Dr. Shikha Maheshwari

Tragedy Inspirational


4.3  

Dr. Shikha Maheshwari

Tragedy Inspirational


गिव एंड टेक

गिव एंड टेक

12 mins 58 12 mins 58

“भईया पानी की बोतल देना।” पानी की बोतल हाथ में लेते हुए अमिता ने कहा, “कितने रूपए हुए?” दूसरे व्यक्ति के हाथ में पेप्सी पकड़ाते हुए दुकानदार ने कहा, “पानी के मैडम जी बीस रुपए हुए हैं।” अमिता पर्स में कुछ टटोलती है पर्स की एक जेब में से दस रुपए का नोट निकालती है, दूसरी जेब में से एक-दो रुपए के सिक्के निकालकर गिनती है। “ये लो भईया बीस रुपए। ”दुकानदार बीस रुपए लेकर गल्ले के ड्रावर में डाल देता है। अमिता वहीँ पास रखी बेंच पर बैठकर रुमाल से पसीना पोंछती है। बोतल का ढक्कन खोलती है और गटागट आधी बोतल पानी एक साँस में पी जाती है। बोतल का ढक्कन वापस लगाकर बोतल को निहारते हुए सोचती है, क्या दिन आ गए हैं कि इतना-सा पानी बीस रुपए का बिक रहा है। बढ़िया है यह धंधा भी बढ़िया है। साथ में इंसान १-२ लीटर पानी ही लेकर चलेगा। कभी न कभी तो उसे खरीदना ही पड़ेगा। हर जगह मुफ्त का पानी या नल या पयाऊ तो उपलब्ध नहीं होता न। अमिता बोतल को बैग में रख देती है। बैग की चेन बंद करते हुए स्वयं से कहती है, “चलो अमिता हो गया आराम, अब घर चला जाए। ” अमिता बेंच का सहारा लेकर उठती है और धीरे-धीरे चलना प्रारंभ करती है। सुबह से चलते-चलते पैर के तलवों ने जवाब दे दिया है। अब तो स्टेशन भी चलकर ही जाना पड़ेगा। टैक्सी लायक पर्स में पैसे ही नहीं बचे है।

अमिता कछुए की सी चाल चलती हुई पसीना पोंछती हुई आख़िरकार स्टेशन पहुँच गई। स्टेशन पर भी अमिता पंखे के नीचे रखी बेंच पर बैठ जाती है। मई की गर्मी में सिर चकराने लग गया है। पर्स में से बिस्कुट का पैकेट निकालती है और बिस्कुट खाने लगती है। बिस्कुट का पैकेट पढ़ती है, उस पर लिखा है गुड डे। अमिता सोचती है, काहे का गुड डे और दो बिस्कुट खाकर वापस पैकेट बंद कर बैग में रख देती है। वापस पानी बोतल निकाल दो घूँट पानी पीती है और बोतल बंद कर बैग में रख देती है। स्टेशन पर बहुत भीड़ है। चारों तरफ चिल्ल-पों अमिता कान बंद कर वहीँ बैठ जाती है। जब ये ट्रेन चली जाएगी। तब दूसरी ट्रेन में जाऊँगी। पर भीड़ तो वापस इतनी ही आ जाएगी। अमिता खड़ी होकर इंडिकेटर देखती है। दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर ट्रेन लगी है। अमिता स्टेशन की सीढ़ियां चढ़ दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर उतर जाती है। ट्रेन आने में ३ मिनट बाकी हैं। वहीँ खड़ी हो जाती है। ट्रेन आने के बाद उसमें आराम से खिड़की के पास वाली सीट पर बैठ जाती है। अब आराम से डाउन मारकर घर तक बैठे-बैठे जाऊँगी। अमिता आँखें बंद कर लेती है। पर उसे नींद नहीं आती है। आसपास कुछ लोग बैठे हैं। खर्राटे की आवाज़ सुनते हुए सोचती है, “इन लोगों को ट्रेन में नींद कैसे आ जाती है। इतनी ट्रेन की आवाज़, हर सेकण्ड में अगला स्टेशन का नाम तीन भाषाओँ में सुनना, कभी समोसे वाले की आवाज़, कभी चिप्स, कभी क्लिप्स, कभी दुपट्टे पता नहीं क्या-क्या बिकने लग गया है। इतनी आवाज़ों में कोई खर्राटेदार नींद कैसे ले सकता है। ”अमिता गोदी में बैग रख हाथ से टाइट पकड़कर खिड़की का सहारा लेकर आँखें मूंदे बैठ जाती है। मन ही मन सोचती है बैठी रहो अमिता, वैसे भी तुम्हें तो ट्रेन में नींद नहीं आने वाली है। कुछ देर बाद जब ट्रेन रूकती है अमिता आँखें खोलती है और बैग में से एक पुस्तक निकालती है। अनमने मन से पुस्तक पढ़ने का प्रयास करती है। पन्ने उलटती-पलटती है और पुस्तक बंद कर बैग में रख देती है। “आज कुछ पढ़ने का बिलकुल मन नहीं है।” अमिता फिर से आँख बंद कर बैठ जाती है।

   “आइए बैठिये। ”

   “थैंक यू सर। ”

   “तो मिस अमिता आपको कितने साल का अनुभव है?”

   “माफ़ कीजिएगा मेरे पास अनुभव नहीं है। ”

   “आपका रिज्यूमे तो काफी इम्प्रेसिव है। ”

   “थैंक यू। ”

   “आपको वर्क प्रोफाइल मालूम है?”

   “जी हाँ एच.आर. ने बता दिया था। ऑन पेपर मेरे पास कोई अनुभव नहीं है। लेकिन ये सब काम मैं पहले दोस्तों का, जान-पहचान वालों का फ्री में कर चुकी हूँ। ”

   “लेकिन आपके पास कोई एक्सपिरियंस सर्टिफिकेट नहीं है। ”

   “जी नहीं। दोस्तों की मदद का सर्टिफिकेट होता है क्या?”

   “ठीक है। अमिता जी हम आपको फोन कर के इत्तला कर देंगे। ”

   “थैंक यू सर। ” अमिता कुर्सी से उठती है केबिन से बाहर निकलने के लिए दरवाज़ा खोलती है और पुनः बंद कर देती है। मुड़कर सामने बैठे व्यक्ति से कहती है, “सर क्या मैं कुछ कह सकती हूँ?”

   “जी ज़रुर कहिये। ”

   “मुझे पता है आपने मुझे रिजेक्ट कर दिया है। ”

   “वी विल कॉल यू मिस अमिता। ”

   “रुकिए सर, मेरी बात अभी ख़त्म नहीं हुई है। सो मैं यह कह रही थी कि आप रिजेक्ट ईमेल करने का कष्ट न कीजिएगा। क्योंकि मुझे पता है कि आपने मुझे सिलेक्ट नहीं किया है। ये बात का भी मेरे पास कोई सर्टिफिकेशन नहीं है। लेकिन अनुभव से कह रही हूँ। आज मेरा ये ३५ वाँ इंटरव्यू था। पिछले ३४ इंटरव्यू से यही बात सुनती आ रही हूँ। अगर कोई रखेगा ही नहीं तो अनुभव कहाँ से आयेगा?”

   “मिस अमिता। ”

   वेट सर, लेट मी फिनिश। तो डिअर सर आप अपनी पहचान वालों को ही रखिये। क्योंकि मैंने अभी बाहर बैठे देखा था कि एक महिला मेरे सामने वेटिंग रूम में बैठी थी। उसकी कोई मित्र यहाँ काम करती है।आपकी एम्प्लोयी ने उस महिला से कहा, “डरो मत मैं हूँ ना, मैं तुम्हें लगवा दूँगी। अनुभव नहीं है तो क्या हुआ मैं हूँ ना। ”तो डिअर सर ये है आपके ऑफिस की असलियत। थैंक यू। और आपको जो कहना हो अपने एम्प्लाइज से कहते रहना। आपके सवाल और आपके ईमेल का उत्तर देने का मेरे पास फालतू समय नहीं है। अमिता दरवाज़ा खोलकर केबिन से बाहर निकल आती है। और सधे हुए कदमों से लिफ्ट की ओर बढ़ती है। लिफ्ट का बटन दबाती है। दरवाज़ा खुलता है।अमिता लिफ्ट में जाती है और ग्राउंड फ्लोर का बटन दबा देती है। लिफ्ट का दरवाज़ा बंद हो जाता है। कुछ ही सेकण्ड में अमिता ग्राउंड फ्लोर पर पहुँच जाती है। लिफ्ट खुलती है। अमिता बाहर आ जाती है। लिफ्ट का दरवाज़ा अपने आप बंद हो जाता है। काँचनुमा चमचमाती बिल्डिंग से अमिता बाहर खुली हवा में आकर साँस लेती है। ए.सी. में ऐसा लग रहा था जैसे कोई गला घोंट रहा हो। बड़ी घुटन हो रही थी। अमिता की आँख खुल जाती है। हम्म! ट्रेन भर गई है। शायद से लास्ट स्टॉप आ गया है। खिड़की से बाहर देखती है, हाँ लास्ट स्टॉप ही है। अब यहाँ से वापस ट्रेन बन कर चलेगी। घर तक आराम से बैठकर जाऊँगी। एक महिला ने कंधे पर हाथ मारते हुए कहा, “कहाँ उतरना है?” अमिता ने कहा, “लास्ट। ” “अग्ग बाई सगडे लास्ट आहे। आज पुनः उभे राहून ज्यावा लागतील। ” अमिता पुनः आँख बंद कर लेती है। ट्रेन की चिल्ल-पों से अमिता को बेहद चिढ़ है। हर स्टेशन पर भीड़ उतरती है और हर स्टेशन से उतनी ही भीड़ चढ़ती है। “क्लिप ले लो क्लिप। ” अमिता की आँख खुल जाती है। वह देखती है रंग-बिरंगे क्लिप, रबड़, बिंदियाँ, हेअरबैंड। पर जैसे ही पर्स पर हाथ लगाती है उसे याद आता है आज पर्स में पैसे नहीं है कि रबड़ या कुछ भी ख़रीदा जाये। “देख लो मैडम जी। -लड़के ने कहा। “नहीं भईया। ” अमिता ने अनमने मन से कहा और खिड़की से बाहर देखने लगी। अच्छा हुआ इस ट्रेन से आई। वरना वही खड़े-खड़े जाओ। वैसे ही पैर इतने दर्द कर रहे हैं। कभी-कभी अमिता अपनी सीट किसी बुजुर्ग महिला को दे भी देती है। लेकिन आज उसकी खुद की हालत इतनी बुरी है कि कोई घर तक पहुँचा दे।

   अमिता बैग से मोबाइल निकालती है। कुछ मैसेजस पढ़ती है और फिर से मोबाइल बंद कर बैग में रख देती है। भीड़ धीरे-धीरे कम हो रही है। ट्रेन का लास्ट स्टॉप आ गया है। अमिता सब के उतर जाने के बाद आराम से अंतिम में उतरती है। थके पैरों से घर की तरफ बढ़ती है। आख़िरकार घर की घंटी बजती है। मम्मी दरवाजा खोलती है। “क्या हुआ?”

   “जो हर बार होता आया है। मुझे पानी और चाय दे दो। ”अमिता बाथरूम में नहाने चली जाती है। वैसे भी पूरा शरीर चिपचिप पसीने से तरबतर हो गया है। अमिता को अब चैन की राहत मिली है। अमिता बाथरूम से बाहर आती है। तब तक मम्मी ने चाय बनाकर टेबल पर रख दी है। अमिता बालों का जुड़ा बनाकर पिन लगाती है और बालकनी में बैठकर चाय पी रही है। नीचे भी चिल्ल-पों ट्रैफिक की आवाज़, बच्चों के स्कूल, क्लासेस, ट्यूशन छूटने का समय हो गया है। उनकी आवाजें। अमिता चाय पीकर उठती है और कप रसोई में रख देती है। अपने कमरे में पंखा चलाकर बिस्तर पर आँखें मूँद कर लेट जाती है। नहाने से पैरों का दर्द कम हो गया है। शरीर भी तरोताजा लग रहा है। लेकिन मन और दिमाग में वही उथल-पुथल और इंटरव्यू की बातें चल रही हैं। अमिता की आँख लग गई है। “अमिता उठ, दिन छिपे कोई सोता है क्या?” मम्मी ने अमिता को हिलाते हुए कहा। अमिता करवट बदलकर सो जाती है। “अमिता उठ खाना खा ले। ” अमिता आँख मसलते हुए घड़ी की तरफ देखती है। हे भगवान ८.३० बज गए। खिड़की से बाहर देखती है। अंधेरा है। दुकानों की लाइट्स जल रही हैं। मिता खाना खाकर वापस सो जाती है।

   अमिता सुबह देरी से उठती है। मोबाइल में समय और तारीख देखती है। ओह शिट! आज तो सरकारी पदों के लिए एग्जाम दिया था उसका रिजल्ट है। अमिता फटाफट तैयार होती है। ग्यारह बजे वेबसाइट खोलकर बैठ जाती है। भगवान से प्रार्थना भी कर रही है, “हे भगवान पास हो जाऊँ। प्लीज प्लीज प्लीज। ” रिजल्ट देखकर अमिता के हाथ पैर बिलकुल ठंडे पड़ गए हैं। हे भगवान! सिर्फ दो अंक से रह गई। हर बार यही होता है एक-दो-तीन मार्क्स से रह जाती हूँ। हैलो मैं अरुण बोल रहा हूँ। ”

   “अंकल जी नमस्ते। ”

   “बेटा आज रिजल्ट आने वाला है तुम्हारा, क्या हुआ?” अमिता ने रुआँसे स्वर में कहा, “अंकल मैं इस बार फिर दो अंक से रह गई”

   “ठीक है बेटा, अब क्या कहूँ। तुम पास हो जाती तो इंटरव्यू पैनल में तो मैं ही बैठने वाला था। तुम्हें इंटरव्यू में पास कर देता। कितनों को ऐसे ही लगवाया है। खैर अगली बार ज्यादा मेहनत करना। ”

   “हाँ अंकल। ”

   “अगली बार बैठोगी तो रोल नंबर मुझे बता देना। मैं पास करवा दूँगा। ”  “नहीं अंकल इसकी कोई जरुरत नहीं है। ”

   “अरे बेटा ऐसे ही बहुत लोगों को नौकरी मिली है। ”

   “नहीं अंकल रहने दीजिए। मैं आज के बाद ऐसी कोई परीक्षा दूँगी ही नहीं। पहले तो पढ़ाई करो, किताबें खरीदो, फॉर्म भरो, फ़ीस भरो १५०० रुपए और फिर १-२ मार्क्स से फेल हो जाओ और पास होने के लिए, नौकरी पाने के लिए ये सब पैंतरे अपनाऊँ। ये सब दो नंबर वाला जुगाड़ मुझसे न होगा और अब मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि बार-बार १५०० रुपए फॉर्म फीस भरूं। किताबें, आने-जाने का खर्चा करूँ। ”

   “सोच लो बेटा। ”

   “सोच लिया अंकल। ”

   “बेटा एक और तरीका है नौकरी पाने का। ”

   अमिता हलका सा खुश होकर पूछती है, “बताइए। ”

   “पाँच लाख भर दो। ”

   “क्या और क्यों?”

   “परमानेंट जॉब के लिए। ”

   अमिता ने व्यंग्यात्मक तरीके से हँसते हुए कहा, “अंकल पाँच लाख होते तो बात ही क्या होती। मेरे पास पाँच लाख क्या एक लाख भी नहीं है। ”

   “ठीक है बेटा। ”

   “नमस्ते और धन्यवाद अंकल। ”

   अमिता ने एक जॉब वेबसाइट पर अकाउंट बना रखा है। आज दूसरी वेबसाइट पर भी अपना अकाउंट बनाकर रिज्यूम अपडेट कर रही है। काश! यहाँ से कुछ हो जाए। न्यूज पेपर में जॉब क्लासिफाईडस में इतने सारे जॉब्स आये हैं। सब जगह अप्लाई कर देती है।

   “अमिता जी हम गुरूकुलम इंटरनेशनल स्कूल से बोल रहे हैं। आपका रिज्यूम हमें प्राप्त हुआ है। ”

   अमिता खुश हो जाती है। “जी मैडम कहिये। ”

   “आप कल इंटरव्यू के लिए सुबह ११ बजे आ सकती हो?”

   “जी मैडम। थैंक यू। ”

   अमिता पाँच सितारा होटल जैसी स्कूल की इमारत देखकर ठगी रह गई। सधे कदमों से स्कूल में प्रवेश करती है। होटल की तरह स्कूल में भी एंट्रेंस पर ही एक लाल लिपस्टिक लगाये, साड़ी पहने एक मोहतरमा बैठी हुई है। “मेरा नाम अमिता है। आज इंटरव्यू है। ”

   “लेट मी चेक मैडम। यस यू हैव इंटरव्यू एट शार्प ११ ए.एम.। प्लीज हैव ए सीट मैडम। वुड यू लाइक सम टी ऑर कॉफ़ी ?”

   “नो थैंक्स। ”अमिता ने कहा। अमिता आरामदायक सोफे पर बैठ जाती है। अमिता घड़ी देखती है ११.३० हो रहे हैं। अमिता उठकर रिसेप्शनिस्ट के पास जाती है। “मैडम इट्स ११.३० यू सेड शार्प ११ ए.एम.। ”

   “ओह सॉरी फॉर इन्कान्वीनियेंस। लेट मी चेक मैडम। ” “हैलो इंटरव्यू है। ” फोन रखते हुए कहती है। “मैडम यू कैन गो इन। ”

   अमिता, “थैंक यू मिस सोनाक्षी। ” अमिता उसकी साड़ी पर नाम लिखे बैच पर उसका नाम पढ़ते हुए कहती है।

   अमिता इंटरव्यू ऑफिस में प्रवेश करती है। बड़ा-सा हॉल उसमें बीसियों कुर्सी रखीं हैं और एक कुर्सी पर प्रिंसिपल बैठी है। “प्लीज हैव ए सीट मिस अमिता। ” अमिता अपना पर्स और फाइल टेबल पर रख कुर्सी पर बैठ जाती है। “क्या आप तैयारी से आई हैं?”

   “क्या मतलब?”

   “आई मिन टू से दैट पहले आप डेमो दे दीजिये, टेंथ क्लास में जाकर पढ़ा दीजिए। फिर आपका इंटरव्यू लेंगे। ”

   “श्योर मैडम। ” प्रिंसिपल कॉल बेल बजाती है। प्यून अन्दर आता है। “इन्हें टेंथ ई में ले जाओ और सोनाक्षी से टेंथ की बुक दिलवा दो। ” अमिता अपना सामान उठाकर प्यून के पीछे-पीछे चल देती है। सोनाक्षी, “आपको फिफ्थ चैप्टर पढ़ाना है। ” अमिता पुस्तक लेकर टेंथ ई में चली जाती है। अमिता लगातार आधा घंटा पढ़ाती है। बीच-बीच में प्रिंसिपल आकर राउंड लगा जाती है। अमिता आधे घंटे बाद पढ़ा कर कमरे से बाहर आ जाती है। प्रिंसिपल कमरे में जाती है। और बच्चों की राय पूछ कर बाहर आ जाती है। “आइए मिस अमिता ऑफिस में चलते हैं। ” अमिता प्रिंसिपल के पीछे-पीछे ऑफिस में जाने लगती है। चारों तरफ हरियाली और एक से एक महँगे पेड़ लगे हुए हैं। माली बढ़ी हुई घास की कटाई-छटाई कर रहा है। चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। हर बच्चा एक-सा दिख रहा है। स्कूल ड्रेस, हेयर एकदम टिपटॉप। योगा, स्वीमिंग पूल, म्यूजिक क्लासरूम, क्राफ्ट क्लासरूम, हर क्लास के ए टू एम डिविजन बने हुए हैं। हर क्लास में ५० बच्चे हैं। अमिता फैसिलिटीज देखकर चौंक गई है। वह खुद तो एक सामान्य से स्कूल में पढ़ी है। तब यह सब कहाँ था। १०० रुपए महीना फ़ीस और अब एक साथ साल का ५० हजार से १ लाख तक एक बार में ही ले लेते हैं। अमिता यह देखते-देखते ऑफिस में पहुँचती है। अमिता कुर्सी पर बैठ जाती है।

   “मिस अमिता आपका रिज्यूम काफी अच्छा है। ”

   “शुक्रिया। ”

   “आपके मार्कशीट एंड सर्टिफिकेट भी काफी इम्प्रेसिव हैं। ”

   “शुक्रिया। ”

   “आपको परमानेंट नौकरी चाहिए या टेम्परेरी?”

   अमिता ने चौंकते हुए कहा, “क्या मतलब?”

   “मतलब यह कि टेम्परेरी टीचर्स को ५ से १० हजार वेतन मिलेगा और आपकी एक ग़लती पर आपको बिना नोटिस निकाला जा सकता है और परमानेंट के लिए...”

   “परमानेंट के लिए क्या?-अमिता ने पूछा। ”

   “आपको देना पड़ेगा। ”

   “क्या चाहिए आपको?”

   “आपके ये सारे डाक्यूमेंट्स हमारे पास जमा करने होंगे। ”

   “आप ज़ेरॉक्स ले लो, ओरिजनल क्यों चाहिए?” प्रिंसिपल ने बीच में टोकते हुए कहा, “साथ ही तीस हजार सैलरी पाने के लिए आपको दस लाख रुपए भरने होंगे। तो आप परमानेंट हो जाएँगी। ”

   “और दस लाख न भरूं तो?”

   “तो आप टेम्परेरी रहेंगी। ” अमिता अपना बैग और फाइल उठाकर खड़ी हो जाती है।

   “कहाँ चली आप?”

   “डिअर प्रिंसिपल, अगर दस लाख होते तो आपके पास इंटरव्यू देने नहीं आती। ”

   “तो आप इनस्टॉलमेंट में भर दीजिए। दो साल तक धीरे-धीरे दस लाख देते रहिये। लेकिन आपको सैलरी नहीं मिलेगी। जब दो साल बाद दस लाख पूरे हो जायेंगे तब आपको ३० हजार रूपए महिना हम देना शुरू कर देंगे। आफ्टर ऑल इट्स ‘गिव एंड टेक’। ”

   “थैंक यू मैडम आपकी स्कीम के लिए। आपकी नौकरी और आपकी सैलरी आपको मुबारक हो। ”अमिता गुस्से में कमरे से बाहर निकल जाती है।

ऑटो ऑटो.....अमिता ऑटो में बैठ जाती है। उसे स्मरण हो आता है कि उसके सभी मित्रों ने तीन से दस लाख तक पैसे भर-भर के इसी तरह नौकरी पाई है। पर अमिता पैसे भर कर कभी नौकरी नहीं करेगी।


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