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Vimla Jain

Inspirational

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Vimla Jain

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हिमालय पर्वत सा अडिग सागर सा गहरा हमारा प्यार

हिमालय पर्वत सा अडिग सागर सा गहरा हमारा प्यार

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वह हमेशा शांत रहता गंभीर रहता और कम बोलता था। पर बोलने में बहुत ही विनम्र और बड़ों का रेस्पेक्ट करने वाला बहुत अच्छा इंसान था।सब कहते इसकी बीवी अगर बोलने वाली होगी तो दोनों की कैसे पटेगी ।क्योंकि यह तो दिन भर में 2 शब्द भी नहीं बोलता है ,बिना काम के।थोड़े समय बाद में उसकी शादी हो गई ,और जैसा कि सब बोलते थे उसकी पत्नी बहुत ही अच्छे नेचर वाली, सोशल, सबसे बड़ा अच्छा संबंध रखने वाली ,और बहुत बोलने वाली मिली।

वह ज्यादा नहीं बोलता था तो पत्नी को बड़ा अटपटा लगता था ।क्योंकि वह बहुत अच्छे घर से आई थी ।जहां सब आपस में खूब हंसी मजाक करते, बोलते और मस्त रहते थे ।

जहां वो आई ससुराल में वहां कोई एक दूसरे से ज्यादा बात नहीं करता था ।और तो और उसका पति भी ज्यादा नहीं बोलता। बस खाना खा लिया, चाय पी लिया, यह काम है, यह कर दो ,वह कर दो ,बस इससे ज्यादा कभी वह कोई बात नहीं करता था ।

वह सोचती यह मैं कहां आकर फंस गई कभी-कभी तो उसको ऐसा लगता कि उसका पति उसको प्यार नहीं करता है ।उसमें कोई जज्बात नहींहै, मगर वह वापस सोचती कि नहीं यह इनके परिवार में सभी की आदत लगती है ,कोई एक दूसरे से ज्यादा बात नहीं करता है। एक दूसरे के बारे में कुछ ज्यादा जानता नहीं है ।पसंद, नापसंद कुछ नहीं तो यह भी शुरू से ऐसा ही हो गया है।

इसी तरह दिन बीत गए, महीने बीते ,साल बीते ,एक बार उसकी पत्नी को फेशियल पाल्सी हो गया ,जोकि उसकी सुंदरता पर अटैक था। उसको ऐसा लगा मानो उसकी दुनिया ही लूट गई हो ,लगा अब मेरा पति और घरवाले मेरा साथ नहीं देंगे ।मगर हुआ उससे उल्टा उसके पति ने उसको बहुत प्यार दिया ,बहुत हौसला दिया, बहुत हिम्मत दी ,और वह थोड़ी दुखी हो गई थी, तो उसने उसको प्यार से बोला समझाया कि "मैं कम बोलता हूं ,इसका मतलब यह नहीं है कि मैं तुमसे प्यार नहीं करता हूं ,मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। तुम मेरी मेरे परिवार के इतनी सेवा करती हो इतना ध्यान रखती हो सब से इतना प्यार से रहती हो। बस बोलना हमारी आदत में नहीं है, इसलिए मैंने तुमको कभी कहा नहीं पर आज मैं तुमको कहता हूं, कि मेरी जिंदगी का पहला,और आखिरी प्यार तुम ही हो ।" इतना सुनकर उसकी पत्नी की आंखों में पानी आ गया ,जो हर्षके आंसू थे ।

उसकी पत्नी को इतनी खुशी हुई ,वह सोचने लगी जरूरी नहीं है कि कहना ही प्यार होता है ।कभी-कभी अकथ्य प्यार भी होता है। जो कि इतना गहरा होता है जिसकी गहराई सागर के समान होती है ।अब उसको जिंदगी और उसके पति से कोई शिकायत नहीं थी ।और वह बहुत हर्षोल्लास से रहने लगी।



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