ताव से अमान को थोड़ा अच्छा फील हुआ व उसने अपनी दादी को मिस करने वाली बात उन्हें बता दी, उन्होंने उसे सॉरी बोला व कहा बस इतनी सी बात चलो आज मैं तुम्हें किसी से मिलाती हूं, उन्होंने उससे उसके घर का नम्बर मांगा व उसकी माँ की इजाज़त ली उसे अपने घर ले जाने के लिये...


अमान के लिये किसी टीचर से उसे इतना क्यूटली ट्रीट होना थोड़ा अनबिलीवबल तो था पर वह उन पर भरोसा कर सकता था, स्कूल फिनिश होते ही उन्होंने अपनी कार निकाली और दोनों उसमें बैठ कर चल निकले, तभी रास्ते मे उन्हें आइसक्रीम वाला दिखा, अपनी कार पार्क करके वह आराम से आइसक्रीम का लुत्फ़ उठाने लगे.. पारुल धीरे-धीरे उसे घुलने मिलने की कोशिश कर रही थी, शायद अमान ने भी अपनी टीचर के बारे में कुछ ज्यादा ही गलत सुन रखा था अपने दोस्तों से, आज उसे इस बात का अहसास हो रहा था... दोनों ने खूब मस्ती की साथ में, फिर पारुल उसे अपने घर ले गयी, व उसे अपनी दादी से मिलाया जो उनके साथ ही रहती थी, उन्हें देखकर अमान को अपनी दादी की याद आ गयी, पारुल ने दादी को अमान के बारे में बताया, फिर अमान, दादी माँ और पारुल ने ढेर सारी बातें की, उसकी दादी ने अपने हांथो से अमान के लिये सेवइयां बनाई, व जब कभी उसे दादी की याद आए तो पारुल के साथ घर आने को कहा बेझिझक, इसे तुम अपना ही घर समझो बेटा, अब उसे अच्छा फील हो रहा था... अपनी लिटिल फिंगर आगे करते हुए पारुल ने अमान से कहा ! 

सो वी आर फ्रैण्ड्स ?

एक पल में ही अमान ने हां भर दी, फ्रैण्ड्स 

वापस लौटते हुए उसने दादी माँ को बाय बोला और पारुल ने उसे बहुत सारे ट्वायज और चॉकलेट्स गिफ्ट की...


रोजाना पारुल कभी खुद तो कभी दादी माँ उसके लिये कुछ ना कुछ बना कर भेजती रहती थी, दोनों की बान्डिंग इतनी स्ट्रांग हो चुकी थी कि सारे स्कूल में इसके चर्चे थे.. पर अमान के पढ़ाई में होशियार होने की वजह से कोई उस पर उंगली नहीं उठा पाता था, 


अमान आठवीं से अब हाईस्कूल पास आऊट होने वाला था, देखते ही देखते कब वक्त उड़ गया और तीन साल बीत गए, उन दोनों को इस बात का अहसास ही ना रहा, टीचर और स्टूडेंट्स के रिश्ते से ज्यादा वो अब एक दूसरे के बेस्टीज़ थे, शॉपिंग हो या आउटिंग पारुल अमान को हमेंशा अपने साथ ले जाती, एक दूसरे के बगैर दोनों का एक पल रहना भी मुश्किल होता था...अब अमान उसके परिवार का एक अभिन्न हिस्सा था


एक दिन पारुल स्कूल नहीं आई, अमान ने उसे फोन लगाने की कोशिश की पर उसका फोन नॉट रीचेबल जा रहा था, वह परेशान था कि कहीं पारुल की तबियत खराब तो नहीं, उसने तुरंत ऑटो किया और सीधा उसके घर पहुंच गया, वहां पहुंच के वह देखता है कि पारुल को देखने वाले आए हुए हैं और वह उनके बीच ही बैठी हुई है, 


हॉय कितनी प्यारी लग वह रही है वो, अमान ने मन में ही सोचा


दादी ने उसे अपने पास बुलाया और मेहमानों की खातिर दारी करने के लिये कहा..


मेहमानों के जाने के बाद वह पारुल से नाराज़ होकर बैठ गया, कि उसने उससे इतनी बड़ी बात छुपाई, 


सॉरी बाबा ! पारुल ने उससे कहा, प्लीज यार मुझे भी नहीं पता था, यह सब दादी का ही प्लान था, मैने आज तक कभी छुपाया है तुमसे कुछ ?


एक बड़ी डेरीमिल्क और चिकन बिरयानी का चढ़ावा चढ़ाया पारुल ने अमान को, तब जाकर साहब का गुस्सा ठंडा हुआ...


ठीक है ठीक है ज्यादा रिश्वत नहीं लेता मैं ! अमान ने हंसते हुए कहा, 


तीन महीने बीत चुके थे.. अगले हफ्ते पारुल की शादी है, और उसका उस स्कूल में आज आखरी दिन था, अमान ने पारुल को फेयरवेल देने के लिये अपनी पूरी क्लास बेहद ही खूबसूरत डेकोरेट की हुई थी, व उसके लिये केक कटिंग सैरेमनी भी आर्गेनाइज की थी, स्कूल के बहौत से स्टूडेंट्स और टीचर्स उस केक की पहली बाईट के लिये वेटिंग लिस्ट में थे, पर यह तवज्जो मिली सिर्फ अमान को...


फूलों से सजा खूबसूरत सा बुके देते हुए एक खत उसने उसी बुके में छोड़ दिया था, घर जा कर जब पारुल ने उस खत को खोला तो उसने सीधा अमान को फोन किया और घर आने के लिये कहा...


कुछ ही पलों में अमान उसकी नज़रों में गुनहगार की तरह खड़ा हुआ था, कुछ पल पारुल ने बनावटी लहजे में उसकी तरफ गुस्से से देखा और फिर ज़ोर से हंस दी... 


उसने अमान का दिया हुआ खत दादी को दिखाया, उसमें लिखा हुआ था.. आई लव यू , बट एज़ अ फ्रेंड 🥰


यह शायद दुनिया का ऐसा पहला खत या प्रपोजल था जहां, आई लव यू एज़ अ फ्रेंड बोलने पर किसी का दिल नहीं टूटा था...


पारुल उसके करीब आई, दोनों के बीच बस अब सांसो की ही जगह थी, उसके माथे को प्यार से चूमते हुए उसने उसे गले से लगा लिया था...


अमान की आंखो में आंसुओ ने अपनी जगह बना ली थी, शायद उसकी जिंदगी की सबसे प्यारी दोस्त अब किसी और के घर की रौनक बनने वाली थी...


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