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Neetu Shrivastava... ✍️✍️

Others

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Neetu Shrivastava... ✍️✍️

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पश्चात

पश्चात

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"मम्मी आप तो हिम्मत वाली है सारी जिंदगी आपने सबकुछ अकेले ही संभाला है आप मेरी ताकत है मैं आपको कुछ नहीं होने दूंगा " हर्ष अपनी मां से।


"बेटा तुम लोग खुश रहो बस अब ईश्वर से सिर्फ यह प्रार्थना करती हूं " हर्ष की मां हर्ष और बहु जेसिका से बोली।


"मैं जा रहा हूं मम्मी का दवाई लाने, जेसिका तुम इनका ख्याल रखाना " पत्नी से कह हर्ष चला गया उसके बाद पत्नी जेसिका बेड पर पड़े सास को देख गुस्से से जली-कटी बाते सुनाने लगी ..


"पड़ गई आपके कलेजे में ठंड आपसे बर्दास्त नहीं हुई न हमारा बाहर जाना अब हम नहीं जाएंगे , ये ब्लडप्रेशर वगैर कुछ नहीं होता इस उम्र में यह सब चलता रहता है आपका बेटा नहीं समझता की आप एक नंबर की ड्रामेबाज हैं पर मैं सब समझती हूं।"


दो साल बाद इस साल पति और बेटी के साथ घूमने जाने का प्रोग्राम बना था टिकट और होटल बुक किया जा चुका था। दो दिन बाद ही निकलना था तभी अचानक सास की तबियत बिगडी और जाना कैंसिल हो गया। जेसिका टूर पर जाने के लिए पैकिंग कर रही थी अचानक उसकी सास चक्कर खाकर गिर पड़ी। हर्ष को कॉल कर स्थिति बता डॉक्टर को साथ लाने को बोल वह सास को संभालने का प्रयास करने लगी। जल्द ही हर्ष और डॉक्टर आ गए। डॉक्टर ने चेकअप कर बीपी हाई बताया तथा खाने में परहेज़ करने को कह २,४, दिनों तक घर पर ठीक से देखभाल करने के बाद हॉस्पिटल लाकर अच्छे से चेकअप कराने की सलाह दे कुछ दवाएं लिख हर्ष को पर्चा पकड़ाया। डॉक्टर की बात सुनते ही हर्ष जेसिका से धीरे से टूर पर जाने वाले प्रोग्राम को कैंसिल करने की बात फुसफुसाई।


कुछ दिनो के बाद शोभा जी ठीक हो गई पर जानें ऐसा क्या हुआ की अब उनके कान से बिल्कुल सुनाई देना बंद हो गया। घर में सब उनसे बोलते कुछ और वे जबाव देती कुछ और चाहे वो कान में हियरिंग पहने होती उसके बाद भी।


जेसिका अपनी मां से फ़ोन पर "मां देखो न मेरी सास को एक तो इनसे वजह से कहीं जाना मुश्किल है ऊपर से डॉक्टर को दिखाने और हियरिंग पहनने के बाद भी नहीं सुनने का ड्रामा कर जीना हराम कर दिया हैं और अपने बेटा को देख बेचारी बन जाती है।"


"अरे जेसिका हर्ष के अलावा कोई और औलाद होती तो वे भी मेरी तरह बात कर अपने मन की पीड़ा कम कर लेती सास के लिए ऐसी बातें बोलना शोभा नहीं देता तुम्हें उनका ख्याल रखना चाहिए" जेसिका की मां।


"आप नहीं समझेंगी मम्मी इस बुढ़िया के ड्रामे इनके वजह से हर्ष कितने परेशान रहते हैं जब ये मर जाएंगी तब ही मुझे चैन आएगा।" मां की नसीहत को सुन मन के भड़ास गुस्से में निकाल फ़ोन काट दिया जेसिका ने।


एक दिन पंक्ति हर्ष और जेसिका की ५साल की बेटी दादी से कहानी सुन रही थी और बीच में प्रश्न भी पूछ रही थी पर उसकी दादी उसके कहानी के बीच में पूछते सवालों का जबाव नहीं दे कर अपने ही धुन में कहानी सुनाए जा रही थीं तब नन्हीं पंक्ति दादी के कान में हियरिंग पहना कर उनसे बोली इसे कानों..


"दादी इसे पहन लो" मैं आपसे पूछ क्या रही हूं और आप जबाव क्या दे रही है। उसकी प्यारी बातों को सुन उसके पापा हर्ष उन दोनों के पास आकर अपनी मां के पास बैठ उनसे कहने लगे..


"ठीक ही तो कह रही है पंक्ति मां आप हमेशा इस आला यानी इस हियरिंग को कानों में पहने रहें" कहते कान और हियरिंग के तरफ़ इशारा कर उनको पहनने के लिए समझाया।


"तुम परेशान मत हो बेटा मैं दवा समय से खाती हूं भूलती नहीं हूं और इसे लगाने से कुछ सुनाई नहीं देता बल्कि उल्टे कान दुखने लगता है।


मां की बाते सुन हर्ष दुखी होकर बोला "आप परेशान मत हो मां मैं आपको सबसे अच्छे डॉक्टर से दिखाऊंगा" और मन ही मन सोचने लगा अचानक से कैसे मां को बिल्कुल सुनाई देना बंद हो गया ?


पत्नी जेसिका के पास आकर हर्ष "समझ नहीं आ रहा मां को अचानक से सब कुछ सुनना बंद कैसे हो गया और अब तो हियरिंग का डिवाइड भी सही से काम नहीं कर रहा हैं आज पंक्ति अपनी बात मां को नहीं समझा पा रही थी तुम कैसे समझा लेती हो ?"


"जैसे तैसे करके समझा लेती हूं बल्कि मैं तो यह भी कोशिश करती हूं की मम्मी जी को ऐसा नहीं लगे की हम उनके वजह से परेशान है। आपने ने एक बेटा होने का फर्ज बखुबी निभाया है अब ईश्वर पर छोड़ दें।"


जेसिका कुछ देर पहले ही मां बेटे की बातों को दरवाज़े पर कान लगा कर सुन रही जेसिका हर्ष को वहां से आते देख तुरंत तेज़ी से भाग अपने कमरे में आ कर बैठी थी। हर्ष को बाहर जाते ही वह अपनी मां से फ़ोन पर सास की शिकायत करने लगी।


"मां आप देखना कुछ दिन बाद इस घर में खाने के लाले पड़ने वाले हैं क्योंकि मेरी सास के इलाज में पहले ही काफी पैसा खर्च होता था अब और बढ़ने वाला है मैंने हर्ष को उनसे बातें करते सुना है कि अब महंगे डॉक्टर से उनका चेकअप करवायेंगे।"


जेसिका की सास अपने पति को वर्षो पहले गुजर जाने के बाद अनुकंपा पर मिली नौकरी को करते हुए अकेले हर्ष की परवरिश कर उसे काबिल बनाया जब हर्ष अपने साथ पढ़ने वाली जेसिका को पसंद कर उससे शादी करने की इच्छा मां को बताया तब वे खुशी से हर्ष और जेसिका की शादी कर उसे प्यार से अपना ली। लेकिन जबसे वे रिटायर्ड हुई हैं तबसे उनका पूरा खर्च हर्ष उठाता है जो की जेसिका को बिल्कुल बर्दास्त नहीं होता।


"अच्छी बात है न बेटा तुम्हारा पति एक अच्छा बेटा है जो अपनी मां का अच्छे से ख्याल रखता है" जेसिका की मां।


"तुम कैसी हो बेटा" जेसिका की मां


"मैं बिल्कुल ठीक हूं मां आप कैसी हो " जेसिका।


"अरे बेटा थक गई हूं "


"क्यूं क्या हुआ आपको "जेसिका घबराई हुई।


"सुबह तुम्हारे भाई को नाश्ता बना कर दिया रसोई समेटी थकूंगी नहीं "जेसिका की मां।


"क्यूं मम्मी आपने सारे काम किया भाभी कहां हैं " जेसिका।


"महारानी का मिजाज़ ठीक नहीं है अपने आप को कमरे में बंद कर लिया है तो सारे काम मैं नहीं तो कौन करेगा ?" जेसिका की मां।


"मां मुझको भईया पर बहुत गुस्सा आ रहा है वे समझाते क्यूं नहीं भाभी को " जेसिका


"अरे उसकी इतनी हिम्मत कहा वह तो सब कुछ जानते हुए भी उसकी खिदमत करते रहता है।"


कुछ दिनों बाद जेसिका रसोई में अपने लिए चाय बना रही थी वहीं उसकी सास आई और बोली "क्या कर रही हो जेसिका बेटा ?"


"आपको दिखाई नहीं दे रहा मैं अपने लिए चाय बना रही हूं " जेसिका नाराज़ स्वर में कही।


"एक कप मेरे लिए भी बना दो बेटा "उसकी सास नरम स्वर में।


"अब आप इतनी भी बूढ़ी नहीं हुई की अपने लिए एक कप चाय नहीं बना सके वैसे भी मैंने सिर्फ़ एक कप बनाया था आप बना लीजिए सभी चीजें यहीं तो पड़ा है" बीपी, शुगर तो पहले से था ही अब एक और नई बीमारी कान से नहीं सुनाई देने की, मेरा दिमाग़ ख़राब करके रखें रहती है दिन भर जानें कब इनसे छुटकारा मिलेगा भुनभुनाती जेसिका अपना चाय का कप उठा वहा से अपने कमरे में जाती जेसिका के कानों में सास की आवाज़ सुनाई पड़ी..

"हमेशा सुखी रहो, आबाद रहो।"


एक दिन हर्ष बेटी को गोद में उठा कर उससे प्यार से समझाते हुए कहा "बेटा मेरे पास वक्त कम होता है न ऑफिस में ज्यादा काम होने के वजह से इसलिए मैं आपकी दादी को समय नहीं दे पाता , पर आप तो बहुत समय होता है उनका ख्याल रखना ताकी भगवान जी मुझको सज़ा नहीं देंगे आप यह नहीं चाहते हो न की भगवान जी आपके पापा को सज़ा दें।"


"हां पर मम्मा क्यूं दादी को तकलीफ़ देती है " पंक्ति पापा से।


"नहीं बेटा आपकी मम्मा उनको तकलीफ़ नहीं देती बल्कि वे तो उनका बहुत ख्याल रखती है , तुम्हें ऐसा लगा होगा " हर्ष पंक्ति से।


"नहीं पापा मम्मा दादी को बहुत तकलीफ़ देती है जब आप ऑफिस होते है। मम्मा दादी को बहुत डांटती हैं कभी -कभी उनको धक्का भी दे देती है और दादी चुपचाप उनकी बातों को सुनते रहती है और रोते रहती हैं।" बेटी की बातें सुनकर सन्न रह गए हर्ष।


"आज चौबीस तारीख़ है और पैसे काफ़ी कम बचे है बहुत सोच समझ कर खर्च करना पड़ेगा।" हर्ष पैसों का हिसाब लगाते जेसिका से बोला।"


"हर्ष कभी आपने मम्मी जी के दवाओं पर खर्च देखे है " जेसिका।


"तो क्या करू दवाएं लाना बंद कर दूं छोड़ दूं उनकी दवाएं " हर्ष।


"मैं यह नहीं कह रहीं हूं मेरे कहने का मतलब है अपने मुझे गलत समझा।"


"फिजूलखर्ची बेकार की आनलाइन शापिंग, आए दिन किटी पार्टी और मॉल से खरीदे समान का भी हो सकता है न जेसिका " हर्ष के इस सच सवाल पर जेसिका चुप हो गई।


एक दिन रात को जेसिका के पेट में बहुत तेज़ दर्द हुआ हर्ष को रात में उसे हॉस्पिटल लेकर जाना पड़ा घर में हर्ष की मां और बेटी थी। परेशान हर्ष अपनी मां को कागज़ पर लिख कर जेसिका के हर स्थिति से अवगत कराते रहता , उसकी मां पंक्ति अपना और घर का ठीक से ध्यान रखने के साथ ईश्वर के समाने जेसिका को ठीक होने कि दुआए भी मांग रही थी। खुद बीमार होकर भी उनको यह सब करते देख हर्ष अपराध भावना से ग्रसित हो रहा था| डॉक्टर जेसिका को हेपटाइटिस बी नामक छूआ छूत की बीमारी बता घर वालों को भी उसके कमरे में एहतियात बरतने के साथ जाने की सलाह दे घर जानें की अनुमति दिया था।


जेसिका की बीमारी सुन उसके घर की सहायिका काम छोड़कर चली गई। उसके घर आने के बाद उसकी सास डॉक्टर के कहे अनुसार एहतियात बरतने की बातों को अनसुना कर उसको ठीक करने के लिए दिन रात सेवा में जुट गई| उसके खान- पान से लेकर हर्ष और पंक्ति का भी अच्छे से ख्याल रखती थक जाने के बाद भी। जेसिका को खाने में क्या देना है से लेकर पीने का पानी उबालकर देती उसके अलावा समय- समय पर दवाए ‌और फल जूस दे " जीती रहो "का आशीर्वाद देती रहती। जेसिका से मिलने उसके मायके से एक ही शहर में होने के बावजूद भी कोई नहीं आया। जेसिका बहुत तेजी से दिन प्रतिदिन ठीक होने लगी एक बहुत अच्छी सहायिका भी मिल जाने से मम्मी जी को आराम हो गया था। एक दिन जेसिका अपनी सास को जूस का गिलास लाते देख 'मम्मी जी' कह उनका हाथ पकड़ कर रोने लगी और बोली..


"मम्मी जी मैंने आपके साथ हमेशा बुरा बर्ताव किया मेरी करतूतों का फल है जो मुझको इतना कष्ट भोगना पड़ा आप मुझे माफ़ दिजिए मैं बहुत शर्मिंदा हूं आपने इन्हें अकेले संभाला और मैं अपने ही घमंड से चूर थी।"


"नहीं बेटा आखिर तुमने ऐसा किया क्या है जो मुझसे माफ़ी मांग रही हो ? तुम बहुत अच्छी हो तुम्हारी कोई गलती नहीं, कुछ उम्र का तकाज़ा और कुछ बचपना तुमको उस तरह से करने और बोलने पर मजबूर करता मैं उन बातों को वही भूल जाती इसमें माफ़ करने जैसी क्या बात।"


"मम्मी जी आपकी समझदारी से आज सब कुछ ठीक है" सास के सामने हाथ जोड़ पश्चाताप की आंसू बहाती सास जेसिका।


जेसिका की सास उसके आंसू पोंछ गले से लगा ली दरवाज़े से अंदर आता हर्ष सास बहु की प्यार भरी बातों को सुन अपनी मां के पास बैठ गया।


हर्ष की मां बेटा-बहु से कही "बेटा यह सच है कि अब मुझे कुछ सुनाई नहीं देता पर भावनाएं ज़िंदा है तुम लोग मेरी दुनिया हो मैं कभी यह नहीं चाहती की मेरी वजह से मेरे बच्चों की गृहस्थी में तनाव हो या मैं कभी कोई उनकी तनाव भरी बातों को सुनूं इसलिए मुझे मेरा बहरा हो जाना ठीक है।"


"आपका ह्रदय बहुत कोमल और विशाल है मम्मी जी मैं अपने स्वार्थ में बहुत निष्ठुर हो गई थी जो आपका यह ममत्व भरा चेहरा नहीं दिखाई देता था आज मैं आपसे वादा करती हूं मैं ख़ुद आपको शहर के सबसे बड़े डॉक्टर से दिखा कर अपके कान ठीक करवाऊंगी " भावुक जेसिका अपनी सास से लिपट गई।


रिश्तों की मजबूती और खुबसूरती को बरक़रार रखने के लिए एक दूसरे के प्रति प्यार, समर्पण और समझदारी का होना बेहद जरूरी होता है , न की कुढ़ने , घुटने या इल्जाम लगाने का।




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