एक परिचय भारतवर्ष का
एक परिचय भारतवर्ष का
जब मेरी सर ज़मीन पर विदेशी पधारते हैं और मुझे भारतीय भारतीय कर के पुकारते हैं,
छप्पन इंच का मेरा सीना गर्व और अभिमान से और भी चौड़ा हो जाता जब वे मुझे भारत माता से कुछ इस तरह जोड़ देते हैं।
अपने महान देश का गर्व से बखान करते नहीं थकती मैं भी,
अपने वीरों की शहादत के किस्से उन्हें सुनाती रूकती नहीं कभी।
विस्मय से भर जाते उन सभी के दिल जब कतार निःस्वार्थ बलिदानों की कहानियों की लग जाती,
लाल किला यूँ ही नहीं गर्व से लाल है, तिरंगे की शान यूँ ही नहीं बरकरार है, शहीद स्मारक की यूँ ही नहीं प्रज्वलित ज्योत है,
इस रहस्य से वाकिफ हर छोटी-बड़ी हस्ती हो जाती।
कतार लग जाती घटनाओं और वृतांतों की जब बाल-पाल-लाल, सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मबाई जैसी वीरांगनाओं की बात छिड़ जाती।
1857 से लेकर 1947 तक के 90 वर्षों के लम्बे स्वतंत्रता संग्राम में हुए अथक संघर्षों की कतार सी लग जाती।
उन सभी बुंदेले-हरबोलों का शुकराना करते- करते जब थकता नहीं हर भारतीय,
आश्चर्यचकित हो जाते और प्रफुल्लित हो जाता वहाँ मौजूद हर कोई।
दर्शन कराते उन विदेशियों को इंडिया गेट, स्वर्ण मंदिर, गोलकोंडा किले और सूर्य मंदिर का,तो दांतों तले उंगली दबा ही लेते सभी,
महान इतिहास के बलबूते ही सम्पूर्ण विश्व में भारतवर्ष का परचम लहराता, वाकिफ हों जाता इस तथ्य से भली-भांति हर व्यक्ति।
अनेकता में एकता, विविधता के बावजूद अखंडता, सतरंगी होते हुए भी समता जिस देश की विशालता का परिचय स्वयं देते,
जहाँ माटी को मां और धरती को देवी का दर्जा देते व पूरी प्रतिष्ठा और सम्मान से पूजते।
जहाँ जय हिन्द, जन मन गण, वन्दे मातरम और जय जवान जय किसान के पल पल नारे और जयघोष होते,
इस पावन धरा पर पधार कर, भारत-भूमी की गौरवगाथा का वृतांत सुनकर,वशीभूत हों सभी भारतमाता को कोटि- कोटि नमन करते।
