एक फौजी की दरियादिली और एक आतंकवादी का समर्पण
एक फौजी की दरियादिली और एक आतंकवादी का समर्पण
मेरी यूनिट पांच राजपूत अभी पांच महीने पहले सांबा आयी है साम्बा भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य के साम्बा जिले में स्थित एक नगर है। यह जिले का मुख्यालय है। और एक तहसील का दर्जा रखता है। साम्बा भारत व पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित है और सुरक्षात्मक दृष्टि से बहुत महत्व है , यह राष्ट्रीय राजमार्ग १अ पर स्थित। निकटतम रेलवे स्टेशन साम्बा है, जो दिल्ली-जम्मू मुख्य रेल मार्ग पर पड़ाव है।और निकटतम हवाई अड्डे - जम्मू, अमृतसर।
जम्मू और कश्मीर उत्तर भारत में स्थित राज्य है। कश्मीर के सीमांत क्षेत्र पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सिंक्यांग तथा तिब्बत है। कश्मीर प्रदेश को 'दुनिया का स्वर्ग' भी कहा जाता है। अधिकांश राज्य पर्वत, नदियों और झीलों से ढका हुआ है। कश्मीर की संस्कृति कई संस्कृतियों का एक विविध मिश्रण है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ साथ, कश्मीर में अपने सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है , यह हिंदू, सिख, बौद्ध और इस्लामिक ज्ञान विद्या को जोड़ती है|
कश्मीर की संस्कृति में बहुरंगी मिश्रण है एवं यह उत्तरी दक्षिण एशियाई के साथ साथ मध्य एशियाई संस्कृति से अत्यधिक प्रभावित है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ कश्मीर अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है ; यह मुस्लिम, हिंदू, सिख और बौद्ध दर्शन एक साथ मिल कर एक समग्र संस्कृति का निर्माण करते हैं जो मानवतावाद और सहिष्णुता के मूल्यों पर आधारित है एवं सम्मिलित रूप से कश्मीरियत के नाम से जाना जाता है।
कश्मीरी (कोशूर) भाषा है। इस भाषा को केवल कश्मीरी पंडितों और कश्मीरी मुसलमानों द्वारा कश्मीर की घाटी में बोली जाती है। कश्मीरी भाषा के अलावा, कश्मीरी भोजन और संस्कृति बहुत हद तक मध्य एशियाई और फारसी संस्कृति से प्रभावित लगता है। कश्मीरी इंडो-आर्यन (दर्डिक उपसमूह) भाषा है जो मध्य एशियाई अवेस्तन एवं फारसी के काफी करीब है। सांस्कृतिक संगीत एवं नृत्य जैस वानवन, रउफ, कालीन / शाल बुनाई और कोशूर एवं सूफियाना कश्मीरी पहचान का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। कश्मीर में कई आध्यात्मिक गुरु हुए है अपने देश से से पलायन कर कश्मीर में बस गए। कश्मीर भी कई महान कवियों और सूफी संत भी हुए जिनमें लाल देद, शेख-उल्-आलम एवं और भी कई नाम है। इसलिए इसे पीर वैर (आध्यात्मिक गुरुओं की भूमि)के नाम से भी जाना जाता है।
समुद्र तल से 2730 मीटर की ऊँचाई पर स्थित, सांबा बर्फ से ढके पहाडों, हरे-भरे घास के मैदान, सदाबहार जंगलों वाली पहाड़ियां और घाटियों से घिरा हुआ है। मैं पांच राजपूत का कमांडिंग अफसर कर्नल अशोक सांबा के अपने टेम्पेरोरी घर में लेटा हुआ था। यह मेरी यूनिट की फील्ड पोस्टिंग थी। जनुअरी22 का महीना था और ठंड अपनी पराकाष्ठा पर थी। शरीर को गला ने बाली ठंड थी और ऐसा लग रहा था की यह बर्फ आपके पूरे शरीर को सुन्न कर देगा। ऐसे बाताबरण में मेरे जवान अपनी मातृ भूमि की रक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क थे। अचानक हमें सूचना मिली की अल उमर मुजाहिदीन संगठन का मुखिया मुश्ताक अहमद जर गर जो कुख्यात आतंकवादी हे अपने साथिओ के साथ सांबा के पश्चिम भाग में एक घर में छुपा हुआ है। बोह अपनी प्रिग्नेंट बीबी को देखने आया था। सुरक्षा बालों को सुचना मिली। उस को घेर लिया गया। बोह सुरक्षा बालों को चकमा दे कर भाग गया और पास के जंग लो में छिप गयासूचना में मुझे यह भी बताया गया कि उसकी बीबी की स्थिति बहुत खराब हे। डिलीवरी का आखिरी टाइम हे। अगर उसे चिकित्स्य सुविधा ना मिली तो ज़च्चा बच्चा दोनों मर जाएंगे। मैंने अपने जवानो की दो टुकड़ी बनाई। एक तो उस आतंकवादी को पकड़ने या मारने के लिए भेजी और दूसरी उस आतंकवादी की प्रिग्नेंट बीबी को उचित चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए भेजी। मैं स्वंय उसकी बीबी को देखने के लिए गांव गया।
गांव बालों द्वारा मुझे बताया गया कि यहाँ आस पास कोई हॉस्पीटल नहीं है। बीस किलोमीटर की दूरी पर है। लेकिन बाँह जाने पर ख़तरा बहुत है। आतंकवादी क्षेत्र है। पहाड़ी और घाटिया है जो पूरी तरह बर्फ से ढंकी है। बारिश की वजह से फिसलन बहुत है। मैंने अपने जवानो को संबोधित करते हुए कहा ," हमें हर हाल में इस प्रिग्नेंट महिला और इसके बच्चे की जान बचा नी है। आप लोगो के मस्तिष्क में यह बात बिलकुल नहीं आनी चाहिए की बोह एक आतंकवादी की बीबी है बल्कि मस्तिष्क में यह ध्यान रखना हे की बोह भारत की बेटी है। वो हमारी बहिन है। हमें उसकी और उसके बच्चे की रक्षा करनी है। ”मैंने आदेश दिया सबसे आगे हथियार बंद टुकड़ी पर्याप्त मात्रा में रहेगी और किसी भी स्थिति से निबटने के लिए तैयार रहेगी। उनके साथ रास्ते को साफ़ करने बाले रहेंगे। कुछ गांव बाले भी साथ रहेंगे जो की हॉस्पीटल तक का रास्ता बताते रहेंगे। प्रिगनेंट औरत को चारपाई पर लिटाया जायेगा और चार जवान उसकी चारपाई को लेकर कंधे पर चलेंगे। इस तरह हमारे सैनिक उस को सही समय हास्पिटल पहुंचा सके और ज़च्चा बच्चा ठीक रहे।
मेरे जवानो की दूसरी टुकड़ी ने उस स्थान को पूरी तरह घेर लिया जहाँ आतंकवादी छिपे हुए थे। दोनों और से २४ घंटे से गोलाबारी चलती रही। आखिरकार हम उसके चार आतंकवादी साथिओ को मारने में सफल रहे लेकिन मुख्य आतंकबादीमुश्ताक अहमद जर गर भागने में सफल रहा।में कर्नल अशोक अपने ऑफ़िस के बहार कुर्सी पर बैठा हुआ चाय की चुसकी का आनंद ले रहा था। बहुत दिनों बाद सांबा में धूप निकली थी और आसमान साफ़ था।
मेरे गार्ड ने आकर मेरे से कहा ,"सर एक पंडित जी आप से मिलना चाहते है। इतनी ठंड में भी एक बनियान और एक पाजामा पहने हुए है। मुँह पूरा सपाट है। कोई दाढ़ी नहीं है। माथे पर एक बहुत बड़ा लाल टीका लगा है। ”
मैं यह सब सुन कर बहुत आश्चर्य में पड़ गया। सांबा में इतनी भयंकर ठंड पड़ रही है।माइनस तीन डिग्री तापमान है।कोई व्यक्ति पाजामा और बनियान में कैसे रह सकता है। मैंने गार्ड से कहा ,"पंडित जी को हमारे पास भेजे " |
कुछ समय बाद पंडित जी मेरे सामने थे। मैंने उनको अपने सामने बैठने का इशारा किया। पंडित जी बोले ,"साहब मेरी इतनी औकात नहीं हे कि में आप जैसे देवता के सामने बैठ सकू। आप मेरी बात सुन लीजये। फिर चाहे आप मुझे गोली मार देना या यही पर फांसी पर लटका देना।"
मैंने कहा ," ठीक है। लेकिन में तुम्हारी बात तभी सुन पाउँगा जब तुम बैठ कर बात करोगे "।
उसने कहा ," साहब में आतंकवादी हूँ "।
मैंने कहा ," कोई बात नहीं। आतंकवादी भी व्यक्ति होते हैं। लोग उनेह बर गला देते हैं । कुछ परिस्थिआँ उनके खिलाफ हो जाती है। बे चारे वो आतंकवादी बन जाते है। "
वो बोल रहा था ," साहब आपके पास तक और मिलिट्री एरिया में आने के लिए मैंने पंडित जी का भेष धारण किया। मैं मैं मुश्ताक अहमद जरगर अल उमर मुजाहिदीन संगठन का मुखिया हूँ| यदि आतंकवादी गुटों को पता चल जाता की मैं आर्मी के सामने आत्म समर्पण करने जा रहा हूँ तो बोह मुझे मेरे परिवार सहित मौत के घात उतार देते। कश्मीर पुलिस में भी बहुत पुलिस बाले आतंकबादीओ के पक्ष में काम करते है। आपकी सेना भी मुसलमानों को परेशान करती है और बहुत ही उलटे सवाल पूछती है। ”
उसने पुनः बोलना शुरू किया ,” साहब आपने मेरी बीबी और बच्चे की जान बचाई है। यह जिंदगी आपकी है। यह में आपके चरणों में अर्पित करता हूँ। कुछ लोगो के चक्कर में मैं धर्म के नाम पर बहक गया था । कल जब आपने मेरी बीबी और बच्चे की जान बचाई। तब मुझे महसूस हुआ कि में गलत हूँ।”
उसने पुनः बोलना शुरू किया ,” में आपको आंकवादियों के ठिकाने बताऊंगा। में सरेंडर करना चाहता हूँ। आप मुझे गिरफ्तार कर ले। मैंने उसकी बीबी और बच्चे को हॉस्पीटल से डिस्चार्ज करा कर सेना की सिक्योरिटी में रखबा दिया।
उसकी मदद से हम आतंकबादीओ का नैट वर्क ख़त्म करने में कामयाब रहे। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को खत्म करने के लिए हमनेलगातार अभियान चलाया । पिछले छह महीने में सुरक्षाबलों ने 93 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया, जिसमें टोप कमांडर भी शामिल थे । इस दौरान हमारा एक भी जवान शहीद नहीं हुआ था। आतंकियों के खिलाफ सुरक्षा बल के जवान एलओसी और घाटी के भीतर दोनों ही जगह अभियान चला रहे थे । हाल ही में सेना ने जैश ए मोहम्मद के टाप कमांडर रियाज नायकू, जुनैद सेहराय सहित कई आतंकियों को ढेर कर दिया था।
इसके साथ ही हमने पिछले पांच महीने में जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद समूहों से जुड़े 26 विदेशी आतंकवादी मारे गिराए है। और मुठभेड़ स्थल से हथियारों और गोला-बारूद समेत आपत्तिजनक सामग्री मिली है .’
उस आतंकवादी की सूचना के आधार पर ही हमारे जवानो ने नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया था और इस दौरान एक पाकिस्तानी आतंकवादी मारा गया था. सैनिकों को दर्शन पोस्ट के पास नियंत्रण रेखा पर कुछ संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी और उन्हों ने घुसपैठियों को चुनौती दी जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई. उन्हों ने कहा कि सैनिकों ने जवाबी कार्रवाई की जिसमें एक आतंकवादी मारा गया.
मारे गए आतंकवादी के पास से भारी मात्रा में नशीला पदार्थ और हथियार जब्त किए गए थे, जिसमें हेरोइन के 10 पैकेट, दो एके राइफल, दो एके मैगजीन और दो पिस्तौल सहित गोला-बारूद शामिल था
इतना ही नहीं उस आत्म समर्पण करने बाले आतंकवादी मुश्ताक अहमद जर गर से हमें जैश-ए-मोहम्मद लश्कर-ए-तैयबा उर्फ जमात उद दावा हिजबुल मुजाहिदीन अल उमर मुजाहिदीनहरकत-उल-मुजाहिदीन/हरकत उल अंसार जम्मू-कश्मीर इस्लामिक फ्रंट अल कायदा इस्लामिक स्टेट तहरीक उल मुजाहिदीन अल-बदर इसके अलावा कश्मीर में दीनदार अंजुमन, जमीयत उल् मुजाहिदीन और दुख्तरान-ए-मिल्लत जैसे संगठनों के बारे में बहुत गोपनीय जानकारी मिली। उनके लोकल लीडर से गठबंधन का पता चला। स्थानीय व्यक्ति जो आतंकबादीओ की मदद करते थे उनको गिरफ्तार करने में मदद मिली। इतना ही नहीं उस आत्म समर्पण करने बाले आतंकवादी मुश्ताक अहमद जर गर ने अन्य आतंकबादीओ से बात चीत कराई। उनेह समझा या। उनेह राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया और काफी हद तक हमें सफलता भी मिली। उसमे से अनेक समर्पण करने बाले आतंकवादी बाँह के प्रधान है और जम्मू कश्मीर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे है।
किसी ने सही ही कहा हे जो काम प्यार और महोब्बत कर सकती है वो गोली नहीं कर सकती है।
