एक किस्सा अधूरा सा-4
एक किस्सा अधूरा सा-4
अल्फिया आईने के सामने खड़ी खुद को देख रही थी।आज उसका और इमरान का निकाह है। उन दोनों के पैदा होने पर उन दोनों के दादा जो पक्के दोस्त थे, उन्होंने यह ऐलान किया था की बड़े होने पर वो अपने पोते पोती का निकाह करवाकर अपनी इस दोस्ती और भी पक्का कर रिश्तेदारी में बदल देंगे। तब से दोनों परिवारों के लिए ये बात जैसे पक्की हो गयी थी। आज दोनों के दादा नहीं है पर उनका वो वादा आज भी कायम है। उसी वादे को पूरा करने के लिए अल्फिया यहाँ ऊपर अपने कमरे में दुल्हन के जोड़े में खड़ी है और नीचे इमरान दूल्हे के कपड़ो में। क्योंकि दोनों बचपन से ही अपने रिश्ते की बात सुनते आ रहे थे तो ये बात उन्हें बहुत छोटी उम्र में ही समझ आ गयी थी की उनका साथ जिंदगी भर का था। दोनों ने ही काफी लम्बा सफर तय किया था साथ में। दोस्ती से प्यार तक का। आज उसी सफर में एक और पड़ाव का वक़्त है। मोहब्बत से निकाह तक का। इस जन्म से उस जन्म का।
अल्फिया हर उस पल को याद कर रही है जो उन दोनों ने एक साथ बिताया था। दोनों के घर पास नहीं थे पर बहुत ज्यादा दूर भी नहीं थे। दोनों पहले एक ही स्कूल में और फिर एक ही कॉलेज में थे तो जाहिर ही है एक साथ बहुत वक़्त गुजरा है और साथ ही उतनी ही यादे भी बनाई है।
उसके दुल्हन के जोड़े की हर चीज से जुडी कोई न कोई याद है उन दोनों की। उसके हाथो की मेहँदी उसे याद दिलाती ही कैसे उसने गर्मियों की छुट्टियों में जब सब सो रहे थे तब इमरान के हाथो से मेहँदी लगवाई थी। उसके हाथो का तो ठीक था पर जो उसने इमरान को बदले में मेहँदी लगाई थी उसे देखकर सबने बहुत मजाक उड़ाया था। कह रहे थे मियां जी लड़के सिर्फ अपनी शादी में मेहँदी लगाते है तब उसके मियां इमरान ने कितने रोब में कहा था की मैनै तो अब मेहँदी लगा ली है तो करवा दो शादी। वो हरी चूड़ियाँ जो इमरान तब लाया था जब स्कूल से आल बॉयज ट्रिप राजस्थान घूमने गया था। आज तक संभाल कर रखी है वो चूडियाँ उसने। और वो लाल दुप्पट्टा , हाय ! अल्फिया को पता था की इमरान का पसंदीदा रंग लाल है तो इसलिए उसे भी हर ईद पर लाल सलवार कमीज ही चाहिये होता था। चाहे कोई कितने ही समझा ले पर लेना तो लाल रंग ही। लेती भी क्यों न भला इमरान का मन कभी भरता ही नहीं था उस रंग से। हर बार जब उसे नए सलवार कमीज में देखता तो बस देखता ही रह जाता। और तब तक देखते रहता जब तक अल्फिया के उसके बगल से गुजरते हुए उसका दुप्पटा उसके चेहरे को न छू लेता। वो भी कभी अपने उन लाल दुप्पटो को फेंकती नहीं थी। हर एक दुप्पटा उसने आज तक संभाल कर रखा हुआ है। सैकड़ो होंगे उसकी अलमारी में।
उसके पैरो में पायलो का वही जोड़ा था जो इमरान ने उसे अपनी पहली सैलरी से खरीद कर दिया था और साथ ही ये वादा भी लिया था की उनके निकाह में वो वही पायल पहनेगी। काजल की डिब्बी को देखककर उसके होठो पर मुस्कान खिल गयी। जब भी वो इमरान से मिलती थी तो जो पहली बात वो उससे पूछता था वो ये की काला टीका लगाया की नहीं। अगर कभी वो झल्लाकर कहती की क्या तुम भी कैसी बेतुकी बात लेकर बैठ जाते हो, तो वो खुद उसके आँखों से काजल लेकर उसके कान के पीछे टीका लगाते हुए हँसकर कहता था की पगली अगर मेरी दुल्हन को किसी की नज़र लग गयी तो। वही हँसी उसके होठो से भी छूट पड़ी और उसने डिब्बी खोलकर हमेशा की तरह कान के पीछे काला टिका लगा लिया।
अल्फिया के ख्यालो का सिलसिला तब टूटा जब उसकी अम्मी उसे निकाह की रस्म के लिए बुलाने आई। उसने नीचे जाने से पहले एक बार फिर खुद को देखा। आज वो उस दुल्हन के लिबास में है जिसमे खुद को देखने के चाह उसने अपनी ज़िन्दगी के हर दिन , हर पल की है। इमरान की दुल्हन और इस दुल्हन के दिल की ख़ुशी चेहरे पर नूर बनकर छलक रही है।

