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Irfan Alauddin

Abstract Romance

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Irfan Alauddin

Abstract Romance

हम तुम मिले

हम तुम मिले

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हम तुम मिले दिल हैं खिले 

कैसे मुझे तुम हो मिले 

ये जो हुई हैं बात जो 

उस से मिले दिल हैं खिले 


तुम ग़ैर थे मेरे लिये 

जाने न कैसे दिल जुड़े 

मुहब्बत ऐसी हो गई हैं 

अब ना मुझे हैं चैन मिले 


आ जाए तू तो मैं खुश हूं

मुस्कान हैं लब पे खिले 

इऱफान हैं तेरा मजनु

देख कर तुझे वो हैं हँसे।


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