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Neetu Shrivastava... ✍️✍️

Drama Children

4  

Neetu Shrivastava... ✍️✍️

Drama Children

घुटन

घुटन

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"ना मुझे आपके पैसे चाहिए और ना आपकी प्रॉपर्टी ..."

बस अब बहुत हुआ ...बहुत बर्दाश्त किए आप मुझको ...अब और नहीं मैं हमेशा के लिए आपके घर से आपके जिंदगी से जा रही हूँ पति नवीन से कह नंदनी मुट्ठी मे सिर्फ ऑटो भाड़ा लिया और उस बड़े से घुटन भरे बंगले से मायके के लिए निकल आई, नवीन आगे बढ़कर उसकों रोकने वह एक बार भी कोशिश नहीं किए इस बात से और अंदर तक टूट गई नंदनी। जब ऑटो में बैठी उसके आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे, और उसके कानों में नवीन के बोले एक एक शब्द गूंज रहा था जिसके वजह से वह घर छोड़ने पर मज़बूर हुई कुछ देर पहले छोटी सी किसी बात पर कैसे चुभते अंदाज में बोले थे ..

"पता नहीं मेरी अक्ल कहाँ चली गयी थी जब मैंने तुमसे शादी के लिए हाँ बोला था तुम मिडिल क्लास की मिडिल क्लास ही रहोंगी, चाहे मैं कितना भी अपने अनुसार के तौर तरीकों को सिखाऊँ, समझाऊँ लेकिन इस जन्म में तुम शायद नहीं सीख पाओगी, जीतने पैसे प्रॉपर्टी चाहों ले लो जहाँ चाहों जाकर रहो पर मुझे छोड़ दो प्लीज ...." सोचते और रोते कब ऑटो उसके घर के पास आकर रुकी उसे इस बात की अहसास भी नहीं रहा ...

घर में माँ और भाभी को साथ बैठे देख रोती हुई अपने दस सालों की शादी के सारी कथा व्यथा सुनाई भाभी पानी और कुछ खाने के लिए लाने रसोई मे गई ...

"माँ अब मैं ससुराल कभी नहीं जाऊँगी, आपके पास हमेशा के लिए आ गई हूँ , मैंने बहुत कोशिश किया पर अपनी शादी को जीवन भर नहीं निभा पाई, उस घुटन भरे माहौल में अब मेरा वहाँ रहना बहुत मुश्किल हो गया था .."

"बेटा सच में अब सहूलियत की कोई रास्ता नहीं बची क्या तुम सच मे नवीन जी को और उनके घर को छोड़ आई " ....नंदनी की माँ |

"हाँ माँ आपकों क्या लगा मैं अपने जीवन की इतनी बड़ी बात के इस फैसले को मज़ाक में बोली हूँ हरगिज नहीं यह मेरी अटल फैसला है और अब मैं इसे नहीं बदलूंगी .."

"लेकिन अब आगे तुमने क्या सोचा है अब क्या करोगी क्या तुम उस एशो आराम की जिंदगी को छोड़ फिर से इस आभाव भरी जिंदगी जी पाओगी ...?"

"वही जो शादी से पहले करती थी, बच्चों के स्कूल में पढ़ाऊँगी, सूबह और शाम को ट्यूशन क्लास लूँगी, आप सभी पर बोझ नहीं रहूँगी यहाँ मैं अपने खर्चे लायक पैसे कमा लूँगी "

"पर अकेली औरत को दुनिया नहीं जीने देती तुम सोच लो तुम्हारा अगला कदम क्या होगा?"... नंदनी की माँ

"मैं अकेली कहाँ हूँ क्या आप सब हैं नहीं मेरे साथ मुझे सहरा देने के लिए, जो करना था मैने बहुत सोच समझकर कर लिया अब अगला कदम नवीन को लेना हैं माँ .."

"लेकिन बेटा एक औरत को मर्द की सहारे की जरूरत होती है "

लेकिन क्यों माँ आप भी तो बिना किसी मर्द के सहारे हमारी परवरिश की है क्योंकि पापा तो मेरे जन्म के पहले ही बॉडर पर हुई एक दिन गोलीबारी में शहीद हो गए थे फिर मेरे लिए यह सब नियम ...?"

"मेरी बात कुछ और थी .."

"क्या थी आपकी बात जो मैं बचपन से देखते आई हूँ वह सब झूठ है?"

"नही बेटा मेरे कहने का मतलब यह है की मैं एक शहीद की विधवा थी और फिर मैं अकेली कहाँ थी मेरे साथ तुम्हारे दादा दादी, तुम और तुम्हारा भाई भी था पर तुम्हारी अभी तक न कोई औलाद हुई, तुम पति और उसका घर छोड़कर आई हो ..."

"इस नियम को तोड़ना जरूरी है माँ कोई बार- बार मुझे चोट पहुंचाए और मैं बार- बार उसे माफ़ कर फिर दुबारा अपने आप को चोट पहुंचाने की इजाज़त दूँ अब यह मुझसे नहीं होगा। मै अपना फैसला किसी कीमत पर नहीं बदलने वाली ..."

"मुझे लगता है नवीन भाई साहब पहले से बहुत बदल गए ये..." नंदनी की भाभी बातों की रुख को बदलते हुए।

"हाँ भाभी मैं भी बहुत बदल गई हूँ कभी -कभी इंसान को पिंजड़े में रहने की आदद हो जामुझे भी नवीन वर्मा की उस बड़े से पिंजड़े जैसे घर में रहने की आदद हो गई थी, लेकिन अब जबकि मैं यह चंद खुली हवा में आजादी की सांसे ले रही हूँ यह मुझें फिर वहां जीने नहीं देगी "

"ठीक है हम सब तुम्हारे साथ है तुम जैसी मर्जी जिओ ".. ..नंदनी की भाभी और मां दोनों उसके फैसले को गंभीरता से लेते हुए बोली।

नंदनी अपने मन में उमड़ते सवालों को माँ और भाभी से बताकर मन को शांत करने पास के पार्क में लगे बेंच पर आकर बैठ गई और बीते दिनों की पुरानी यादों को याद करने लगी,कैसे नवीन के साथ शादी का रिश्ता उसके लिए आया मैनेजमेंट की पढ़ाई के अंतिम बर्ष में थे जब नवीन के मम्मी पापा एक एक्सीडेंट में मारे गए थे। नवीन के पापा बहुत ख्याति प्राप्त बिजनेसमैन थे, नवीन उनका एकलौता बेटा उस हादसे के बाद वह अपने पापा का बिजनेस संभालने लगे हद से ज्यादा लाड प्यार में पले नवीन बिजनेस संभाल काफ़ी आगे बढ़ा लिए थे लेकिन अंदर से बहुत अड़ियल इंसान बन चुके थे। जाने ऐसा क्या देखा नंदनी में जो उससे शादी के लिए हामी भर दिए वरना सैकड़ों लडकियों को नापसंद कर चूके थे।

"बड़ी अच्छी जगह पर रिश्ता हुआ है नंदनी का बहन न कोई आगे न पीछे सिर्फ़ ले देके नवीन ही की उतने बड़े बिजनेसमैन का एकलौता वारिस " मां मौसी को फोन से बता रही थी।

"वाह! दिदी बहुत खुशी का समाचार सुनाई उतने बड़े खानदान में उसका रिश्ता होना हमारे लिए बहुत गर्व की बात है, और अपनी नंदनी है ही बहुत भाग्यशाली और खूबसूरत " नंदनी की मौसी...

नवीन और नंदनी की शादी बहुत शाही अंदाज में शानदार तरीके से संपन्न हुई,शादी बाद नंदनी ससुराल आई पहली रत को नवीन बिना कोई तरीफ़ किए उससे अपने बारे में कुछ बात बताए...

"मुझे पत्नी के रुप मे एक ईमानदार, वफ़ादार औरत पसंद है जो की अपने पति से हमेशा यह बताए की वह सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी है..."

"और मुझे यह पसंद है की ....

"और हाँ पतीव्रता स्त्री अपने पति के सामने अपनी ज़ुबान नही खोलती "

एक बात और मैं अपना हर काम वक्त पर करता हूँ किसी को भी मेरे पर्सनल लाइफ में इंटरफेयर करने की कोई जरूरत नहीं ..

"और कोई बात जो आपकों पसंद हों तो बता दीजिए..."

"और हाँ मैं उन मर्दो में से नहीं हूँ जो अपनी पत्नीयों से सारी बातें शेयर करते है।"

"ओके मै इन बातो का ख्याल रखने की पूरे मन से पूरी कोशिश करूंगी "

" शाम को एक पार्टी में जाना हैं तुम तैयार रहना " कह नवीन ऑफिश गए, शाम को घर आने के बाद नंदनी को देखकर ....

"क्यों क्या हुआ तुम तैयार नहीं हो, बोला था न ..?"

"मैं तैयार हूँ "

"ऐसे ...?"

"हाँ क्यो क्या हुआ ?"

बिन कुछ बोले वे एक अपनी पसंद की साड़ी पकड़ाकर, पहनवाया और बोले अब चलो उसकों एक सलोन में लेकर गए चेहरे पर लीपा पोती करवाया उसके बाद पार्टी में लेकर गए,रास्ते भर नंदनी सोचते गई पता नहीं कैसे इंसान है इनको मेरा पहनना,खाना हँसाना,बोलना सब इनके मर्जी से चाहिए मुझे अजीब सी घुटन होती है इनके साथ,न जाने पूरी जिंदगी कैसे कटेगी ?

"देखो अपने बढ़ते वजन का ध्यान रखा करों कहीं  तुम्हरा कमर कमरा न हो जाए, थोड़ा वाक किया करों, जिम ज्वोइन् करो, आखिर तुम दिनभर घर में करती क्या हों ? मुझे यूँ उलझी, मोटी औरते बिल्कुल पसंद नहीं कम कम अपने लिए न सही बल्कि मेरे लिए अपने चेहरा और शरीर का ख्याल रखों " थोड़ा सा आप नंदनी का शरीर भारी दिखता टोकने लगते|

" क्या मेरी कोई मर्जी नही है, शादी के इतने साल बीत चूके फिर भी आप सिर्फ अपनी पसंद ना पसंद की बात करते है कभी मुझसे भी जानने की कोशिश किया है मुझे क्या पसंद और क्या नापसंद ?"

"तुम बहुत बोलने लगी हों आजकल मैं क्या करूंगा तुम्हारे पसंद,नापसंद को जानकर कौन तुमको कमाने या खोजकर लाने को बोलता हूँ मै सिर्फ इतना चाहता हूँ की तुम आराम से रहो और ये अपना हूलिया थोड़ा ठीक- ठाक रखा करो।"

"क्या जीवन में पैसा कमाना ही है सब कुछ

है अगर दिल करे तो कोई अपने ही घर में अपनी मर्जी से थोड़ा बिखरा हुआ नहीं रह सकता ? मैं माँ बनना चाहती हूँ एक बच्चा हो जाएगा तब मेरा भी दिल लगा रहेगा ...."

"बच्चे के बारे में कभी भुलकर सपने में आप मत सोचना मुझे बच्चें बिल्कुल नहीं पसंद, मैने पहले ही कहाँ था मुझे फ़िजूल के ये तुम्हारा बकवास पसंद नहीं मेरे दिल पर असर पडता है मुझे कुछ हों जाएगा तब रहना अपनी मर्जी से ..."

" लेकिन मुझे तो बच्चें बहुत अच्छे लगते है, अजीब सवाल है कुछ होने के लिए क्या मुझकों कुछ नहीं हों सकता, क्या मैं इस दुनियां में अमृत का घड़ा पीकर आई हूँ ...?"

"नहीं तुमको कुछ नहीं होगा तुम देखना ..."

एक दिन सहायिका अपनी छोटी बेटी को घर लेकर आई उसको देख नंदनी के अंदर की औरत जाग उठी वह उसको बिस्कुट पकड़ा उसे पुचकारने लगी उसको देख नवीन कमरे में आने को कह दानदानते हुए कमरे में चले गए उनके पीछे नंदनी भी घबराई हुई आई ...

" क्या कर रही थी तुम और सहायिका अपनी बेटी लेकर क्यों आई है .."

"क्या हो गया आपको बच्ची है वह कोई ऐसी वैसी चीज नहीं ...?"

"चुप्पप मना किया था न मुझे बच्चे बिल्कुल पसंद नहीं फिर क्यों ..?" बोल कर दानदानते हुए बाहर निकल गए। 

एमए, बीएड नंदनी बिल्कुल गवार बन कर रह गई थी, उस घुटन भरे माहौल से बहार निकल जाना ही सही रास्ता सुझा मन ही मन वह फैसला कर चुकी थी।

जब नवीन घर आये तब नंदनी बोली, मैं कैसे समझाऊं आपको की किसी को बांध कर रख लेने से उस पर कब्ज़ा जमाया जा सकता है पर जीता नहीं जा सकता और जब आप मेरे दिल को नहीं जीत सके तब मुठ्ठी में बंद करके क्या हासिल होगा ?

"तुम मुझे क्या समझाओगी पहले खुद समझाना सीखों तुम बार -बार वही काम करती हो जो मुझको बिल्कुल नापसन्द है "

पार्क के बेंच पर बैठे- बैठे बातो को याद कर वह अपने फैसले से खुश थी बस मलाल एक बात की रह गई आख़िर उसके दिमाग में यह बात पहले क्यों नहीं आई की पति से अलग हो जाऊं।


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